फर्जी प्रमाण पत्रों पर लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई से भड़का आक्रोश, 25 सितंबर से प्रमाण पत्रों के बहिष्कार का ऐलान,, प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल की दो टूक—कूटरचित दस्तावेजों की सजा लेखपालों को क्यों? फर्जीवाड़े में शामिल आवेदक, जन सुविधा केंद्र संचालक और गिरोह पर हो कार्रवाई

फर्जी प्रमाण पत्रों पर लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई से भड़का आक्रोश, 25 सितंबर से प्रमाण पत्रों के बहिष्कार का ऐलान,,
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल की दो टूक—कूटरचित दस्तावेजों की सजा लेखपालों को क्यों? फर्जीवाड़े में शामिल आवेदक, जन सुविधा केंद्र संचालक और गिरोह पर हो कार्रवाई

देहरादून, 23 सितंबर 2026– जनपद देहरादून में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों के मामले में लेखपालों के विरुद्ध हुई कार्रवाई को लेकर उत्तराखंड लेखपाल संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में बुधवार को लेखपाल सभागार, तहसील सदर देहरादून में प्रदेश कार्यकारिणी की आपात बैठक हुई। बैठक में देहरादून जिला कार्यकारिणी द्वारा 25 सितंबर 2026 से समस्त प्रमाण पत्रों के पूर्ण बहिष्कार के निर्णय का प्रदेश कार्यकारिणी ने समर्थन किया।
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने स्पष्ट किया कि लेखपालों पर कार्रवाई करने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज किसने तैयार किए, उनमें कूटरचना किस स्तर पर हुई और फर्जी प्रमाण पत्र हासिल करने में किन लोगों की भूमिका रही। उनका कहना है कि केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर आख्या देने वाले लेखपाल को पूरे फर्जीवाड़े का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष बोले—एक लेखपाल के पास रोज आते हैं 50 से 100 प्रमाण पत्र
देवेश घिल्डियाल ने बैठक में कहा कि उत्तराखंड की लगभग 60 प्रतिशत आबादी मैदानी जनपदों में रहती है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण मैदानी क्षेत्रों में एक-एक लेखपाल की आईडी पर प्रतिदिन 50 से 100 तक प्रमाण पत्र आते हैं।
ऐसे में प्रत्येक आवेदक के घर जाकर डोर-टू-डोर सत्यापन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। लेखपालों को आवेदकों द्वारा ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही अपनी आख्या देनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदक ने डिजिटल तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर कूटरचित दस्तावेज अपलोड किए हैं, तो उसकी जिम्मेदारी केवल उस लेखपाल पर डालना उचित नहीं है, जिसने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अपनी आख्या दी।
‘फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई हो, लेखपालों को निशाना न बनाया जाए’
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने कहा कि वर्तमान मामले में आवेदकों के साथ-साथ यदि किसी जन सुविधा केंद्र संचालक, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति अथवा गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
लेखपाल संघ का कहना है कि लेखपाल पहले से ही अत्यधिक कार्यदबाव में काम कर रहे हैं। कई लेखपालों के पास दो-दो क्षेत्रों का अतिरिक्त कार्यभार है। इसके बावजूद वे राजस्व कार्यों के साथ प्रमाण पत्रों की जांच और आख्या का काम लगातार कर रहे हैं।
संघ ने सवाल उठाया कि यदि आवेदन में लगाए गए दस्तावेज ही कूटरचित हों तो दस्तावेज तैयार करने और फर्जी प्रमाण पत्र हासिल करने वालों की भूमिका की जांच किए बिना लेखपालों को दोषी ठहराना कहां तक उचित है।
25 सितंबर से बहिष्कार, मैदानी क्षेत्रों तक आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
बैठक में निर्णय लिया गया कि 25 सितंबर से प्रमाण पत्रों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि लेखपालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई जारी रहती है तो संगठन प्रदेश के संपूर्ण मैदानी क्षेत्रों में प्रमाण पत्रों के बहिष्कार का कदम उठाने को मजबूर होगा।
संघ ने कहा कि इससे आम जनता को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मीडिया से अपील—एकतरफा खबरों से बचें
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने मीडिया प्रतिनिधियों से भी अपील की कि मामले की पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही तथ्यात्मक खबर प्रकाशित की जाए। उन्होंने कहा कि कुछ समाचार पत्रों में पूरे प्रकरण का दोष लेखपालों का बताया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि मामले में आवेदक, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति, जन सुविधा केंद्र संचालक और संबंधित कर्मचारियों सहित सभी पक्षों की भूमिका को सामने रखा जाए।
प्रदेश कार्यकारिणी ने एकजुट होकर लिया फैसला
आपात बैठक में प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल, प्रदेश महामंत्री मेजर सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष मंजू बिष्ट, प्रदेश उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री रविंद्र दत्त सेमवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त हुकुमचंद पाल, पूर्व जिला अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त सगत सिंह सैनी, हीरा सिंह बिष्ट, आनंद सिंह रावत, मनोज मिश्रा, भोला सिंह, सुनील चौधरी, रिजवान हसन सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा हरिद्वार के जिला अध्यक्ष सुंदर सिंह तोमर, ऊधमसिंह नगर की जिलामंत्री इंदु भट्ट तथा देहरादून के जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने स्पष्ट किया कि संगठन अपने कर्मचारियों के साथ खड़ा है और यदि कूटरचित दस्तावेजों से जुड़े मामलों में लेखपालों को ही जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की गई तो आंदोलन को मैदानी क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाएगा। अब देखना होगा कि 25 सितंबर से प्रस्तावित प्रमाण पत्र बहिष्कार को लेकर शासन-प्रशासन और लेखपाल संघ के बीच क्या रुख सामने आता है।



