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पिरान कलियर दरगाह में मौ रफी की ‘   फर्जी नियुक्ति’ से मचा बवाल! दरगाह के संसाधनों पर अवैध कब्जे और कथित फर्जी नियुक्ति और मौखिक आदेशों के खेल पर वक्फ बोर्ड तक पहुंची बड़ी शिकायत,, “लिखित आदेश गायब, मौखिक फरमान हावी?” — मोहम्मद रफी की नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतकर्ताओं ने कहा- ‘आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पूरा खेल’,, “दरगाह में नियम-कायदे ताक पर या पर्दे के पीछे कोई बड़ा संरक्षण?” — जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी, कलियर में चर्चाओं का बाजार गर्म,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- पिरान कलियर दरगाह में मौ रफी की ‘   फर्जी नियुक्ति’ से मचा बवाल! दरगाह के संसाधनों पर अवैध कब्जे और कथित फर्जी नियुक्ति और मौखिक आदेशों के खेल पर वक्फ बोर्ड तक पहुंची बड़ी शिकायत,,

“लिखित आदेश गायब, मौखिक फरमान हावी?” — मोहम्मद रफी की नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतकर्ताओं ने कहा- ‘आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पूरा खेल’,,

“दरगाह में नियम-कायदे ताक पर या पर्दे के पीछे कोई बड़ा संरक्षण?” — जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी, कलियर में चर्चाओं का बाजार गर्म,,

पिरान कलियर की चर्चित दरगाह एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला किसी धार्मिक आयोजन या संपत्ति विवाद का नहीं, बल्कि कथित नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवालों का है। वक्फ बोर्ड उत्तराखंड के चेयरमैन को भेजे गए शिकायती पत्र ने पूरे मामले में नई हलचल पैदा कर दी है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि दरगाह कार्यालय में नियमों और लिखित आदेशों की जगह कथित तौर पर मौखिक आदेशों का सिस्टम हावी होता दिखाई दे रहा है।

शिकायत में दावा किया गया है कि पूर्व संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की द्वारा पहले स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि जब तक नई नियुक्ति नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नई नियुक्ति पर रोक रहेगी। साथ ही कहा गया था कि पिरान कलियर के कर्मचारियों का ढांचा तैयार होने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद कुछ नियुक्तियां सवालों के घेरे में दिखाई दे रही हैं।

शिकायतकर्ताओं ने खासतौर पर मोहम्मद रफी के मामले को उठाते हुए कहा है कि कथित रूप से उन्हें दरगाह कार्यालय में कार्य करने की अनुमति दी गई और मौ रफी ने अवैध तरीके से दरगाह संसाधनों पर कब्जा कर रखा है, जबकि इसके संबंध में कोई सार्वजनिक लिखित आदेश सामने नहीं आया। यही नहीं, शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया कि अगर कोई प्रशासनिक अनुमति दी गई थी, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

आरोपों के अनुसार, इससे पहले भी इस मामले में जांच और रिपोर्ट की बातें सामने आई थीं, लेकिन अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अगर सरकारी और संवेदनशील संस्थानों में बिना स्पष्ट प्रक्रिया और पारदर्शिता के कार्य होंगे तो इससे जनता के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।

पूरा मामला अब इसलिए और गरमा गया है क्योंकि शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जो भी व्यक्ति दरगाह की व्यवस्थाओं, नियुक्तियों या प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाता है, उसे कथित तौर पर व्यवस्था विरोधी या बाहरी बताने की कोशिश की जाती है। इस दावे के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

शिकायतकर्ताओं ने वक्फ बोर्ड से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वह माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पिरान कलियर दरगाह में सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है, या फिर पर्दे के पीछे कोई ऐसा सिस्टम सक्रिय है जो हर विवाद को रहस्य बना देता है? फिलहाल इस पूरे मामले ने दरगाह प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

(नोट: यह खबर शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।

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