हरिद्वार में ‘मूट कोर्ट’ में गूंजी न्याय की दलीलें! चमन लाल लॉ कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने दहेज पीड़िता केस पर दिखाया कानूनी कौशल,, “किताबों से निकलकर कोर्टरूम तक पहुंची कानून की पढ़ाई” — छात्राओं ने वादी, बचाव पक्ष और जज की भूमिका निभाकर पेश किया प्रभावशाली तर्क-वितर्क,, “सीनियर्स की प्रस्तुति से जूनियर्स को भी मिली सीख” — दहेज उत्पीड़न मामले पर हुई बहस ने विद्यार्थियों में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बढ़ाई समझ और आत्मविश्वास,,

हरिद्वार में ‘मूट कोर्ट’ में गूंजी न्याय की दलीलें! चमन लाल लॉ कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने दहेज पीड़िता केस पर दिखाया कानूनी कौशल,,
“किताबों से निकलकर कोर्टरूम तक पहुंची कानून की पढ़ाई” — छात्राओं ने वादी, बचाव पक्ष और जज की भूमिका निभाकर पेश किया प्रभावशाली तर्क-वितर्क,,
“सीनियर्स की प्रस्तुति से जूनियर्स को भी मिली सीख” — दहेज उत्पीड़न मामले पर हुई बहस ने विद्यार्थियों में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बढ़ाई समझ और आत्मविश्वास,,
इन्तजार रजा हरिद्वार (8909868566)… हरिद्वार स्थित चमन लाल लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में एक प्रभावशाली मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का विषय दहेज पीड़िता से जुड़ा एक न्यायिक मामला रहा, जिसमें छात्र-छात्राओं ने वास्तविक अदालत जैसी प्रक्रिया का मंचन कर अपनी कानूनी समझ, तर्कशक्ति और प्रस्तुति क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में छात्रों ने अदालत का वातावरण तैयार करते हुए वादी और बचाव पक्ष की ओर से दमदार बहस पेश की। प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कानून के आधार पर तर्क रखते हुए अपनी बात रखी। इससे पूरे आयोजन में वास्तविक कोर्ट जैसी गंभीरता और उत्साह दिखाई दिया।
प्रतियोगिता में वादी पक्ष की ओर से आरजू और हीना ने अपनी दलीलों को मजबूती से रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से आसपी अंसारी और इल्मा ज़मा अंसारी ने प्रभावशाली कानूनी तर्कों के साथ अपना पक्ष रखा। वहीं हया खान ने जज की भूमिका निभाते हुए पूरे आयोजन को न्यायिक गरिमा के साथ संचालित किया।प्रतिभागियों ने दहेज उत्पीड़न जैसे संवेदनशील सामाजिक विषय पर कानूनी धाराओं और न्यायिक प्रक्रिया को आधार बनाकर बहस की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं ने भी पूरे ध्यान से तर्कों को सुना और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझा।
कॉलेज की शिक्षिका कुसुमलता नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता को छात्रों ने काफी सराहा। शिक्षकों ने कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां कानून के विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें वास्तविक न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली समझने का अवसर भी देती हैं।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि सीनियर छात्रों की प्रस्तुति से जूनियर विद्यार्थियों को भी सीखने का अवसर मिला। कार्यक्रम के बाद कई विद्यार्थियों ने कहा कि ऐसे आयोजन उनकी सोच, आत्मविश्वास और तर्क क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कानून की पढ़ाई को व्यावहारिक रूप से समझाने वाले इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि अदालत की दुनिया को सिर्फ पुस्तकों में नहीं, बल्कि मंच पर जीकर भी समझा जा सकता है।



