अतिक्रमणअलर्टअवैध कब्जाअवैध धार्मिक स्थलों की बांढअवैध फर्जी नियुक्तिइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंऑपरेशन कालनेमि

पिरान कलियर में ‘ऑपरेशन कालनेमी’ की जरूरत क्यों पढ़ें पूरी पटकथा? कथित फर्जी नियुक्ति/ड्यूटी, मौखिक फरमान और दरगाह संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर उठे बड़े सवाल,, “ खिदमत के नाम पर फर्जी ड्यूटी से बाहर होने के बाद भी क्यों बनी हुई है सक्रियता और मोह,,  राजनैतिक दरबारों में मौ रफी बना फरियादी?” — मौ. रफी की कथित वापसी की कोशिशों और कुछ तथाकथित कलमगारों के संरक्षण तंत्र पर गरमाई चर्चा,, “डीएम मयूर दीक्षित साहब से जनता की गुहार, दरगाह की संपत्तियों को बचाइए साहब” — अवैध कब्जों, मौखिक आदेशों और विवादित सुपरवाइजरी सिस्टम की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज,,

पिरान कलियर में ‘ऑपरेशन कालनेमी’ की जरूरत क्यों पढ़ें पूरी पटकथा? कथित फर्जी नियुक्ति/ड्यूटी, मौखिक फरमान और दरगाह संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर उठे बड़े सवाल,,

“ खिदमत के नाम पर फर्जी ड्यूटी से बाहर होने के बाद भी क्यों बनी हुई है सक्रियता और मोह,,  राजनैतिक दरबारों में मौ रफी बना फरियादी?” — मौ. रफी की कथित वापसी की कोशिशों और कुछ तथाकथित कलमगारों के संरक्षण तंत्र पर गरमाई चर्चा,,

“डीएम मयूर दीक्षित साहब से जनता की गुहार, दरगाह की संपत्तियों को बचाइए साहब” — अवैध कब्जों, मौखिक आदेशों और विवादित सुपरवाइजरी सिस्टम की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज,,

इन्तजार रजा, हरिद्वार… विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं, कथित फर्जी नियुक्तियों, मौखिक आदेशों और दरगाह की बहुमूल्य संपत्तियों पर वर्षों से चले आ रहे कब्जा विवादों को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और दरगाह से जुड़े लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कालनेमी” की पहुंच दरगाह पिरान कलियर तक कब पहुंचेगी?

चर्चाओं के केंद्र में एक बार फिर मौ. रफी का नाम है। क्षेत्र में चर्चा है कि दरगाह में ड्यूटी और प्रवेश से जुड़ी उनकी भूमिका समाप्त होने अथवा सीमित होने के बावजूद वह विभिन्न राजनीतिक और प्रभावशाली दरवाजों पर दस्तक देकर दोबारा व्यवस्था में जगह बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा हो रहा है कि यदि किसी व्यक्ति की भूमिका समाप्त हो चुकी है तो फिर उसे दोबारा स्थापित करने की कोशिशें किसके संरक्षण में और किस उद्देश्य से की जा रही हैं?

यही नहीं, पूरा मामला अब उस कथित “मौखिक फरमान” तक पहुंच गया है, जिसका हवाला देकर एक विवादित सुपरवाइजरी तंत्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी नियुक्ति, ड्यूटी या अधिकार से जुड़ा कोई वैध लिखित आदेश मौजूद नहीं है, तो फिर किस आधार पर किसी व्यक्ति को विशेष संरक्षण दिया जाता रहा? क्या दरगाह जैसी महत्वपूर्ण संस्था लिखित नियमों से संचालित होगी या फिर कुछ लोगों के मौखिक आदेशों से?

दरगाह क्षेत्र में यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि पूरे मामले की जांच मौ. रफी से नहीं बल्कि उस तथाकथित सुपरवाइजरी व्यवस्था से शुरू होनी चाहिए, जिस पर वर्षों से मनमानी, पक्षपात और संरक्षण के आरोप लगते रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी सुपरवाइजर ने नियमों को दरकिनार कर किसी व्यक्ति को संरक्षण दिया, शिकायतों को दबाया या मौखिक आदेशों के नाम पर निर्णय लिए, तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू दरगाह की संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जों का है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की दरगाह भूमि और परिसंपत्तियों पर वर्षों से प्रभावशाली लोगों का कब्जा बना हुआ है। शिकायतें होती हैं, चर्चाएं होती हैं, लेकिन कार्रवाई के परिणाम आम जनता के सामने नहीं आ पाते। यही कारण है कि अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर दरगाह की संपत्तियों पर कब्जा जमाने वाले कथित “कालनेमी” तत्वों के खिलाफ निर्णायक अभियान कब चलेगा?

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि “ऑपरेशन कालनेमी” का उद्देश्य केवल छोटे और कमजोर लोगों पर कार्रवाई करना नहीं होना चाहिए। यदि वास्तव में धार्मिक संस्थाओं को भ्रष्टाचार, कब्जों और संरक्षण तंत्र से मुक्त कराना है तो उन प्रभावशाली लोगों तक भी कार्रवाई पहुंचनी चाहिए जो वर्षों से व्यवस्था पर प्रभाव बनाए हुए हैं।

जनता का यह भी कहना है कि दरगाह प्रशासन की चुप्पी कई नए सवालों को जन्म दे रही है। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो विवादित नियुक्तियों, ड्यूटी व्यवस्थाओं, मौखिक आदेशों और संपत्तियों से जुड़े मामलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? यदि कोई अनियमितता नहीं है तो पारदर्शिता से सभी शंकाओं का समाधान किया जा सकता है।

क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से मांग की है कि दरगाह पिरान कलियर की संपत्तियों का विशेष सर्वे कराया जाए, सभी विवादित कब्जों की सूची तैयार की जाए, कथित फर्जी नियुक्तियों और संरक्षण तंत्र की जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि दरगाह किसी व्यक्ति, समूह या प्रभावशाली नेटवर्क की जागीर नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की साझा आस्था और सार्वजनिक धरोहर है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या “ऑपरेशन कालनेमी” दरगाह की संपत्तियों पर कथित कब्जा जमाए बैठे प्रभावशाली तत्वों तक पहुंचेगा? क्या मौखिक फरमानों और संरक्षण की संस्कृति पर रोक लगेगी? और क्या दरगाह प्रशासन तथा जिला प्रशासन मिलकर जनता के इन सवालों का जवाब देंगे?

फिलहाल पिरान कलियर की फिजाओं में यही चर्चा गूंज रही है कि दरगाह की जमीन, दरगाह की व्यवस्था और दरगाह की गरिमा को बचाने के लिए अब आधे-अधूरे नहीं, बल्कि बड़े और निर्णायक कदम उठाने का समय आ चुका है। डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित से अब लोगों ने निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाई है

Related Articles

Back to top button