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कॉस्मेटिक की दुकान से चल रहा था ‘नशे का काला कारोबार’, एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक में बड़ा खुलासा,, हरिद्वार के कलियर में ड्रग्स नेटवर्क पर प्रहार, ट्रामाडोल और कोडीन के साथ कॉस्मेटिक स्टोर संचालक गिरफ्तार,, 18 हजार ट्रामाडोल कैप्सूल बरामदगी से जुड़ा कनेक्शन आया सामने, ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के तहत एसटीएफ की ताबड़तोड़ कार्रवाई

कॉस्मेटिक की दुकान से चल रहा था ‘नशे का काला कारोबार’, एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक में बड़ा खुलासा,,

हरिद्वार के कलियर में ड्रग्स नेटवर्क पर प्रहार, ट्रामाडोल और कोडीन के साथ कॉस्मेटिक स्टोर संचालक गिरफ्तार,,

18 हजार ट्रामाडोल कैप्सूल बरामदगी से जुड़ा कनेक्शन आया सामने, ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के तहत एसटीएफ की ताबड़तोड़ कार्रवाई

हरिद्वार। उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने हरिद्वार के कलियर क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए कॉस्मेटिक की दुकान की आड़ में संचालित किए जा रहे कथित नशे के कारोबार का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ की इस कार्रवाई को नशा तस्करों के नेटवर्क पर बड़ी “सर्जिकल स्ट्राइक” माना जा रहा है। एसटीएफ की टीम ने ड्रग इंस्पेक्टर के साथ संयुक्त छापेमारी करते हुए एहतिशाम कॉस्मेटिक जनरल स्टोर पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान दुकान संचालक अहतशाम उल हक पुत्र शहीद, निवासी बुड्ढा हैदी, थाना पथरी, हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से वाणिज्यिक मात्रा में प्रतिबंधित कोडीन सिरप (करीब 3.9 किलोग्राम) और ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी का संबंध एसटीएफ द्वारा पूर्व में बरामद किए गए 18 हजार ट्रामाडोल कैप्सूल के मामले से भी जुड़ा हुआ है। इस खुलासे ने संकेत दिए हैं कि प्रदेश में सक्रिय नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं।छापेमारी के दौरान एसटीएफ, एएनटीएफ और ड्रग विभाग की टीम ने कलियर क्षेत्र के कई संदिग्ध स्थानों, गोदामों और संभावित ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। जांच में प्रतिबंधित दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक भी बरामद हुआ। प्रारंभिक पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आरोपी इन दवाओं को निर्धारित मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर अवैध रूप से बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा था।

जांच एजेंसियां अब आरोपी से जुड़े अन्य सहयोगियों, सप्लायरों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रतिबंधित दवाएं कहां से लाई जा रही थीं और किन-किन जिलों में उनकी सप्लाई की जा रही थी।एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी पहले भी एनडीपीएस एक्ट के मामलों में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ वर्ष 2019 में थाना स्तर पर धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दो मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद आरोपी दोबारा अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया, जिससे उसकी पेशेवर संलिप्तता की आशंका और मजबूत होती है।

यह पूरी कार्रवाई मुख्यमंत्री के “ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान के तहत पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में संचालित अभियान का हिस्सा है। एसटीएफ लगातार उत्तराखंड में नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का अभियान जारी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा कि युवा नशे से दूर रहें और किसी भी प्रकार के लालच में आकर नशा तस्करी का हिस्सा न बनें। यदि कहीं भी नशे के कारोबार की सूचना मिले तो तत्काल स्थानीय पुलिस या एसटीएफ को सूचित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि “ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान के तहत नशा माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर और लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

इस कार्रवाई में निरीक्षक यादवेन्द्र सिंह बाजवा, ड्रग इंस्पेक्टर हरीश सिंह, उपनिरीक्षक कमाल हसन, उपनिरीक्षक दीपक मैठाणी, हेड कांस्टेबल मनमोहन तथा कांस्टेबल दीपक नेगी सहित एसटीएफ और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

नोट: समाचार में प्रयुक्त सभी आरोप पुलिस/एसटीएफ की प्रेस विज्ञप्ति और प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय के अधीन होगा।

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