करोड़ों रुपये की रकम जमा, फिर भी काठा पीर दरगाह बदहाल! बारिश में टपकती छतों ने खोली व्यवस्था की पोल,, दरगाह के खाते में करोड़ों की रकम होने का दावा, लेकिन जायरीनों के लिए बदहाल मुसाफिरखाने और बुनियादी सुविधाओं का संकट; मौ. सलीम ने उठाई आय-व्यय सार्वजनिक करने और दरगाह के बेहतर प्रबंधन की मांग,, अब सवाल—करोड़ों की रकम और बदहाल व्यवस्था के बीच कब टूटेगा सन्नाटा?

करोड़ों रुपये की रकम जमा, फिर भी काठा पीर दरगाह बदहाल! बारिश में टपकती छतों ने खोली व्यवस्था की पोल,,
दरगाह के खाते में करोड़ों की रकम होने का दावा, लेकिन जायरीनों के लिए बदहाल मुसाफिरखाने और बुनियादी सुविधाओं का संकट; मौ. सलीम ने उठाई आय-व्यय सार्वजनिक करने और दरगाह के बेहतर प्रबंधन की मांग,,
अब सवाल—करोड़ों की रकम और बदहाल व्यवस्था के बीच कब टूटेगा सन्नाटा?

हरिद्वार ग्रामीण/लक्सर। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल और बड़ी संख्या में जायरीनों की आस्था का केंद्र शाह मोहम्मद शाह उर्फ काठा पीर दरगाह इन दिनों अपनी व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। बरसात के बीच दरगाह परिसर और मुसाफिरखानों की छतों से पानी टपकने, दीवारों में सीलन और फर्श की खराब स्थिति सामने आने के बाद दरगाह के रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे अहम सवाल दरगाह की आमद और खर्च को लेकर उठाया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम का दावा है कि दरगाह के खाते में करोड़ों रुपये की रकम जमा है, इसके बावजूद भवनों की मरम्मत और जायरीनों के लिए जरूरी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
अब सवाल यह है कि यदि दरगाह के पास करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध होने की बात कही जा रही है तो फिर टपकती छतों, सीलन भरी दीवारों और खराब फर्श की मरम्मत क्यों नहीं हो पा रही?
बारिश में टपक रही छतें, परेशान हो रहे जायरीन
बरसात ने दरगाह की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी है। दरगाह परिसर के कई हिस्सों में छतों से पानी रिसने की शिकायत है। मुसाफिरखानों में भी पानी टपकने और दीवारों में सीलन की स्थिति बताई जा रही है।
जायरीनों के ठहरने के लिए बनाए गए कमरों में कहीं पलस्तर खराब है तो कहीं फर्श उखड़ा हुआ बताया जा रहा है। बारिश के मौसम में इन कमरों की हालत और खराब होने से दूर-दराज से आने वाले जायरीनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
करोड़ों की रकम खाते में तो सुविधाएं बदहाल क्यों?
सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम ने दरगाह की वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दरगाह के बैंक खाते में करोड़ों रुपये की धनराशि मौजूद है तो उसका इस्तेमाल दरगाह की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में क्यों नहीं किया जा रहा?
