साबिर पाक की चौखट पर पहुंचे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर शबाब साबरी! चादर पेश कर मांगी देश-दुनिया में अमन, सूफी परंपरा को बताया इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश,, दबंग, सिंह इज़ किंग, प्रेम रतन धन पायो और वेलकम जैसी फिल्मों को अपनी आवाज़ दे चुके शबाब साबरी ने कहा— “साबिर बाबा की दरगाह से मिला रूहानी आशीर्वाद ही मेरी सफलता की असली पूंजी”,, बचपन की यादें हुईं ताज़ा, पिता स्वर्गीय इकबाल अफजल साबरी के साथ उर्स में बिताए दिनों का किया जिक्र; सूफी संतों की शिक्षाओं को बताया मानवता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक,,

साबिर पाक की चौखट पर पहुंचे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर शबाब साबरी! चादर पेश कर मांगी देश-दुनिया में अमन, सूफी परंपरा को बताया इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश,,
दबंग, सिंह इज़ किंग, प्रेम रतन धन पायो और वेलकम जैसी फिल्मों को अपनी आवाज़ दे चुके शबाब साबरी ने कहा— “साबिर बाबा की दरगाह से मिला रूहानी आशीर्वाद ही मेरी सफलता की असली पूंजी”,,
बचपन की यादें हुईं ताज़ा, पिता स्वर्गीय इकबाल अफजल साबरी के साथ उर्स में बिताए दिनों का किया जिक्र; सूफी संतों की शिक्षाओं को बताया मानवता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक,,
पीरान कलियर/रुड़की। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम साबिर कलियरी में रविवार देर रात बॉलीवुड के चर्चित पार्श्व गायक शबाब साबरी ने हाजिरी लगाकर चादर पेश की और देश-दुनिया में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली की दुआ मांगी। शिमला समर फेस्टिवल से लौटते समय दरगाह पहुंचे शबाब साबरी ने अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलोरी के साथ दरगाह साबिर पाक में श्रद्धा अर्पित की और अपनी गहरी आध्यात्मिक आस्था का इज़हार किया।
दरगाह में हाजिरी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शबाब साबरी ने कहा कि उनका साबिर पाक की दरगाह से रिश्ता बचपन से जुड़ा हुआ है। वह अपने पिता स्वर्गीय इकबाल अफजल साबरी के साथ नियमित रूप से यहां आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उसी पवित्र चौखट की दुआओं और रूहानी बरकत का परिणाम है कि उन्हें बॉलीवुड में पहचान और सफलता हासिल हुई।
शबाब साबरी ने कहा कि सूफी संत किसी एक धर्म, जाति या समुदाय के लिए नहीं होते, बल्कि उनकी शिक्षाएं पूरी मानवता के लिए होती हैं। दरगाहें प्रेम, भाईचारे, आध्यात्मिक शांति और इंसानियत का संदेश देती हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के रूहानी सुकून और दुआ प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को सूफी संतों की शिक्षाओं और विचारों को अपनाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने अपने बड़े भाई और प्रसिद्ध संगीतकार स्वर्गीय वाजिद खान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी उन्हें इस क्षेत्र में किसी कार्यक्रम में आने का अवसर मिलता था, वह दरगाह साबिर पाक में हाजिरी देना नहीं भूलते थे। दरगाह से जुड़े आध्यात्मिक संबंधों ने पूरे परिवार को हमेशा ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की है।
अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए शबाब साबरी ने बताया कि उर्स के अवसर पर जब अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलोरी के संचालन में भव्य कव्वाली महफिलें सजती थीं, तब उनके पिता इकबाल अफजल साबरी कई-कई सप्ताह तक कलियर में रहकर रूहानी फिज़ा का हिस्सा बनते थे। उन दिनों की यादें आज भी उनके दिल में ताज़ा हैं।
गौरतलब है कि शबाब साबरी ने बॉलीवुड की अनेक सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है। उन्होंने सिंह इज़ किंग, दबंग, वेलकम, बोल बच्चन, एजेंट विनोद, प्रेम रतन धन पायो, वीर, जय हो और बादशाहो जैसी फिल्मों में गीत गाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके कार्यक्रमों को व्यापक सराहना मिल चुकी है।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शायर एवं उर्स कार्यक्रम समिति के संयोजक अफजल मंगलोरी, उदय कुमार मुसव्विर, विकास वशिष्ठ, बिट्टन त्यागी, इमरान देशभक्त, शायर अफरोज टांडवी, सलमान फरीदी, तौसीफ अहमद, समाजसेवी औसाफ गुड्डू तथा एडवोकेट राव महबूब सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दरगाह परिसर में श्रद्धा, आस्था और सूफियाना माहौल का विशेष संगम देखने को मिला।



