हरिद्वार के मदरसों में रिकॉर्ड से गायब ‘12 हजार बच्चों’ का रहस्य! जांच शुरू होते ही रिकॉर्ड से गायब हुए हजारों नाम,, “31 हजार से लुढ़ककर 19 हजार पर पहुंचा नामांकन रिकॉर्ड ” — 131 मदरसों की पड़ताल में सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े, डीएम मयूर दीक्षित ने गठित की हाई लेवल जांच कमेटी,, “क्या सरकारी योजनाओं के नाम पर चला कागजी छात्रों का खेल?” — 23 मदरसे जांच के घेरे में, पीएम पोषण योजना पर रोक के बाद उठे फर्जी नामांकन और अनुदान के बड़े सवाल,, क्या नए शैक्षणिक सत्र और कक्षाओं के बदलाव के कारण संख्या में कमी आई हो सकती है। सवाल बरकरार
कुछ आकर्षक और आक् 1. “12 हजार बच्चों की कमी से मचा हड़कंप, शिक्षा विभाग बोला— जांच बताएगी पूरा सच” 2. “रिकॉर्ड से गायब हुए हजारों छात्र, डीईओ बोले— मामला गंभीर, होगी गहन पड़ताल” 3. “10 से 12 हजार बच्चों की कमी ने बढ़ाई चिंता, जांच कमेटी करेगी खुलासा” 4. “मदरसों के आंकड़ों में बड़ा झटका, डीईओ ने माना— संख्या में गिरावट चिंताजनक” 5. “12 हजार बच्चों का रहस्य गहराया, शिक्षा विभाग बोला— जांच के बाद होगा खुलासा” 6. “मदरसों में नामांकन घटने से उठे सवाल, डीईओ बोले— हर रिकॉर्ड खंगाला जाएगा” 7. “हजारों छात्र रिकॉर्ड से गायब, शिक्षा विभाग अलर्ट मोड में, जांच शुरू” 8. “आंकड़ों में बड़ा अंतर, 12 हजार बच्चों की कमी पर प्रशासन की पैनी नजर”क्या नए शैक्षणिक सत्र और कक्षाओं के बदलाव के कारण संख्या में कमी आई हो सकती है। सवाल बरकरार

हरिद्वार के मदरसों में रिकॉर्ड से गायब ‘12 हजार बच्चों’ का रहस्य! जांच शुरू होते ही रिकॉर्ड से गायब हुए हजारों नाम,,
“31 हजार से लुढ़ककर 19 हजार पर पहुंचा नामांकन रिकॉर्ड ” — 131 मदरसों की पड़ताल में सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े, डीएम मयूर दीक्षित ने गठित की हाई लेवल जांच कमेटी,,
“क्या सरकारी योजनाओं के नाम पर चला कागजी छात्रों का खेल?” — 23 मदरसे जांच के घेरे में, पीएम पोषण योजना पर रोक के बाद उठे फर्जी नामांकन और अनुदान के बड़े सवाल,,
क्या नए शैक्षणिक सत्र और कक्षाओं के बदलाव के कारण संख्या में कमी आई हो सकती है। सवाल बरकरार
हरिद्वार: हरिद्वार के मदरसों में दर्ज छात्रों की संख्या को लेकर सामने आया खुलासा अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग द्वारा किए गए सत्यापन में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने प्रशासनिक तंत्र को भी चौंका दिया है। मार्च महीने तक जिन मदरसों में करीब 31 हजार बच्चों का नामांकन दर्ज था, वहीं अप्रैल में यह संख्या घटकर करीब 19 हजार रह गई। यानी रिकॉर्ड में लगभग 12 हजार बच्चों की कमी दर्ज हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये 12 हजार बच्चे गए कहां? क्या यह केवल रिकॉर्ड अपडेट होने का मामला है, या फिर वर्षों से सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाई जा रही थी? इन्हीं सवालों ने अब पूरे मामले को गंभीर जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली इस समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है। समिति अब मदरसों के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत का मिलान करेगी।
जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में हरिद्वार जिले में संचालित 131 मदरसों की जांच की गई थी। जांच के दौरान 23 मदरसों में अनियमितताओं की आशंका सामने आई। इसके बाद इन मदरसों की पीएम पोषण योजना और अन्य सरकारी सहायता पर रोक लगा दी गई।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई नए तथ्य सामने आने लगे। बताया जा रहा है कि 10 से 11 मदरसा संचालकों ने स्वयं पीएम पोषण योजना बंद करने के लिए आवेदन दे दिया। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि जांच की सख्ती बढ़ने के बाद कई संस्थान खुद को जांच के घेरे से बचाने की कोशिश में दिखाई दिए।
इसी बीच नामांकन के आंकड़ों में आई भारी गिरावट ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। मार्च और अप्रैल के आंकड़ों की तुलना में एक साथ 12 हजार बच्चों का रिकॉर्ड से कम हो जाना अब जांच का सबसे बड़ा विषय बन चुका है।
जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद ने इस मामले में कहा कि छात्रों की संख्या में कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उनके अनुसार कुछ मदरसों में पीएम पोषण योजना बंद होने के बाद उन छात्रों का नामांकन संबंधित डेटा में नहीं दिख रहा है। इसके अलावा नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने, बच्चों के पास आउट होने और अप्रैल-मई के दौरान उपस्थिति कम रहने जैसे कारण भी प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि 10 से 11 मदरसों में पीएम पोषण योजना बंद होने, नए शैक्षणिक सत्र और कक्षाओं के बदलाव के कारण संख्या में कमी आई हो सकती है। हालांकि 10 से 12 हजार बच्चों की अचानक कमी चिंता का विषय है वर्तमान में जांच जारी है
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 10 से 12 हजार बच्चों की संख्या का अचानक कम हो जाना सामान्य बात नहीं है। यही कारण है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा।जांच के दौरान एक और मामला सामने आया जिसने अधिकारियों का ध्यान खींचा। सुल्तानपुर गढमीरपुर क्षेत्र में संचालित कुछ मदरसों के रिकॉर्ड की जांच में वास्तविक संचालन और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के बीच अंतर की संभावना दिखाई दी। प्रशासन अब ऐसे मामलों का भौतिक सत्यापन कर रहा है।
दरअसल अप्रैल महीने में शिक्षा विभाग ने मदरसा संचालकों की बैठक बुलाकर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया था। इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें मिड डे मील तैयार करने और बच्चों की उपस्थिति से जुड़ी फोटो एवं वीडियो नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कई संस्थान निर्धारित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके बाद जांच और तेज कर दी गई।
अब गठित जांच समिति प्रत्येक मदरसे का रिकॉर्ड खंगालेगी। छात्रों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, पीएम पोषण योजना के लाभार्थियों, सरकारी अनुदान और नामांकन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समिति गांवों में जाकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटा सकती है।
फिलहाल पूरे मामले में शिक्षा विभाग और प्रशासन सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब हरिद्वार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिकॉर्ड से गायब हुए 12 हजार बच्चे आखिर कहां हैं? क्या यह केवल आंकड़ों का तकनीकी अंतर है या फिर जांच की परतें खुलने के साथ कोई बड़ा सच सामने आने वाला है? इसका जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि हरिद्वार के मदरसों में नामांकन का यह रहस्य अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।



