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उत्तराखंड ने अपने ‘जनरल नेता’ को नम आंखों से दी विदाई! मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब,, “अनुशासन, ईमानदारी और सादगी की विरासत को सलाम” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा के दिग्गज नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि,, “सैनिक से मुख्यमंत्री तक का सफर हुआ अमर” — अंतिम यात्रा में गूंजीं श्रद्धांजलि की आवाजें, भावुक माहौल में उत्तराखंड ने कहा अलविदा,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड ने अपने ‘जनरल नेता’ को नम आंखों से दी विदाई! मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब,,

“अनुशासन, ईमानदारी और सादगी की विरासत को सलाम” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा के दिग्गज नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि,,

“सैनिक से मुख्यमंत्री तक का सफर हुआ अमर” — अंतिम यात्रा में गूंजीं श्रद्धांजलि की आवाजें, भावुक माहौल में उत्तराखंड ने कहा अलविदा,,

देहरादून में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेनि.) की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और आमजन के लिए यह क्षण बेहद भावुक और ऐतिहासिक रहा। हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के दिलों में बसने वाला एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिनकी सादगी, ईमानदारी और अनुशासन की मिसाल वर्षों तक याद रखी जाएगी।

अंतिम यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, विधायक दिलीप रावत, मनीष खंडूरी समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। हर चेहरे पर उदासी और आंखों में नमी साफ दिखाई दे रही थी। वातावरण में एक अलग ही गंभीरता और सम्मान का भाव महसूस किया जा रहा था।

मेजर जनरल खंडूरी का जीवन संघर्ष, अनुशासन और सेवा का प्रतीक माना जाता है। सेना में उच्च पदों पर सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पारदर्शिता, ईमानदारी और जनहित को प्राथमिकता दी। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त छवि ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।

अंतिम यात्रा के दौरान कई लोग अपने हाथों में पुष्प लेकर पहुंचे और अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी। जगह-जगह लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कई समर्थक भावुक होकर उनकी कार्यशैली और सादगी को याद करते नजर आए। लोगों का कहना था कि उत्तराखंड ने आज एक ऐसा जननेता खो दिया, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक एक ही चर्चा रही कि खंडूरी जी ने जिस अनुशासन और ईमानदारी की राजनीति की शुरुआत की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उत्तराखंड की राजनीति में उनका नाम हमेशा सम्मान और आदर के साथ लिया जाएगा।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को दी गई अंतिम विदाई केवल एक नेता की विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे युग का भावुक समापन था जिसने राजनीति को सेवा और अनुशासन का नया अर्थ दिया। उनकी यादें, उनके विचार और उनकी कार्यशैली हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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