गंगा की तेज धार में सुरक्षा कवच बने BEG के ‘जलवीर’, 44 श्रद्धालुओं की बचाई जान,, 31 जुलाई से अब तक रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एवं सेंटर के जवानों ने चलाए सफल रेस्क्यू ऑपरेशन, हाथी पुल से सोलानी पार्क तक संभाला मोर्चा

गंगा की तेज धार में सुरक्षा कवच बने BEG के ‘जलवीर’, 44 श्रद्धालुओं की बचाई जान,,
31 जुलाई से अब तक रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एवं सेंटर के जवानों ने चलाए सफल रेस्क्यू ऑपरेशन, हाथी पुल से सोलानी पार्क तक संभाला मोर्चा
हरिद्वार, 08 अगस्त 2026। कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में उमड़े आस्था के सैलाब के बीच गंगा की तेज धार श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारतीय सेना के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एवं सेंटर (BEG एवं Centre), रुड़की के जांबाज जवान और प्रशिक्षित गोताखोर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा कवच बनकर सामने आए हैं। 31 जुलाई 2026 से अब तक इन जवानों ने गंगा की तेज धार में फंसे 44 श्रद्धालुओं का सफल रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों शिवभक्त हरिद्वार पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ती भीड़, गंगा का तेज बहाव और गहरे जल क्षेत्र को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष रेस्क्यू टीमें तैनात की गई हैं। इनमें BEG एवं Centre, रुड़की के प्रशिक्षित जवान एवं गोताखोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सूचना मिलते ही शुरू हो जाता है रेस्क्यू ऑपरेशन
गंगा में किसी श्रद्धालु के असंतुलित होने, पैर फिसलने या तेज बहाव की चपेट में आने की सूचना मिलते ही जवान तत्काल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर देते हैं। लाइफ जैकेट, रेस्क्यू रोप, लाइफ रिंग सहित अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों की मदद से जवान तेज धार के बीच पहुंचकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
31 जुलाई से 08 अगस्त तक 44 सफल रेस्क्यू जवानों की तत्परता, साहस और उच्च स्तर के प्रशिक्षण का प्रमाण हैं। कई बार रेस्क्यू के दौरान जवानों को खुद भी तेज बहाव और गहरे पानी के बीच उतरना पड़ता है, लेकिन श्रद्धालु की जिंदगी बचाना उनकी पहली प्राथमिकता बनी हुई है।
सोलानी पार्क से हाथी पुल तक जवानों का मोर्चा
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रुड़की के सोलानी पार्क से लेकर हरिद्वार के हाथी पुल क्षेत्र तक गंगा किनारे जवानों की तैनाती की गई है। संवेदनशील जल क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू टीमों को तैयार रखा गया है।
प्रशासन, पुलिस और सेना का मजबूत तालमेल
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन और भारतीय सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत आपदा एवं बचाव संबंधी व्यवस्थाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
44 रेस्क्यू बने साहस और इंसानियत की मिसाल
सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिक जब गंगा की तेज लहरों के बीच किसी अनजान श्रद्धालु की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो यह केवल ड्यूटी नहीं बल्कि मानवता, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बन जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान BEG एवं Centre, रुड़की के जवानों ने जिस तरह मुस्तैदी के साथ 44 श्रद्धालुओं को नया जीवन दिया, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। गंगा की धार भले ही तेज हो, लेकिन इन जांबाज जवानों का हौसला उससे कहीं ऊंचा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में जुटे इन ‘जलवीरों’ को हर कोई सलाम कर रहा है।



