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बारिश बनी कातिल, नाला बना काल! 9 साल की मासूम लापता—SDRF की जंग जारी, अब विकास के दावों पर उठे सवाल?रावली महदूद में बरसाती नाले में बही 9 साल की बच्ची, रातभर SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी!… दो बच्चियां तेज बहाव में बहीं—एक को स्थानीय लोगों ने बचाया, दूसरी का अब तक सुराग नहीं; कूड़े और सीवर के पानी ने रेस्क्यू में बढ़ाई मुश्किलें,, हादसे के बाद सियासत तेज—कांग्रेस नेता मनोज धनगर ने स्थानीय रानीपुर विधायक के विकास दावों पर उठाए सवाल, बोले- हर बरसात में हादसों के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं? 2027 में जनता देगी जवाब

बारिश बनी कातिल, नाला बना काल! 9 साल की मासूम लापता—SDRF की जंग जारी, अब विकास के दावों पर उठे सवाल

रावली महदूद में बरसाती नाले में बही 9 साल की बच्ची, रातभर SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी!…

दो बच्चियां तेज बहाव में बहीं—एक को स्थानीय लोगों ने बचाया, दूसरी का अब तक सुराग नहीं; कूड़े और सीवर के पानी ने रेस्क्यू में बढ़ाई मुश्किलें,,

हादसे के बाद सियासत तेज—कांग्रेस नेता मनोज धनगर ने स्थानीय रानीपुर विधायक के विकास दावों पर उठाए सवाल, बोले- हर बरसात में हादसों के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं? 2027 में जनता देगी जवाब

इन्तजार रजा, हरिद्वार– हरिद्वार की रानीपुर विधानसभा के सिडकुल थाना क्षेत्र स्थित रावली महदूद में भारी बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बरसाती नाले में दो बच्चियां बह गईं। स्थानीय लोगों ने प्रयास कर एक बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन करीब 9 वर्षीय दूसरी बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। घटना के बाद पुलिस, SDRF, फायर ब्रिगेड और नगर पालिका की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।

बताया गया कि भारी बारिश के चलते बरसाती नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। इसी दौरान खेलते समय दोनों बच्चियां तेज बहाव की चपेट में आ गईं। एक बच्ची को स्थानीय लोगों ने किसी तरह बचा लिया, जबकि दूसरी बच्ची पानी के तेज बहाव में बह गई। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा और तलाश शुरू कर दी गई।

कूड़े का अंबार बना रेस्क्यू में बड़ी बाधा

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नाले में जमा भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जेसीबी की मदद से नाले में जमा कचरा हटाया जा रहा है, जबकि SDRF के जवान मैनुअल सर्च ऑपरेशन भी चला रहे हैं।

SDRF टीम इंचार्ज आशीष त्यागी के मुताबिक, शाम करीब सात बजे सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया कि भारी बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव तेज था। आसपास के सीवर का पानी भी नाले में आने के कारण रेस्क्यू अभियान में अतिरिक्त परेशानी सामने आई।

आशीष त्यागी, SDRF टीम इंचार्ज

पुलिस और प्रशासन की टीमें नाले के संभावित बहाव वाले क्षेत्रों में भी बच्ची की तलाश कर रही हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों की निगाहें लगातार रेस्क्यू टीम पर टिकी हुई हैं।

हादसे ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल?

इस हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल केवल बच्ची की तलाश तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बरसाती नालों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर उठते रहे सवाल भी एक बार फिर सामने आ गए हैं।

कांग्रेस नेता एवं धनगर समाज महासभा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मनोज धनगर का दावा है कि सिडकुल क्षेत्र का बारिश का पानी रावली महदूद से होकर गुजरता है और बरसात के मौसम में हर वर्ष किसी न किसी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उनका आरोप है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।धनगर ने स्थानीय विधायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हाल ही में नाले का निरीक्षण किया गया था, लेकिन उनके अनुसार निरीक्षण के बाद कोई ठोस कार्ययोजना धरातल पर नजर नहीं आई।

मनोज धनगर, कांग्रेस नेता एवं प्रदेश अध्यक्ष, धनगर समाज महासभा उत्तराखंड

धनगर ने विधानसभा में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि क्षेत्र में इतना विकास हुआ है तो बरसात के दौरान जल निकासी जैसी बुनियादी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया?

हालांकि, विधायक या संबंधित जनप्रतिनिधि की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस खबर के तैयार होने तक सामने नहीं आई है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषण: 2027 में ‘विकास बनाम जमीनी हकीकत’ बन सकता है मुद्दा

रावली महदूद का यह हादसा अब राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है। रानीपुर विधानसभा में लंबे समय से स्थानीय विकास, जल निकासी, नालों की स्थिति और बरसात के दौरान जलभराव जैसे मुद्दे जनता के बीच चर्चा में रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, किसी भी सरकार या जनप्रतिनिधि के विकास के दावों का वास्तविक परीक्षण उन इलाकों में होता है जहां बुनियादी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। यदि किसी क्षेत्र में हर वर्ष बारिश के दौरान खतरा उत्पन्न होता है और उसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं होता, तो विपक्ष के पास सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि से जवाब मांगने का राजनीतिक आधार तैयार हो जाता है।

यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रावली महदूद जैसे स्थानीय मुद्दे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सत्ता पक्ष जहां विकास कार्यों और उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष जल निकासी, सुरक्षा, रोजगार और स्थानीय सुविधाओं जैसे जमीनी सवालों के जरिए सरकार को घेर सकता है।

हालांकि, किसी एक हादसे के आधार पर पूरे विधानसभा क्षेत्र के चुनावी रुझान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनीतिक विश्लेषण की दृष्टि से इतना जरूर कहा जा सकता है कि यदि लंबे समय से चली आ रही स्थानीय समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो 2027 में यह मुद्दा ‘विकास के दावे बनाम जमीन पर स्थिति’ की बहस को धार दे सकता है।

इसी बीच हरिद्वार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

नवनीत सिंह भुल्लर, SSP हरिद्वार

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल राजनीति नहीं, बल्कि उस मासूम बच्ची की तलाश है। SDRF और अन्य टीमें लगातार नाले में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। हादसे ने प्रशासन के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बरसाती नालों को सुरक्षित बनाने, कूड़ा हटाने और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा।

अब नजर रेस्क्यू ऑपरेशन के अगले अपडेट पर है—क्या लापता बच्ची को सुरक्षित बरामद किया जा सकेगा, और क्या इस हादसे के बाद रावली महदूद की बरसाती नालियों की समस्या का कोई स्थायी समाधान सामने आएगा?

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