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विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक दरगाह में जलभराव से फूटा जायरीनों का गुस्सा!,, दरगाह परिसर बना तालाब, नालों की बदहाल सफाई और लचर व्यवस्थाओं पर उठे सवाल; प्रबंधन और सफाई सुपरवाइजरी पर लापरवाही के आरोप,, ‘हर साल होते हैं दावे, हर बारिश में डूबती है दरगाह’— अतिक्रमण हटाने, ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग,, ‘हर साल दावे, हर बारिश में वही हाल’— श्रद्धालुओं ने प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक दरगाह में जलभराव से फूटा जायरीनों का गुस्सा!,,

दरगाह परिसर बना तालाब, नालों की बदहाल सफाई और लचर व्यवस्थाओं पर उठे सवाल; प्रबंधन और सफाई सुपरवाइजरी पर लापरवाही के आरोप,,

‘हर साल होते हैं दावे, हर बारिश में डूबती है दरगाह’— अतिक्रमण हटाने, ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग,,

‘हर साल दावे, हर बारिश में वही हाल’— श्रद्धालुओं ने प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

इन्तजार रजा, हरिद्वार/कलियर। उत्तराखंड के पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध हज़रत साबिर पाक दरगाह में मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। देर रात से लगातार हुई बारिश के चलते दरगाह परिसर, मुख्य प्रवेश मार्ग और आसपास का बाजार जलमग्न हो गया। हालात ऐसे बन गए कि बरसाती पानी दरगाह परिसर तक पहुंच गया और ज़ियारत के लिए आए हजारों जायरीनों को घुटनों तक पानी में होकर गुजरना पड़ा। जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।

दरगाह परिसर में हुए जलभराव ने प्रबंधन के उन तमाम दावों की पोल खोल दी, जिनमें मानसून से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त होने की बात कही गई थी। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात से पहले नालों की सफाई, जल निकासी और अन्य तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरी व्यवस्था धराशायी हो जाती है।

स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों के अनुसार जलभराव का सबसे बड़ा कारण वर्षों से मुख्य नालों की समुचित सफाई न होना है। अधिकांश नाले गाद और कूड़े से पूरी तरह जाम पड़े हैं, जबकि कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो चुकी है। नतीजा यह रहा कि बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय सीधे दरगाह परिसर और बाजारों में भर गया। इससे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

लोगों ने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में भी इसी तरह दरगाह परिसर में जलभराव हुआ था। उस समय भी स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन चार साल बाद भी हालात में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि इस बार लोगों का गुस्सा पहले से अधिक नजर आया।

जलभराव के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए। अकीदतमंदों का कहना है कि जब पूरे परिसर में पानी भर रहा था, तब व्यवस्था संभालने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था की निगरानी करने वाले सुपरवाइजर नियमित रूप से जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई कराई जाती और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रहती तो आज बाढ़ जैसे हालात पैदा नहीं होते।

श्रद्धालुओं ने यह भी मांग की कि सफाई व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संबंधित सफाई सुपरवाइजर की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि लाखों लोगों की आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

जायरीनों और स्थानीय नागरिकों ने दरगाह प्रशासन से बरसात समाप्त होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल मुख्य नालों की सफाई, अवैध अतिक्रमण हटाने और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी स्थायी समाधान नहीं किया गया तो हर मानसून में दरगाह परिसर इसी तरह जलमग्न होता रहेगा और आस्था के इस प्रमुख केंद्र की छवि लगातार प्रभावित होती रहेगी। फिलहाल, भारी बारिश ने दरगाह प्रबंधन, सफाई व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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