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उत्तराखंड में मौसम का तिहरा वार! कहीं मूसलाधार बारिश, कहीं ओलावृष्टि तो कहीं जंगलों में धधकी आग, प्रशासन अलर्ट मोड पर… “आंधी-बारिश ने दी गर्मी से राहत, लेकिन बढ़ीं नई मुसीबतें” — कई जिलों में पेड़ गिरे, कई जगह बिजली आपूर्ति ठप, किसानों की फसलों को नुकसान… “वनाग्नि पर सख्ती, सहयोग नहीं किया तो होगा मुकदमा” — 37 स्थानों पर जंगलों में आग, सात जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी…

उत्तराखंड में मौसम का तिहरा वार! कहीं मूसलाधार बारिश, कहीं ओलावृष्टि तो कहीं जंगलों में धधकी आग, प्रशासन अलर्ट मोड पर…

“आंधी-बारिश ने दी गर्मी से राहत, लेकिन बढ़ीं नई मुसीबतें” — कई जिलों में पेड़ गिरे, कई जगह बिजली आपूर्ति ठप, किसानों की फसलों को नुकसान…

“वनाग्नि पर सख्ती, सहयोग नहीं किया तो होगा मुकदमा” — 37 स्थानों पर जंगलों में आग, सात जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी…

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड इन दिनों मौसम के अभूतपूर्व बदलाव का सामना कर रहा है। प्रदेश में एक ही समय पर प्रकृति के तीन अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। कहीं तेज आंधी और मूसलाधार बारिश जनजीवन को प्रभावित कर रही है, कहीं ओलावृष्टि किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है, तो दूसरी ओर जंगल भीषण आग की चपेट में हैं। मौसम के इस तिहरे वार ने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

28 मई की देर रात अचानक मौसम ने करवट ली और राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। सहस्रधारा रोड, रायपुर, प्रेमनगर और डोईवाला क्षेत्रों में कई पेड़ सड़कों पर गिर गए। बिजली के पोल और तार क्षतिग्रस्त होने से कई इलाकों में घंटों विद्युत आपूर्ति बाधित रही। कुछ स्थानों पर टिनशेड उड़ने और अस्थायी ढांचे क्षतिग्रस्त होने की भी खबरें सामने आईं।

हरिद्वार, रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में भी देर रात चली धूलभरी आंधी के बाद हुई बारिश से मौसम सुहावना जरूर हुआ, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई। खेतों में खड़ी फसलें तेज हवाओं और बारिश की मार झेलती नजर आईं। वहीं ऊधमसिंहनगर, नैनीताल और कुमाऊं के कई इलाकों में भी पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

प्रदेश के पहाड़ी जिलों में मौसम ने एक और रूप दिखाया। देहरादून और बागेश्वर के कई क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। खेतों और बागानों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सब्जियों और फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी और बारिश भी दर्ज की गई।

एक ओर बारिश और ओलावृष्टि का दौर चल रहा है तो दूसरी ओर जंगल आग की लपटों में घिरे हुए हैं। वन विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेशभर में 37 स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं। उत्तरकाशी के जोशीयाड़ा क्षेत्र समेत कई स्थानों पर जंगल घंटों तक धधकते रहे। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती रही और वन संपदा के साथ वन्यजीवों पर भी खतरा मंडराने लगा।

मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और 50 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

उधर वन विभाग ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग न करने वालों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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