कलियर साबरी मस्जिद के रखरखाव और अधूरे निर्माण की खुली पोल: बारिश में पानी से भरे बेसमेंट में नमाज पढ़ने को मजबूर हुए नमाजी! साबरी जामा मस्जिद में व्यवस्थाओं का निकला दम, ऊपर जगह कम पड़ी तो जलभराव वाले बेसमेंट में पहुंचे अकीदतमंद; हर बारिश में दोहराती है बदहाली की तस्वीर, जिम्मेदारों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल? जिम्मेदार कौन

कलियर साबरी मस्जिद के रखरखाव और अधूरे निर्माण की खुली पोल: बारिश में पानी से भरे बेसमेंट में नमाज पढ़ने को मजबूर हुए नमाजी!
साबरी जामा मस्जिद में व्यवस्थाओं का निकला दम, ऊपर जगह कम पड़ी तो जलभराव वाले बेसमेंट में पहुंचे अकीदतमंद; हर बारिश में दोहराती है बदहाली की तस्वीर, जिम्मेदारों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल? जिम्मेदार कौन

कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक परिसर में स्थित साबरी जामा मस्जिद में शुक्रवार को हुई बारिश ने रखरखाव और निर्माण व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने ला दी, जिसने जिम्मेदारों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे नमाज़ियों के सामने उस समय मुश्किल खड़ी हो गई, जब मस्जिद का ऊपरी हिस्सा भीड़ से भर गया और नीचे बेसमेंट में बारिश का पानी जमा मिला। जगह की कमी और नमाज का वक्त होने के कारण कई अकीदतमंदों को पानी से भरे बेसमेंट में खड़े होकर जुमे की नमाज अदा करनी पड़ी।
पानी में खड़े होकर नमाज पढ़ते अकीदतमंदों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद साबरी जामा मस्जिद के रखरखाव, अधूरे निर्माण कार्य और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सवाल सीधा है—जब यहां रोजाना हजारों जायरीन आते हैं और जुमे के दिन भीड़ कई गुना बढ़ जाती है, तो बारिश के पानी की निकासी और नमाजियों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम आखिर क्यों नहीं हैं?
बारिश आई तो खुल गई व्यवस्था की ‘परत-दर-परत’ पोल
शुक्रवार को बारिश के बाद साबरी जामा मस्जिद परिसर में हालात उस समय बिगड़ गए, जब जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में नमाज़ी पहुंचे। ऊपरी हिस्से में क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण कई लोगों को बेसमेंट का रुख करना पड़ा।
लेकिन बेसमेंट में पहले से ही बारिश का पानी जमा था। इसके बावजूद वहां नमाज़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। नमाज का समय होने के कारण अकीदतमंदों के सामने सीमित विकल्प रह गए और कई नमाज़ी पानी के बीच खड़े होकर इबादत करते नजर आए।
कई नमाज़ियों के पैर और कपड़े पानी से भीग गए। धार्मिक स्थल पर इबादत के लिए पहुंचे लोगों को इस तरह की स्थिति से गुजरना पड़ा तो मौके पर मौजूद लोगों में व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई दी।
अधूरा निर्माण और रखरखाव पर सवाल—कब पूरा होगा काम?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मस्जिद परिसर में निर्माण और रखरखाव से जुड़े कार्यों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कई स्थानों पर व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर की नहीं दिखाई देतीं। बारिश ने इन्हीं कमियों को खुलकर सामने ला दिया।
लोगों का कहना है कि किसी भी बड़े धार्मिक स्थल पर निर्माण कार्य केवल भवन खड़ा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल निकासी, बेसमेंट की सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, साफ-सफाई, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था भी निर्माण और रखरखाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यदि बेसमेंट का निर्माण इस प्रकार हुआ है कि सामान्य बारिश में वहां पानी भर जाता है, तो इसकी तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई? यदि जल निकासी की व्यवस्था है तो वह बारिश के समय प्रभावी क्यों नहीं दिखी? और यदि निर्माण अभी अधूरा है तो नमाज़ियों के लिए उस हिस्से का इस्तेमाल किस व्यवस्था के तहत कराया जा रहा है?
