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नोचंदी जुमेरात में खिदमत का जज्बा बना मिसाल! पानी संकट के बीच आगे आए मददगार हाथ,, “जायरीन प्यास से परेशान थे, तो खादिम इस्तकार अमन साबरी और मोहम्मद रजा ने संभाली जिम्मेदारी” — भीड़ और अव्यवस्था के बीच पानी के कैंपर लगाकर दी राहत,, “इबादत के साथ इंसानियत की भी दिखी तस्वीर” — ‘या साबिर’ की सदाओं के बीच प्यासे जायरीनों तक पहुंची सेवा, लोगों ने कहा- ‘यही है असली खिदमत’,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- नोचंदी जुमेरात में खिदमत का जज्बा बना मिसाल! पानी संकट के बीच आगे आए मददगार हाथ,,

“जायरीन प्यास से परेशान थे, तो खादिम इस्तकार अमन साबरी और मोहम्मद रजा ने संभाली जिम्मेदारी” — भीड़ और अव्यवस्था के बीच पानी के कैंपर लगाकर दी राहत,,

“इबादत के साथ इंसानियत की भी दिखी तस्वीर” — ‘या साबिर’ की सदाओं के बीच प्यासे जायरीनों तक पहुंची सेवा, लोगों ने कहा- ‘यही है असली खिदमत’,,

पिरान कलियर की मशहूर नोचंदी जुमेरात में इस बार अकीदत का सैलाब उमड़ा, लेकिन भीड़ के साथ कुछ जरूरी व्यवस्थाओं की कमी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। दरगाह क्षेत्र में दूर-दराज से पहुंचे हजारों जायरीन इबादत और दुआओं में मशगूल रहे, मगर भीषण गर्मी और बढ़ती भीड़ के कारण कई स्थानों पर पेयजल की समस्या ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

नोचंदी जुमेरात के मौके पर दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में लोग पहुंचे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, वैसे-वैसे पानी की जरूरत भी बढ़ती चली गई। कई जायरीन पानी की तलाश में इधर-उधर जाते नजर आए। गर्म मौसम के बीच छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इसी दौरान खादिम इस्तकार अमन साबरी और मोहम्मद रजा ने हालात को देखते हुए सेवा का बीड़ा उठाया। उन्होंने मौके पर पानी के कैंपर लगवाकर जायरीनों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था कराई। इतना ही नहीं, दोनों खुद भी मौके पर मौजूद रहे और लोगों तक पानी पहुंचाने में सहयोग करते दिखाई दिए।

इस पहल के बाद जायरीनों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों ने कहा कि भीड़ और परेशानी के बीच जो व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए खड़ा हो जाए, वही समाज में अलग पहचान बनाता है। कई लोगों ने इस कार्य को इंसानियत, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।

इस घटना ने एक बार फिर यह एहसास कराया कि बड़े आयोजनों में सिर्फ भीड़ जुटना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन भी उतना ही जरूरी होता है। लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में पानी, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। नोचंदी जुमेरात की इस भीड़ में एक संदेश साफ दिखाई दिया— जब हालात कठिन हों, तब इंसानियत की खिदमत सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।

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