काठा पीर मेले में सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर बढ़ी हलचल! जनप्रतिनिधियों-ग्रामीणों ने प्रशासन से की सख्त इंतजामों की मांग,, “गुंडागर्दी, अवैध वसूली और असामाजिक तत्वों पर लगे लगाम” — श्रद्धालुओं, जायरीन और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन,, “मेले की ऐतिहासिक पहचान से नहीं होगा खिलवाड़!” — महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शी प्रबंधन और कानून व्यवस्था पर प्रशासन ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

इन्तजार रजा हरिद्वार- काठा पीर मेले में सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर बढ़ी हलचल! जनप्रतिनिधियों-ग्रामीणों ने प्रशासन से की सख्त इंतजामों की मांग,,
“गुंडागर्दी, अवैध वसूली और असामाजिक तत्वों पर लगे लगाम” — श्रद्धालुओं, जायरीन और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन,,
“मेले की ऐतिहासिक पहचान से नहीं होगा खिलवाड़!” — महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शी प्रबंधन और कानून व्यवस्था पर प्रशासन ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

लक्सर/पथरी क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांप्रदायिक सौहार्द की पहचान माने जाने वाले शाह मोहम्मद शाह कठा पीर मेले को लेकर इस बार सुरक्षा, शांति व्यवस्था और पारदर्शी संचालन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के सामने कई गंभीर मुद्दे उठाते हुए मेले को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की मांग की है।
ग्राम पंचायत धनपुरा और आसपास के गांवों से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने लक्सर एसडीएम, थाना पथरी प्रभारी और जिलाधिकारी हरिद्वार को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि वर्षों से सामाजिक एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। इसलिए इसकी गरिमा और ऐतिहासिक पहचान हर हाल में बरकरार रहनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को अवगत कराया कि मेले में हजारों श्रद्धालु, जायरीन और दूर-दराज से आने वाले छोटे-बड़े दुकानदार पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना था कि मेले का संचालन पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति पैदा न हो।
ग्रामीणों ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि पूर्व वर्षों में कुछ ठेकेदारों द्वारा तहबाजारी वसूली के नाम पर बाहरी लोगों और कथित असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। आरोप है कि छोटे व्यापारियों पर दबाव बनाया जाता था और उन्हें डराने-धमकाने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता था। इस मुद्दे को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार किसी भी प्रकार की जबरन वसूली, गुंडागर्दी या दबाव की राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ज्ञापन में मेले में आने वाली महिलाओं, बच्चों और परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। ग्रामीणों ने मांग की कि मेले में लगातार पुलिस गश्त रहे और ऐसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए जहां भीड़ अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि छेड़छाड़, हुल्लड़बाजी और असामाजिक गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि मेले में कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि माहौल खराब करने वाले, अवैध वसूली करने वाले और व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेले में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रशासन को भरोसा दिलाया कि क्षेत्र की जनता मेले को शांतिपूर्ण, भाईचारे और सौहार्द के माहौल में संपन्न कराने में हर संभव सहयोग करेगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में मौ. सलीम (सामाजिक कार्यकर्ता), मुस्तफा अंसारी (क्षेत्र पंचायत सदस्य), गब्बर सिंह पवार, सलीम अहमद उप प्रधान, सोनू चौहान, आनंद चौहान, परवेज अहमद, मौ. जब्बार और अन्य ग्रामीण एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।



