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धामी कैबिनेट विस्तार के बाद अब पोर्टफोलियो पर टिकी नजर,, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के बाद विभागों का गणित बना बड़ा सवाल,, क्या मुख्यमंत्री धामी कम करेंगे अपने विभागों का बोझ या भरोसेमंद मंत्रियों को देंगे बड़ी जिम्मेदारी

इन्तजार रजा हरिद्वार- धामी कैबिनेट विस्तार के बाद अब पोर्टफोलियो पर टिकी नजर,,

क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के बाद विभागों का गणित बना बड़ा सवाल,,

क्या मुख्यमंत्री धामी कम करेंगे अपने विभागों का बोझ या भरोसेमंद मंत्रियों को देंगे बड़ी जिम्मेदारी

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चल रही चर्चाओं और अटकलों के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार कर दिया है। विधानसभा चुनावों से पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। करीब एक साल पहले से मंत्री पद छिनने के बाद खाली पड़े स्थानों को भरते हुए एक साथ पांच विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।

इस विस्तार में पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों के साथ-साथ जातीय समीकरणों को भी साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है। खास बात यह है कि हरिद्वार जिले से दो विधायकों को मंत्री बनाकर राजनीतिक संतुलन बनाने का संकेत दिया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि इन नए मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग दिए जाएंगे।


हरिद्वार से दो चेहरे, क्षेत्रीय संतुलन का बड़ा संकेत

कैबिनेट विस्तार में हरिद्वार जिले को खास प्राथमिकता दी गई है। हरिद्वार सीट से विधायक और रुड़की से विधायक को मंत्री बनाकर सरकार ने मैदान क्षेत्र को मजबूत प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हरिद्वार उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा से अहम भूमिका निभाता रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए इस क्षेत्र को मजबूत प्रतिनिधित्व देना भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया। रुद्रप्रयाग जिले से विधायक को मंत्री बनाकर गढ़वाल के सुदूर इलाके को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसी तरह कुमाऊं क्षेत्र से भीमताल विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

इसके अलावा देहरादून के राजपुर क्षेत्र से विधायक को मंत्री बनाकर सरकार ने जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा है। माना जा रहा है कि भाजपा ने आगामी चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का पूरा खाका तैयार किया है।


अब असली परीक्षा: किसे मिलेगा कौन-सा विभाग?

कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल विभागों के बंटवारे को लेकर खड़ा हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री धामी किस मंत्री को कौन-सी जिम्मेदारी सौंपेंगे।

दरअसल, पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के हटने के बाद वित्त, शहरी विकास और आवास जैसे कई अहम विभाग मुख्यमंत्री धामी के पास ही रहे। इसके अलावा कुछ अन्य विभाग भी अलग-अलग मंत्रियों के पास अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में हैं।

अब उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट विस्तार के बाद इन विभागों का बोझ कम किया जाएगा और नए मंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या मदन कौशिक को फिर से शहरी विकास और आवास जैसे विभाग मिल सकते हैं या उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी। मदन कौशिक पहले भी इन विभागों का अनुभव रखते हैं, इसलिए उनके नाम की चर्चा तेज है।

इसी तरह वित्त विभाग को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। यह राज्य का सबसे अहम विभाग माना जाता है और इसे किसी भरोसेमंद और अनुभवी नेता को देने की संभावना जताई जा रही है।


नए मंत्रियों की भूमिका पर भी नजर

नए मंत्रियों की कार्यशैली और अनुभव को देखते हुए भी विभागों के बंटवारे पर चर्चा हो रही है।

  • प्रदीप बत्रा को उद्योग या शहरी विकास से जुड़े विभाग मिलने की संभावना जताई जा रही है।
  • भरत चौधरी को पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े विभाग दिए जाने की संभावना बताई जा रही है।
  • राम सिंह कैड़ा को कुमाऊं क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री धामी इस बार विभागों का बंटवारा करते समय प्रशासनिक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक रणनीति तीनों बातों को ध्यान में रख सकते हैं।


चुनावी साल से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश

कैबिनेट विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। अगले विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं और ऐसे में सरकार अपने संगठन और प्रशासन दोनों को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है।

कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल कर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में सभी क्षेत्रों और वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।

अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री धामी विभागों के बंटवारे में किस तरह का राजनीतिक संतुलन बनाते हैं। क्या वे अपने पास मौजूद बड़े विभागों का बोझ कम करेंगे या कुछ महत्वपूर्ण विभाग अपने पास ही रखेंगे — यह फैसला आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

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