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स्मार्ट मीटर पर सियासी संग्राम: फर्जी मुकदमे के विरोध में कांग्रेस का हल्लाबोल! महेश प्रताप राणा समेत कांग्रेस नेताओं ने सरकार और विद्युत विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, मुकदमा वापस लेने की चेतावनी जबरन स्मार्ट मीटर लगाने, महिलाओं से अभद्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप,

स्मार्ट मीटर पर सियासी संग्राम: फर्जी मुकदमे के विरोध में कांग्रेस का हल्लाबोल!

महेश प्रताप राणा समेत कांग्रेस नेताओं ने सरकार और विद्युत विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, मुकदमा वापस लेने की चेतावनी

जबरन स्मार्ट मीटर लगाने, महिलाओं से अभद्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप,

हरिद्वार। हरिद्वार में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को यह विवाद उस समय और गर्मा गया जब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रानीपुर कोतवाली का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा समेत अन्य कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे को “फर्जी और राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार और विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

पूरा मामला शिवालिक नगर क्षेत्र का है, जहां हाल ही में विद्युत विभाग की टीम स्मार्ट मीटर लगाने पहुंची थी। स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना सहमति और पर्याप्त जानकारी दिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसी दौरान कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा और उनके समर्थकों ने इसका विरोध किया। विरोध के बाद विद्युत विभाग की ओर से महेश प्रताप राणा सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसके विरोध में शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ता रानीपुर कोतवाली पहुंच गए।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जनता के हितों की रक्षा करना यदि अपराध है तो कांग्रेस ऐसे “मुकदमों से डरने वाली नहीं है।”

कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर लोगों के घरों में जबरन प्रवेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और विरोध करने वालों को धमकाया गया। राणा ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने भी स्मार्ट मीटर को अनिवार्य नहीं बताया है तो आखिर जनता की इच्छा के विरुद्ध इसे क्यों लगाया जा रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने केवल स्थानीय लोगों की मांग पर आवाज उठाई थी, लेकिन इसके बदले उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

राणा ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग की कुछ महिला अधिकारियों द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को धमकाया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कांग्रेस नेताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी तहरीर देकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना था कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

प्रदर्शन में मौजूद कांग्रेस नेता मनोज धनगर ने कहा कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विरोध करने वालों को मुकदमों में फंसा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। धनगर ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता जनता की आवाज को दबने नहीं देंगे और हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राव अफाक ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा करना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि आम लोगों की सहमति के बिना योजनाएं थोपी जाएंगी तो उनका विरोध होना स्वाभाविक है। उन्होंने दर्ज मुकदमे को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस नेता वरुण बालियान ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर आम उपभोक्ताओं में भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों पर संवाद करने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक लेकर जाएगी तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेगी।

रानीपुर कोतवाली के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार और विद्युत विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि महेश प्रताप राणा सहित सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लिया जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों पर अभद्र व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कोतवाली परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। बाद में कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन पुलिस प्रशासन को सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

अब यह मामला केवल स्मार्ट मीटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक रूप भी ले चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन और विद्युत विभाग इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और कांग्रेस अपनी आंदोलन की रणनीति किस प्रकार आगे बढ़ाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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