हरिद्वार में सरकारी जमीनों पर ‘कब्जा सिंडिकेट’ पर डीएम का बड़ा प्रहार! साफ अल्टीमेटम— 15 दिन में हटाओ अतिक्रमण, वरना चलेगा प्रशासनिक बुलडोजर,, “सरकारी भूमि को निजी जागीर समझने वालों की अब खैर नहीं” — जिलाधिकारी का दो टूक आदेश, कब्जाधारियों पर सख्ती के साथ संबंधित अधिकारियों को भी जवाबदेही का जिम्मा,, “लापरवाही हुई तो सम्बंधित अधिकारीयों की जवाबदेही भी होगी तय ” — डीएम ने कहा, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, पूरे जिले में शुरू होगा विशेष अभियान,,

हरिद्वार में सरकारी जमीनों पर ‘कब्जा सिंडिकेट’ पर डीएम का बड़ा प्रहार! साफ अल्टीमेटम— 15 दिन में हटाओ अतिक्रमण, वरना चलेगा प्रशासनिक बुलडोजर,,
“सरकारी भूमि को निजी जागीर समझने वालों की अब खैर नहीं” — जिलाधिकारी का दो टूक आदेश, कब्जाधारियों पर सख्ती के साथ संबंधित अधिकारियों को भी जवाबदेही का जिम्मा,,
“लापरवाही हुई तो सम्बंधित अधिकारीयों की जवाबदेही भी होगी तय ” — डीएम ने कहा, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, पूरे जिले में शुरू होगा विशेष अभियान,,
हरिद्वार: जनपद में सरकारी भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और कब्जों के खिलाफ प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में साफ संदेश दिया गया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए अब चेतावनी का समय खत्म होने वाला है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी विभाग की सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की शिथिलता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि उनके विभाग के अधीन आने वाली सरकारी भूमि का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो कब्जाधारियों को 15 दिन का नोटिस जारी कर तत्काल अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्तियों पर कब्जा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी के तेवर इस दौरान काफी सख्त दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कब्जा हटाने की औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखने का अभियान है। प्रशासनिक मशीनरी को निर्देश दिए गए कि संबंधित विभाग मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें और रिपोर्ट तैयार करें। अगर कोई अधिकारी इस मामले में लापरवाही करता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बैठक में यह भी संकेत मिले कि आने वाले दिनों में जनपद स्तर पर सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक व्यापक अभियान चलाया जा सकता है। प्रशासन का मानना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे विकास कार्यों में बाधा बनते हैं और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अब सरकारी संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने के लिए विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता, एसएलओ आकाश जोशी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल वर्मा, सहायक आयुक्त खाद्य महिमानंद जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद, जिला पूर्ति अधिकारी मुकेश पाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, स्वजल नोडल चंद्रकांत मणि त्रिपाठी, मुख्य उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह सहित अन्य जिलास्तरीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
अब प्रशासन के इस सख्त रुख के बाद जिले में अवैध कब्जाधारियों और अतिक्रमण नेटवर्क में हलचल तेज होना तय माना जा रहा है। सवाल अब यही है — क्या 15 दिन की मोहलत के बाद प्रशासन वास्तव में जमीनी स्तर पर बड़ा एक्शन दिखाएगा या फिर कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी?



