दरगाह साबिर पाक के आस्ताने से चढ़ी चादर खींचकर चुनिंदा लोगों को ओढ़ाने का कथित वीडियो वायरल, आखिर किसके इशारे पर टूटी परंपरा?,, जिम्मेदार सुपरवाइजर पर मजार शरीफ से चादर खींचने और पसंदीदा लोगों को ओढाने का आरोप, क्या नियम सिर्फ जायरीन के लिए और जिम्मेदारों के लिए अलग?,, दरगाह प्रबंधन और वक्फ बोर्ड से उच्चस्तरीय जांच की मांग, सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई की उठी आवाज,, वीडियो की सच्चाई पर दो बड़े सवाल साथ रहेंगे—वीडियो पुराना है तो अब तक कार्रवाई कहां, नया है तो आखिर इतने दिन तक पर्दे में क्यों रहा ?

दरगाह साबिर पाक के आस्ताने से चढ़ी चादर खींचकर चुनिंदा लोगों को ओढ़ाने का कथित वीडियो वायरल, आखिर किसके इशारे पर टूटी परंपरा?,,
जिम्मेदार सुपरवाइजर पर मजार शरीफ से चादर खींचने और पसंदीदा लोगों को ओढाने का आरोप, क्या नियम सिर्फ जायरीन के लिए और जिम्मेदारों के लिए अलग?,,
दरगाह प्रबंधन और वक्फ बोर्ड से उच्चस्तरीय जांच की मांग, सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई की उठी आवाज,,
वीडियो की सच्चाई पर दो बड़े सवाल साथ रहेंगे—वीडियो पुराना है तो अब तक कार्रवाई कहां, नया है तो आखिर इतने दिन तक पर्दे में क्यों रहा ?
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने दरगाह की व्यवस्था, पारदर्शिता और जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यशैली पर बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दरगाह का एक जिम्मेदार सुपरवाइजर मजार शरीफ पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई चादरों में से एक चादर निकालकर अपने कुछ पसंदीदा लोगों को ओढ़ाता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही दरगाह प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह में वर्षों से यह व्यवस्था लागू है कि मजार शरीफ पर चढ़ाई गई चादर को कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से नहीं उतार सकता और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ओढ़ा सकता है। यदि कोई जायरीन ऐसा करता है तो उसे तुरंत रोका जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि वायरल वीडियो सही है तो क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग नियम लागू हैं?श्रद्धालुओं का कहना है कि दरगाह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां की हर परंपरा और हर नियम का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी जिम्मेदार कर्मचारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों की अनदेखी की है तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास पर भी सवाल खड़ा करता है।
मामले ने दरगाह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिसर में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, सुरक्षा कर्मी और कर्मचारी हर समय मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद यदि कथित वीडियो में दिखाई गई घटना हुई है तो संबंधित समय की सीसीटीवी फुटेज पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने ला सकती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि फुटेज को सुरक्षित रखते हुए उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ बिना किसी दबाव या पक्षपात के कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि वीडियो भ्रामक या संपादित है तो प्रशासन को भी तत्काल आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि अफवाहों पर विराम लग सके।
अब निगाहें उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रबंधन पर टिकी हैं। क्या इस वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी, या फिर मामला केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा? क्या दरगाह के नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे या फिर प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग व्यवस्था बनी रहेगी? इन सवालों के जवाब अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही सामने आएंगे। श्रद्धालुओं का मानना है कि दरगाह की गरिमा, पारदर्शिता और आस्था को बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
स्पष्टीकरण: यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रकाशित किया गया है। हम इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करते हैं। यदि दरगाह प्रबंधन, संबंधित सुपरवाइजर, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड या किसी अन्य संबंधित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने मामले का पूरा और निष्पक्ष पक्ष रखा जा सके।



