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उत्तराखंड ने अपने ‘जनरल नेता’ को नम आंखों से कहा अलविदा! खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी,, “सैनिक से मुख्यमंत्री तक अनुशासन और ईमानदारी की अमिट मिसाल” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले, ‘यह उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति’,, “जनसैलाब, गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी के बीच गूंजा सम्मान” — केंद्रीय मंत्री और दिग्गज नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड ने अपने ‘जनरल नेता’ को नम आंखों से कहा अलविदा! खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी,,

“सैनिक से मुख्यमंत्री तक अनुशासन और ईमानदारी की अमिट मिसाल” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले, ‘यह उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति’,,

“जनसैलाब, गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी के बीच गूंजा सम्मान” — केंद्रीय मंत्री और दिग्गज नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि,,

हरिद्वार की पवित्र धरती बुधवार को एक ऐसे भावुक और ऐतिहासिक पल की गवाह बनी, जिसने उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी को हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनकी अंतिम यात्रा खड़खड़ी पहुंची, पूरा वातावरण गमगीन हो उठा और हजारों लोगों की भीड़ अपने प्रिय नेता को अंतिम प्रणाम देने उमड़ पड़ी।

खंडूरी की अंतिम यात्रा में ऐसा जनसैलाब देखने को मिला जिसने यह साबित कर दिया कि वह केवल एक नेता नहीं बल्कि जनभावनाओं से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे। सेना और पुलिस के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। सैन्य परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों के बीच उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। अंतिम संस्कार की सभी रस्में उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने पूरी कीं।

इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, सांसद अजय भट्ट, सांसद अनिल बलूनी, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि, मेयर किरण जैसल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, विधायक संजय गुप्ता, पूर्व विधायक यतीश्वरानंद, विकास तिवारी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और समर्थक मौजूद रहे।

खड़खड़ी श्मशान घाट पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं और समर्थकों की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि खंडूरी का प्रभाव राजनीति की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ था। हर किसी के चेहरे पर दुख दिखाई दे रहा था और हर जुबान पर उनके व्यक्तित्व की चर्चा थी।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भावुक होते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक विचारधारा, एक अनुशासन और एक जीवन शैली थे। उन्होंने कहा कि सैनिक जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उन्होंने ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की नई परिभाषा गढ़ी।

धामी ने कहा, “यह उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जिस सादगी, ईमानदारी और समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन जिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा।”

केंद्रीय मंत्री और अन्य नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि खंडूरी ने उत्तराखंड को नई दिशा देने का कार्य किया। उनका राजनीतिक जीवन पारदर्शिता, कठोर निर्णय क्षमता और विकास की सोच का प्रतीक रहा।

भुवन चंद्र खंडूरी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं बल्कि सेवा का माध्यम माना। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और विकास के एजेंडे को प्राथमिकता दी। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त छवि और अनुशासित प्रशासनिक शै

ली की चर्चा आज भी राजनीतिक गलियारों में होती है।

आज खड़खड़ी श्मशान घाट पर केवल एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं हुआ, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति के एक ऐसे युग को विदाई दी गई जिसने ईमानदारी, सादगी और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी भले ही पंचतत्व में विलीन हो गए हों, लेकिन उनका व्यक्तित्व, विचार और योगदान हमेशा उत्तराखंड की स्मृतियों में अमर रहेगा।

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