हरिद्वार में अवैध कब्जों पर डीएम मयूर दीक्षित का ‘आर-पार’ का ऐलान! सरकारी जमीन हड़पने वालों को 15 दिन की मोहलत, फिर चलेगा बड़ा सर्जिकल महाअभियान,, “कुंभ और कांवड़ से पहले होगी अतिक्रमण मुक्त जमीनों की सफाई” — डीएम मयूर दीक्षित बोले, ग्राम समाज से लेकर तालाब, नहर और सरकारी विभागों की भूमि कराई जाएगी अतिक्रमण मुक्त,, “अब दोबारा अवैध कब्जा हुआ तो सम्बंधित अधिकारी भी होंगे जिम्मेदार” — पोर्टल पर होगी निगरानी, हर सरकारी जमीन की तय होगी जवाबदेही, लापरवाही पर कार्रवाई तय,,
सरकारी जमीन पर कब्जा छोड़ दीजिए, वरना प्रशासन कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार

हरिद्वार में अवैध कब्जों पर डीएम मयूर दीक्षित का ‘आर-पार’ का ऐलान! सरकारी जमीन हड़पने वालों को 15 दिन की मोहलत, फिर चलेगा बड़ा सर्जिकल महाअभियान,,
“कुंभ और कांवड़ से पहले होगी अतिक्रमण मुक्त जमीनों की सफाई” — डीएम मयूर दीक्षित बोले, ग्राम समाज से लेकर तालाब, नहर और सरकारी विभागों की भूमि कराई जाएगी अतिक्रमण मुक्त,,
“अब दोबारा अवैध कब्जा हुआ तो सम्बंधित अधिकारी भी होंगे जिम्मेदार” — पोर्टल पर होगी निगरानी, हर सरकारी जमीन की तय होगी जवाबदेही, लापरवाही पर कार्रवाई तय,,
हरिद्वार: हरिद्वार में वर्षों से सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ अब प्रशासन ने निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। आगामी कांवड़ मेले और 2027 के कुंभ मेले की तैयारियों के बीच जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने साफ कर दिया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलेभर में चिन्हित अतिक्रमणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा और कब्जाधारियों को पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। डीएम मयूर दीक्षित ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत जनपद की सभी सरकारी जमीनों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी, राष्ट्रीय राजमार्ग, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी संस्थानों से उन स्थानों की सूची मांगी गई है जहां अतिक्रमण की शिकायतें या चिन्हित कब्जे मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि कुंभ और कांवड़ जैसे विशाल आयोजनों को देखते हुए सरकारी परिसंपत्तियों को सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। यही कारण है कि अब कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीन पर दिखाई देगी।डीएम ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पहले कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन संबंधित विभागों के साथ संयुक्त अभियान चलाकर अवैध निर्माणों को हटाएगा। चाहे कब्जा अस्थायी हो या स्थायी, कार्रवाई सभी पर समान रूप से होगी।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर रेलवे भूमि, सिंचाई विभाग की जमीन, कुंभ क्षेत्र की भूमि तथा अन्य सरकारी संपत्तियों पर लंबे समय से निर्माण खड़े हैं। इन सभी मामलों की विभागवार समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि ग्राम समाज की भूमि, तालाब, नहर, नदी, चकरोड, चारागाह और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को मुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। सरकारी भूमि किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं है और उसे निजी उपयोग में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
इस बार प्रशासन ने केवल अतिक्रमण हटाने की नहीं बल्कि दोबारा कब्जा रोकने की भी रणनीति तैयार की है। डीएम ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यदि किसी स्थान से अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा हो जाता है तो संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा कि उसकी निगरानी में दोबारा अवैध कब्जा कैसे हो गया। राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, वन विभाग और अन्य विभागों के फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि राज्य सरकार के यूके-जीएमएस पोर्टल पर सभी सरकारी परिसंपत्तियों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण हटेगा, उसकी फोटो, लोकेशन और कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। संबंधित अधिकारी का नाम और जिम्मेदारी भी दर्ज होगी।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों पर घेरबाड़ कराई जाए और वहां सूचना बोर्ड लगाए जाएं। बोर्ड पर यह भी लिखा जाएगा कि भूमि किस विभाग की है और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या जनप्रतिनिधि के पास है। हरिद्वार प्रशासन का यह अभियान आने वाले दिनों में जिले के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है। कुंभ और कांवड़ जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों से पहले प्रशासन सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कर व्यवस्था सुधारने के मूड में दिखाई दे रहा है।
अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद प्रशासन किन-किन स्थानों पर कार्रवाई करता है और वर्षों से सरकारी जमीनों पर जमे कब्जों पर कितना बड़ा प्रहार देखने को मिलता है। फिलहाल डीएम का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है— “सरकारी जमीन पर कब्जा छोड़ दीजिए, वरना प्रशासन कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।”



