सलेमपुर बाजार में मासूम की गर्दन में फंसा चाइनीज मांझा, बाल-बाल बची जान!… दादुपुर गोविंदपुर का 14 वर्षीय अरमान कुरैशी साइकिल से सामान लेने निकला था, अचानक गर्दन में लिपटी धारदार डोर—कट लगने से मचा हड़कंप,, एक पल की देरी पड़ सकती थी भारी, चाइनीज मांझे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल—परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की

सलेमपुर बाजार में मासूम की गर्दन में फंसा चाइनीज मांझा, बाल-बाल बची जान!…
दादुपुर गोविंदपुर का 14 वर्षीय अरमान कुरैशी साइकिल से सामान लेने निकला था, अचानक गर्दन में लिपटी धारदार डोर—कट लगने से मचा हड़कंप,,
एक पल की देरी पड़ सकती थी भारी, चाइनीज मांझे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल—परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की

वाजिद अली हरिद्वार… एक पतली सी डोर… और मासूम की जिंदगी खतरे में! सलेमपुर बाजार में उस समय हड़कंप मच गया, जब दादुपुर गोविंदपुर निवासी अरमान कुरैशी की गर्दन में अचानक चाइनीज मांझा आकर फंस गया। अरमान साइकिल से बाजार में सामान लेने जा रहा था। इसी दौरान हवा में लटक रही धारदार डोर अचानक उसकी गर्दन से जा टकराई।
मांझा गर्दन में फंसते ही बच्चे को तेज झटका लगा। मांझे की धार से उसकी गर्दन पर कट और चोट आ गई। गनीमत रही कि समय रहते मांझा हट गया और मासूम की जान बच गई। घटना के बाद बच्चे के परिजनों में दहशत का माहौल है।
बाल-बाल बची मासूम की जान, वरना हो सकता था बड़ा हादसा
प्रत्यक्ष रूप से सामने आई तस्वीरों में बच्चे की गर्दन पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। घटना ने एक बार फिर सड़क किनारे और बाजार क्षेत्रों में खुलेआम उड़ने वाले खतरनाक मांझे के खतरे को सामने ला दिया है।
अरमान के साथ जो हुआ, वह किसी भी राहगीर के साथ हो सकता है। खासकर बच्चे, साइकिल सवार और दोपहिया वाहन चालक हवा में दिखाई न देने वाली डोर की चपेट में आ सकते हैं। गर्दन या चेहरे पर मांझा फंसने की स्थिति में गंभीर चोट का खतरा बना रहता है।
सलेमपुर बाजार में हादसा, अब उठे सवाल—कहां से आया प्रतिबंधित मांझा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित और खतरनाक मांझे की बिक्री पर रोक के बावजूद यदि यह लोगों तक पहुंच रहा है तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है?
लोगों ने प्रशासन से पतंग की दुकानों पर औचक निरीक्षण, प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर कार्रवाई और इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।
“आज अरमान बच गया… अगली बार कौन बचेगा?”
अरमान की घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि बड़ी चेतावनी है। यदि मांझा कुछ पल और उसकी गर्दन में फंसा रहता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
मासूमियत बाल-बाल बची, जिंदगी बच गई—लेकिन खतरनाक मांझे का खतरा अभी कायम है।
अब देखना होगा कि सलेमपुर बाजार की इस घटना के बाद प्रशासन प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ धरातल पर कितनी सख्ती दिखाता है।
लोगों से अपील
प्रतिबंधित एवं धारदार मांझे का इस्तेमाल न करें। बच्चों को साइकिल या बाइक से सड़क पर भेजते समय विशेष सावधानी बरतें और कहीं ऐसा मांझा दिखाई दे तो तत्काल संबंधित प्रशासन/पुलिस को सूचना दें।
एक डोर का खेल किसी घर की खुशियां छीन सकता है—सावधान रहें, सुरक्षित रहें।



