कलियर सहित प्रदेश भर में 10 दिन में बेनकाब होगा वक्फ संपत्तियों का पूरा खेल! उत्तराखंड में रिकॉर्ड खंगालने का सबसे बड़ा अभियान शुरू,, मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों से तलब किया गया वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा, गढ़वाल और कुमाऊं कमिश्नरों को मिली जिम्मेदारी,, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स का बड़ा ऐलान—’वक्फ माफिया, अवैध कब्जेदारों और भ्रष्टाचार पर चलेगा सख्त प्रहार,

कलियर सहित प्रदेश भर में 10 दिन में बेनकाब होगा वक्फ संपत्तियों का पूरा खेल! उत्तराखंड में रिकॉर्ड खंगालने का सबसे बड़ा अभियान शुरू,,
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों से तलब किया गया वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा, गढ़वाल और कुमाऊं कमिश्नरों को मिली जिम्मेदारी,,
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स का बड़ा ऐलान—’वक्फ माफिया, अवैध कब्जेदारों और भ्रष्टाचार पर चलेगा सख्त प्रहार,
देहरादून। उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर अब तक की सबसे व्यापक और महत्वपूर्ण कार्रवाई शुरू हो गई है। वर्षों से विवादों, अधूरे रिकॉर्ड और कथित अनियमितताओं में घिरी वक्फ संपत्तियों की अब परत-दर-परत जांच होगी। वक्फ कमिश्नर ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए दस दिनों के भीतर अपने-अपने जनपदों में मौजूद वक्फ संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। शासन की इस पहल से माना जा रहा है कि उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों से जुड़े कई बड़े राज सामने आ सकते हैं।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को वक्फ संपत्तियों का पूरा और प्रमाणिक रिकॉर्ड कभी नहीं मिल सका। यही वजह है कि आज भी अनेक संपत्तियों का वास्तविक विवरण स्पष्ट नहीं है। कई दस्तावेज गायब हैं और कई संपत्तियों का मिलान तक नहीं हो पा रहा है उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं होगा तो यह कैसे तय होगा कि कौन-सी संपत्ति वास्तव में वक्फ की है और कौन उस पर कब्जा किए बैठा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते रिकॉर्ड सामने नहीं आया तो कई वक्फ संपत्तियां हमेशा के लिए निजी कब्जों में चली जाएंगी।
शादाब शम्स ने बताया कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कमिश्नरों को निर्देश दिए कि जिलाधिकारियों के पास उपलब्ध सभी राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण तत्काल वक्फ बोर्ड को उपलब्ध कराया जाए।उन्होंने कहा कि जैसे ही सभी जिलों से रिकॉर्ड प्राप्त होगा, उसका पुराने अभिलेखों से मिलान किया जाएगा। जहां भी रिकॉर्ड में गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा, अवैध कब्जा या भ्रष्टाचार सामने आएगा, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश से यदि हस्तांतरित रिकॉर्ड और जिलों का राजस्व रिकॉर्ड एक साथ मिल जाता है तो यह पता लगाना आसान होगा कि किन संपत्तियों में हेराफेरी हुई, किन दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई और किसने वक्फ की जमीनों का गलत लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। शादाब शम्स ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि “दस दिन बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा और सख्त एक्शन देखने को मिलेगा। वक्फ माफिया, अवैध कब्जेदारों और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा। कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियां किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि गरीब, यतीम, बेसहारा और जरूरतमंद मुसलमानों के कल्याण के लिए बनाई गई हैं। जिन परिवारों के पास रहने के लिए घर नहीं है या जो वास्तव में वक्फ संपत्तियों के लाभ के पात्र हैं, उन्हें इन संपत्तियों का लाभ दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन वर्षों में वक्फ संशोधन कानून, पंजीकरण प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कारणों से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी थी, लेकिन अब रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद बोर्ड पूरी मजबूती से आगे बढ़ेगा।प्रदेशभर में शुरू हुई यह कवायद केवल रिकॉर्ड जुटाने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और वैधानिक संरक्षण की दिशा में एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर अगले दस दिनों पर है, जब जिलों से पूरा रिकॉर्ड सामने आएगा और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।