इन सवालों का जवाब जिम्मेदारों को देना होगा।
हर बारिश में पानी, हर बार परेशानी—फिर स्थायी समाधान कब?
स्थानीय नागरिकों और जायरीनों का कहना है कि बेसमेंट में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। बारिश के दौरान यहां पानी जमा होने की स्थिति पहले भी सामने आती रही है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से हर बार नमाज़ियों और जायरीनों को परेशानी उठानी पड़ती है।
लोगों का सवाल है कि आखिर बारिश का पानी निकलने के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम क्यों नहीं बनाया गया?
क्या हर बार बारिश के बाद पानी निकालने के लिए पंप चलाना ही व्यवस्था का स्थायी विकल्प है? अगर ऐसा है तो भारी बारिश या लगातार बारिश की स्थिति में क्या होगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी इंतजाम से समस्या को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, खत्म नहीं किया जा सकता। जरूरत है पूरे बेसमेंट और मस्जिद परिसर की जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की।
हजारों जायरीन आते हैं, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का संकट क्यों?
दरगाह साबिर पाक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां सालभर देश के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन पहुंचते हैं। उर्स के दौरान तो श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। जुमे की नमाज के दौरान भी मस्जिद और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ रहती है।
ऐसे में नमाज़ियों को पानी में खड़े होकर नमाज अदा करने की स्थिति व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
धार्मिक स्थल पर आने वाला हर व्यक्ति यह उम्मीद करता है कि उसे सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण मिलेगा। लेकिन यदि बारिश के दौरान नमाज के लिए पहुंचे लोगों को जलभराव वाले बेसमेंट में जाना पड़े तो यह महज असुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर खामी का संकेत है।
जिम्मेदार कौन? निर्माण की गुणवत्ता से लेकर जल निकासी तक हो जांच
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले को केवल बारिश के बाद पानी निकालकर समाप्त न किया जाए। मस्जिद के बेसमेंट और पूरे परिसर की तकनीकी जांच कराई जाए। अधूरे निर्माण कार्यों की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी की क्षमता और बारिश के पानी के प्रवेश के कारणों की जांच हो।
इसके साथ ही यह भी देखा जाए कि मस्जिद में आने वाले नमाज़ियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त स्थान और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं।
लोगों ने प्रशासन और दरगाह प्रबंधन से मांग की है कि बेसमेंट में तत्काल पानी निकासी की प्रभावी व्यवस्था की जाए तथा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम तैयार कराया जाए। बारिश के मौसम में अतिरिक्त पंप, बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था और कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
आस्था का केंद्र, लेकिन बारिश में बेबस व्यवस्था!
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस दरगाह में देश-विदेश से लोग आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहां बारिश जैसी सामान्य प्राकृतिक परिस्थिति में व्यवस्थाएं क्यों चरमरा जाती हैं?
अकीदतमंदों की आस्था अपनी जगह है, लेकिन उनकी सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी भी किसी से कम नहीं।
पानी में खड़े होकर नमाज पढ़ते नमाज़ियों की तस्वीरें केवल एक दिन की परेशानी की कहानी नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत कमियों का आईना हैं जिन्हें समय रहते दूर किया जाना जरूरी है।
अब देखना यह होगा कि शुक्रवार को सामने आई जलभराव की तस्वीरों के बाद जिम्मेदार विभाग और दरगाह प्रबंधन सिर्फ पानी निकालकर मामला शांत करते हैं या फिर अधूरे निर्माण, रखरखाव और जल निकासी की पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करते हुए स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाते हैं।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक बारिश का नहीं है—सवाल यह है कि अगली बारिश में भी क्या नमाज़ियों को फिर पानी के बीच खड़े होकर इबादत करनी पड़ेगी?



