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20 हजार वोटों का पंचपुरी इलाका फिर उपेक्षा का शिकार?” टूटी सड़क, अतिक्रमण और नेताओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा,, “वोट लेने सब आते हैं, लेकिन गढ़मीरपुर के मुख्य मार्ग की सुध लेने कोई नहीं!” — कुंवर राव अखलाक बोले: जनता अब ‘तीसरा विकल्प’ तलाशने को तैयार,, “पथरी पुल से कुतुबपुर तक सड़क बनी मुसीबत का रास्ता! गड्ढे, जाम, अतिक्रमण और बरसात का खतरा — ग्रामीण बोले: अब नहीं हुआ काम तो आंदोलन तय”.. एंड.मौ.यूनुस 

इन्तजार रजा हरिद्वार- “20 हजार वोटों का पंचपुरी इलाका फिर उपेक्षा का शिकार?” टूटी सड़क, अतिक्रमण और नेताओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा,,

“वोट लेने सब आते हैं, लेकिन गढ़मीरपुर के मुख्य मार्ग की सुध लेने कोई नहीं!” — कुंवर राव अखलाक बोले: जनता अब ‘तीसरा विकल्प’ तलाशने को तैयार,,

“पथरी पुल से कुतुबपुर तक सड़क बनी मुसीबत का रास्ता! गड्ढे, जाम, अतिक्रमण और बरसात का खतरा — ग्रामीण बोले: अब नहीं हुआ काम तो आंदोलन तय”.. एंड.मौ.यूनुस 

हरिद्वार के पंचपुरी क्षेत्र में सड़क, अतिक्रमण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम राजपुर, गढ़मीरपुर और आसपास के गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पथरी पुल से ग्राम कुतुबपुर तक जाने वाला यह मुख्य मार्ग वर्षों से जर्जर स्थिति में पड़ा हुआ है और अब ग्रामीण इसे केवल सड़क नहीं बल्कि “दुर्घटना का रास्ता” कहने लगे हैं।

ग्रामीण मौ० युनुस पुत्र हाजी बशीर अहमद ने जिलाधिकारी हरिद्वार को एक शिकायती पत्र देकर सड़क निर्माण और अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की है। शिकायत में कहा गया कि इस मार्ग से पांच गांवों के लोग रोजाना आवाजाही करते हैं, लेकिन सड़क की हालत ऐसी है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बरसात में इनमें पानी भर जाता है और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क के दोनों ओर स्थित कुछ खेत मालिकों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है। कई जगह पशुओं का गोबर सड़क किनारे डाला जाता है, तो कहीं रास्ते पर ईंट, रेत, बजरी और निर्माण सामग्री फैलाई जाती है। इतना ही नहीं, गांव के बीच मुख्य मार्ग पर कार, ट्रैक्टर, बुग्गी और टेम्पो खड़े किए जाने से आए दिन जाम की स्थिति पैदा हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल वाहनों और एम्बुलेंस को होती है। कई बार मरीजों और बच्चों को समय पर निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा।

इसी मुद्दे पर क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय कुंवर राव अखलाक ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंचपुरी क्षेत्र को केवल चुनावी मौसम में याद किया जाता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब जनता का सब्र टूट रहा है।

कुंवर राव अखलाक ने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने पहले अपने प्रतिनिधियों से बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। उन्होंने कहा कि जब मोहम्मद शहजाद विधायक थे तो उन्होंने कई काम कराए, लेकिन उसके बाद जो भी प्रतिनिधि आए, उन्होंने मुख्य मार्गों की समस्या पर गंभीरता नहीं दिखाई।

उन्होंने कहा कि गलियों का निर्माण तो जिला पंचायत सदस्य, प्रधान और अन्य स्थानीय निकाय भी करा सकते हैं, लेकिन मुख्य मार्गों का निर्माण जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनका आरोप है कि छोटे वोट बैंक वाले इलाकों पर तो ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन पंचपुरी जैसे करीब 20 हजार वोट वाले क्षेत्र की लगातार अनदेखी की जा रही है।

अखलाक ने कहा कि अगर जनता के मुद्दों को इसी तरह नजरअंदाज किया गया तो लोग अब “तीसरा विकल्प” तलाशेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता किसी को भी जिताने और हराने की ताकत रखती है।

उन्होंने कहा, “जनता किसी भी बड़े नेता को जमीन दिखा सकती है। अगर काम नहीं होगा तो लोग बदल देंगे। जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, सड़क और विकास चाहती है।”

टोल प्लाजा और स्थानीय आंदोलनों पर भी उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ लोग केवल अपने सीमित राजनीतिक हितों के लिए धरना प्रदर्शन करते हैं, लेकिन गांव की असली समस्याओं को कोई नहीं उठाता।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा लोगों को आगे करके आम ग्रामीणों की आवाज दबा दी जाती है, जबकि मुख्य मुद्दे — सड़क, जाम, अतिक्रमण और विकास — आज भी वहीं के वहीं खड़े हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पथरी से धनोरी और पथरी से गढ़मीरपुर मार्ग यदि ठीक कर दिए जाएं तो पूरे पंचपुरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है। लेकिन लंबे समय से इन मार्गों पर ठोस काम नहीं हुआ।

अब गांव में चर्चा यह भी शुरू हो गई है कि अगर जल्द सड़क निर्माण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या प्रशासन इस बार ग्रामीणों की आवाज सुनेगा, या फिर पंचपुरी का यह मुख्य मार्ग चुनावी वादों की धूल में ही दबा रहेगा?

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