डिलीट चैट्स का रहस्य, 18 बैंक खातों का खेल और ऋषिकेश में हरिद्वार पुलिस का ‘क्लाइमेक्स’! SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ कसता शिकंजा,, ‘मगध साइबर गैंग’ के राज खुलते ही मचा हड़कंप—पांच साथी जेल गए तो घबराया सागर पाण्डेय, WhatsApp चैट और नंबर मिटाए; लेकिन मोबाइल की गैलरी में छिपा रह गया एक ऐसा सुराग, जिसने हरिद्वार श्यामपुर पुलिस को पहुंचा दिया आरोपी तक,, कहानी का क्लाइमेक्स खोलेगी हरिद्वार पुलिस
चैट डिलीट हुई, नंबर मिटे, सबूत छिपाने की कोशिश हुई—लेकिन डिजिटल दुनिया में कहानी का एक पन्ना बचा रह गया। उसी पन्ने को पढ़ते-पढ़ते श्यामपुर पुलिस ऋषिकेश पहुंची और मायाकुंड में हुआ घेराबंदी का ‘क्लाइमेक्स’ सागर पाण्डेय की गिरफ्तारी के साथ सामने आया सनसनीखेज सच।

डिलीट चैट्स का रहस्य, 18 बैंक खातों का खेल और ऋषिकेश में हरिद्वार पुलिस का ‘क्लाइमेक्स’!
SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ कसता शिकंजा,,
‘मगध साइबर गैंग’ के राज खुलते ही मचा हड़कंप—पांच साथी जेल गए तो घबराया सागर पाण्डेय, WhatsApp चैट और नंबर मिटाए; लेकिन मोबाइल की गैलरी में छिपा रह गया एक ऐसा सुराग, जिसने हरिद्वार श्यामपुर पुलिस को पहुंचा दिया आरोपी तक,,
कहानी का क्लाइमेक्स खोलेगी हरिद्वार पुलिस

हरिद्वार/श्यामपुर। साइबर ठगी की दुनिया में अपराधी सबूत मिटाने के लिए डिजिटल रास्ते अपनाते हैं, लेकिन हर मिटाया हुआ निशान हमेशा मिट नहीं जाता। हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में दर्ज साइबर अपराध के एक मामले की जांच में ऐसा ही एक सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस के मुताबिक ‘मगध साइबर गैंग’ के ऋषिकेश नेटवर्क की एक अहम कड़ी को पकड़ने के लिए तकनीकी निगरानी शुरू हुई और फिर डिजिटल सुराग पुलिस को चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड तक ले गए।
कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब पुलिस के अनुसार गैंग के पांच साथियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने अपने मोबाइल से WhatsApp चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और साथियों के नंबर डिलीट कर दिए। उसे शायद लगा कि डिजिटल दुनिया के सबूत मिटाकर वह जांच से बच जाएगा। लेकिन जांच टीम ने उसके मोबाइल की गहराई से पड़ताल की और कथित तौर पर एक ऐसा डिजिटल सुराग बरामद कर लिया, जिसने पूरे नेटवर्क की एक अहम कड़ी को सामने ला दिया।
आखिर कौन था यह शख्स? 18 बैंक खाते गैंग तक कैसे पहुंचे? म्यूल अकाउंट के पीछे क्या था पूरा खेल? और डिलीट किए गए चैट्स के बावजूद पुलिस उसके दरवाजे तक कैसे पहुंची? इन सवालों के जवाब ने पूरे मामले को किसी साइबर क्राइम फिल्म की कहानी जैसा बना दिया है।
पहला रहस्य—आरोपी गायब था, लेकिन डिजिटल फुटप्रिंट पुलिस को रास्ता दिखा रहे थे
कोतवाली श्यामपुर में दर्ज मु0अ0सं0 100/2026 में वांछित चल रहे आरोपी सागर पाण्डेय की तलाश पुलिस कर रही थी। आरोपी मूल रूप से ग्राम सिकंदपुर, थाना सिकंदरपुर, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश का निवासी बताया गया है और वर्तमान में ऋषिकेश के मायाकुंड क्षेत्र में रह रहा था।
आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने पारंपरिक तरीके के साथ तकनीकी जांच का सहारा लिया। सीआईयू हरिद्वार ने डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।
जांच आगे बढ़ी तो लोकेशन चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड, ऋषिकेश क्षेत्र में सामने आई।
इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली एक्शन।
टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। इसी दौरान काले रंग की स्कूटी पर सवार होकर जा रहे सागर पाण्डेय को पुलिस ने दबोच लिया।
एक तरफ आरोपी को लगा होगा कि वह पुलिस से बच निकला है, दूसरी तरफ पुलिस उसके डिजिटल निशानों का पीछा करते हुए पहले ही उसके बेहद करीब पहुंच चुकी थी।
दूसरा रहस्य—ऋषिकेश में बैठकर कौन चला रहा था बैंक खातों का नेटवर्क?