उन्होंने कहा कि छतों की मरम्मत, वाटरप्रूफिंग, मुसाफिरखानों का रखरखाव, पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसे काम प्राथमिकता के आधार पर होने चाहिए।
मौ. सलीम ने मांग की कि दरगाह की कुल आमद, बैंक में जमा रकम और अब तक किए गए खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता के सामने वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके।
दरगाह की व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में विवाद और न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए मौ. सलीम ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि उर्स और मेले से संबंधित व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय है तो बारिश से पहले दरगाह भवनों का निरीक्षण कराकर जरूरी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
उनका कहना है कि छतों की स्थिति पहले से खराब थी तो बरसात शुरू होने से पहले वाटरप्रूफिंग और मरम्मत का काम कराया जाना चाहिए था।
दरगाह के पास सीमित जमीन, मेले के लिए लेनी पड़ती है अतिरिक्त जमीन
मौ. सलीम ने दरगाह की जमीन का मुद्दा भी उठाया है। उनके अनुसार दरगाह के पास उपलब्ध जमीन सीमित है, जबकि उर्स और मेले के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। ऐसे में आसपास के लोगों से अतिरिक्त जमीन किराए पर लेने की जरूरत पड़ती है।
उनका सुझाव है कि यदि नियमों के तहत दरगाह की उपलब्ध धनराशि से उपयुक्त जमीन खरीदना संभव हो तो भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
इस जमीन पर मुसाफिरखाना, लंगर भवन, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे जायरीनों को सुविधा मिलने के साथ अस्थायी व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सकता है।
‘करोड़ों की रकम है तो उसका इस्तेमाल जायरीनों की सुविधा पर हो’
मौ. सलीम का कहना है कि काठा पीर दरगाह लोगों की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। यहां आने वाले जायरीनों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है तो उसका नियमानुसार इस्तेमाल दरगाह के भवनों की मरम्मत और जायरीनों की सुविधाओं को मजबूत करने में किया जाना चाहिए।
तत्काल वाटरप्रूफिंग और मरम्मत की मांग
मौ. सलीम ने एसडीएम लक्सर से मांग की है कि दरगाह का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और खराब व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से मांग की है कि—
- टपकती छतों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
- आवश्यक सभी स्थानों पर वाटरप्रूफिंग कराई जाए।
- मुसाफिरखानों की सीलन और खराब पलस्तर ठीक कराया जाए।
- टूटे और उखड़े फर्श की मरम्मत कराई जाए।
- पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की जाए।
- स्वच्छ और बेहतर शौचालय उपलब्ध कराए जाएं।
- दरगाह परिसर में सफाई व्यवस्था मजबूत की जाए।
- जायरीनों के ठहरने की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
- उपलब्ध धनराशि का नियमानुसार उपयोग कर स्थायी सुविधाएं विकसित की जाएं।
आय-व्यय का पूरा हिसाब सामने लाने और बेहतर प्रबंधन की मांग
दरगाह की वित्तीय व्यवस्था को लेकर मौ. सलीम ने स्पष्ट सवाल उठाया है कि करोड़ों रुपये की रकम खाते में जमा होने की बात कही जा रही है तो उसका हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
कितनी आमद हुई? बैंक खातों में कितनी रकम मौजूद है? अब तक कितना पैसा खर्च हुआ? किन-किन कार्यों पर खर्च हुआ? दरगाह की मरम्मत और जायरीनों की सुविधाओं पर कितनी धनराशि लगाई गई?
इन सवालों का जवाब सामने आने पर ही दरगाह की वित्तीय व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
एसडीएम से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 पर शिकायत की तैयारी
मौ. सलीम ने बताया कि वह जल्द ही एसडीएम लक्सर से मुलाकात कर दरगाह की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर अपनी मांग रखेंगे। उनका कहना है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 पर शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
जरूरत पड़ने पर न्यायालय के समक्ष भी प्रशासन की कार्यप्रणाली का मुद्दा उठाने की बात उन्होंने कही है।
अब सवाल—करोड़ों की रकम और बदहाल व्यवस्था के बीच कब टूटेगा सन्नाटा?
काठा पीर दरगाह में करोड़ों रुपये की धनराशि जमा होने के दावे और दूसरी तरफ बारिश में टपकती छतों व बदहाल मुसाफिरखानों की तस्वीर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब निगाह प्रशासन पर है कि वह दरगाह की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भवनों की मौजूदा हालत की जांच कराता है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि जायरीनों की सुविधा के लिए उपलब्ध धनराशि का नियमानुसार कितना इस्तेमाल हुआ है।
फिलहाल सवाल साफ है—जब करोड़ों रुपये की रकम उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, तो काठा पीर दरगाह की छतें बारिश में क्यों टपक रही हैं और जायरीन बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों परेशान हैं?