पूछताछ में पुलिस के मुताबिक एक अहम कड़ी सामने आई। आरोपी सागर पाण्डेय का संपर्क मगध साइबर गैंग के पूर्व में गिरफ्तार मुख्य सरगना कृष्णा पाण्डेय से बताया गया है।
पुलिस के अनुसार सागर पाण्डेय ऋषिकेश में रहकर स्थानीय स्तर पर लोगों को पैसों का लालच देता था और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाने में मदद करता था। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए गैंग को उपलब्ध कराया जाता था।
यही बैंक खाते इस पूरे नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताए जा रहे हैं।
इन खातों को आम भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है—ऐसे बैंक खाते जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
सनसनीखेज खुलासा—18 बैंक खाते और मोटे कमीशन का कथित खेल!
पुलिस के अनुसार पूछताछ में सागर पाण्डेय ने बताया कि उसने विशाल और श्याम नामक व्यक्तियों के कुल 18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराए थे।
बदले में उसे भारी कमीशन मिलने की बात भी पुलिस के सामने आई है।
यानी साइबर ठगी का खेल सिर्फ मोबाइल फोन पर फर्जी लिंक भेजने या लोगों को फोन करने तक सीमित नहीं था। पुलिस की जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक इसके पीछे बैंक खातों की व्यवस्था करने वाला एक अलग नेटवर्क भी काम कर रहा था।
यही वह कड़ी है, जिसके जरिए ठगी की रकम को बैंकिंग सिस्टम में प्रवेश कराने का रास्ता तैयार किया जाता था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन 18 खातों में कितनी रकम आई? कितने लोगों से ठगी की गई? रकम आगे किन खातों में भेजी गई? और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं?
इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।
तीसरा रहस्य—पांच साथी जेल गए तो मिटा डाली पूरी ‘डिजिटल डायरी’
पुलिस के मुताबिक सागर पाण्डेय को जैसे ही जानकारी मिली कि उसके पांच साथी गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं, उसे अपने पकड़े जाने का डर सताने लगा।
इसके बाद उसने कथित तौर पर अपने मोबाइल से एक-एक करके WhatsApp चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और साथियों के मोबाइल नंबर डिलीट कर दिए।
मकसद साफ बताया जा रहा है—पुलिस तक नेटवर्क की कड़ी न पहुंचे।
लेकिन यहीं कहानी ने सबसे बड़ा मोड़ लिया।
जिस मोबाइल से आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश की, वही मोबाइल पुलिस की तकनीकी जांच का अहम हिस्सा बन गया।
चौथा रहस्य—डिलीट चैट के बाद भी बची ‘एक तस्वीर’!
पुलिस के मुताबिक तकनीकी जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल की गैलरी से विशाल के नाम दर्ज एक बैंक खाते की फोटो बरामद हुई।
यही डिजिटल सामग्री जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई।
इसके अलावा पुलिस ने बैंक खातों और चैट से संबंधित रिकवर्ड डिजिटल दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
यानी आरोपी ने चैट डिलीट कर दी, नंबर मिटा दिए और कॉल रिकॉर्ड हटाने की कोशिश की—लेकिन मोबाइल की गैलरी में मौजूद एक तस्वीर ने कथित तौर पर कहानी की दिशा बदल दी।
डिजिटल अपराध की यही सबसे बड़ी पहेली है—जो चीज अपराधी को दिखाई नहीं देती, वही जांचकर्ता के लिए सबसे बड़ा सुराग बन सकती है।
अब जांच के अगले पन्ने में कौन-कौन से नाम आएंगे?
सागर पाण्डेय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं रह सकती। 18 बैंक खातों का कथित नेटवर्क, गैंग से संपर्क, कमीशन का लेनदेन और साइबर ठगी की रकम—ये सभी बिंदु जांच के दायरे में हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुट सकती है कि इन खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया और इनसे कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके कब्जे से REALME कंपनी का मोबाइल फोन तथा बैंक खातों और चैट से संबंधित रिकवर्ड डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं।
SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ शिकंजा लगातार कस रहा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह के निर्देश पर साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण में कोतवाली श्यामपुर पुलिस और सीआईयू हरिद्वार की विशेष टीम ने यह कार्रवाई की।
इस ऑपरेशन में थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, चौकी प्रभारी चंडीघाट देवेंद्र सिंह तोमर, कांस्टेबल विनित कुमार, कांस्टेबल राहुल देव, कांस्टेबल वसीम और सीआईयू हरिद्वार की टीम शामिल रही।
मुकदमा—मु0अ0सं0 100/2026, कोतवाली श्यामपुर, जनपद हरिद्वार।
कहानी का क्लाइमेक्स अभी बाकी है…
एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन 18 बैंक खातों का राज, कथित कमीशन का नेटवर्क और साइबर ठगी की रकम का रास्ता अभी जांच के कई नए दरवाजे खोल सकता है।
जिस आरोपी ने गिरफ्तारी के डर से डिजिटल सबूत मिटाकर खुद को सुरक्षित समझा, पुलिस के मुताबिक उसी के मोबाइल में बचा एक डिजिटल सुराग उसके लिए मुसीबत बन गया।
चैट डिलीट हुई, नंबर मिटे, सबूत छिपाने की कोशिश हुई—लेकिन डिजिटल दुनिया में कहानी का एक पन्ना बचा रह गया। उसी पन्ने को पढ़ते-पढ़ते श्यामपुर पुलिस ऋषिकेश पहुंची और मायाकुंड में हुआ घेराबंदी का ‘क्लाइमेक्स’ सागर पाण्डेय की गिरफ्तारी के साथ सामने आया सनसनीखेज सच।



