हरिद्वार पुलिस की बड़ी कामयाबी! 10 दिन पहले विष्णु घाट से चोरी हुई 4 माह की मासूम बच्ची सकुशल बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार,, कनखल और कलियर के बाद फिर दिखी हरिद्वार पुलिस की सतर्कता; हावड़ा तक खंगाले सुराग, तकनीकी जांच और जमीनी पड़ताल से खुला बच्ची चोरी का सनसनीखेज राज,, 3 लाख रुपये में लड़का बेचने की साजिश के बीच हुई मासूम की चोरी; गलती से बच्ची उठा ले गए आरोपी, SSP नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में पुलिस ने रचा सफल रेस्क्यू ऑपरेशन,,

हरिद्वार पुलिस की बड़ी कामयाबी! 10 दिन पहले विष्णु घाट से चोरी हुई 4 माह की मासूम बच्ची सकुशल बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार,,
कनखल और कलियर के बाद फिर दिखी हरिद्वार पुलिस की सतर्कता; हावड़ा तक खंगाले सुराग, तकनीकी जांच और जमीनी पड़ताल से खुला बच्ची चोरी का सनसनीखेज राज,,
3 लाख रुपये में लड़का बेचने की साजिश के बीच हुई मासूम की चोरी; गलती से बच्ची उठा ले गए आरोपी, SSP नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में पुलिस ने रचा सफल रेस्क्यू ऑपरेशन,,
हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर अपनी सक्रियता, पेशेवर जांच और अथक मेहनत का परिचय देते हुए 10 दिन पहले विष्णु घाट क्षेत्र से चोरी हुई 4 माह की मासूम बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने एक कथित बाबा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बच्ची की सुरक्षित बरामदगी के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है, वहीं आमजन भी हरिद्वार पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर की कार्यशैली की सराहना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 28 मई 2026 को सम्भल (उत्तर प्रदेश) निवासी पुष्पेंद्र ने रोड़ी बेलवाला चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आए उनके परिवार ने विष्णु घाट के पास एक पेड़ के नीचे रात बिताई थी। सुबह जागने पर उनकी 4 माह की बेटी गायब मिली। काफी तलाश के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं लगने पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
हरिद्वार जनपद में हाल के दिनों में सामने आई बच्चा चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं मामले की निगरानी की। कनखल और पिरान कलियर से चोरी हुए बच्चों की सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस का पूरा फोकस इस मासूम बच्ची की तलाश पर केंद्रित कर दिया गया।
CCTV, बस और रेलवे नेटवर्क से जोड़े गए सुराग
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्ची चोरी का सटीक समय स्पष्ट नहीं था। ऐसे में टीम ने संभावित समयावधि की हर गतिविधि की जांच शुरू की। इसी दौरान एक संदिग्ध दंपत्ति पुलिस के रडार पर आया। जांच में सामने आया कि 27 मई को यह जोड़ा एक बच्चे के साथ विष्णु घाट क्षेत्र में घूमता दिखाई दिया था, जबकि अगले दिन सुबह दो बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस में सवार हुआ।
बस चालक और परिचालक से पूछताछ में पता चला कि संदिग्ध धामपुर में उतरे थे और वहां से हावड़ा जाने वाली ट्रेन में सवार हुए। इसके बाद पुलिस ने धामपुर से हावड़ा के बीच पड़ने वाले लगभग 65 रेलवे स्टेशनों तक जानकारी जुटाई, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
तलाश का एंगल बदला और खुल गया पूरा राज
जब रेलवे रूट से कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने संदिग्धों के हरिद्वार पहुंचने के रास्ते की पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि संदिग्ध जोड़ा शिवालिक नगर क्षेत्र की ब्रह्मपुरी बस्ती से विष्णु घाट की ओर आया था। पुलिस ने क्षेत्र में फोटो दिखाकर पूछताछ की तो जानकारी मिली कि दोनों एक झाड़-फूंक करने वाले बाबा की झोपड़ी में रह रहे थे।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल ब्रह्मपुरी क्षेत्र में स्थित झोपड़ी पर दबिश दी। वहां से कथित बाबा सत्यपाल, संदिग्ध दंपत्ति और चोरी की गई मासूम बच्ची बरामद कर ली गई। पहचान कराने पर पुष्टि हुई कि बरामद बच्ची वही 4 माह की मासूम है, जिसका विष्णु घाट से अपहरण किया गया था।
3 लाख रुपये के लालच में रची गई थी साजिश
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी दंपत्ति चार बच्चों के माता-पिता हैं। महिला के एक रिश्तेदार ने उसे बताया था कि एक परिवार को बेटे की जरूरत है और यदि कोई लड़का उपलब्ध कराया जाए तो तीन लाख रुपये मिल सकते हैं। महिला ने अपना बेटा देने से इनकार कर दिया, लेकिन पैसों के लालच में यह जानकारी अपने परिचित सत्यपाल उर्फ बाबा को दे दी।
पुलिस के अनुसार इसी के बाद हरिद्वार के भीड़भाड़ वाले घाटों से बच्चा चोरी करने की योजना बनाई गई। आरोपी 26 मई को हरिद्वार पहुंचे और एक दिन तक मौका तलाशते रहे। 28 मई की सुबह करीब चार बजे उन्होंने गहरी नींद में सो रहे परिवार के बीच से एक शिशु को उठा लिया। आरोपियों को लगा कि उन्होंने लड़का चुराया है, लेकिन बाद में पता चला कि वह बच्ची है।
इसके बाद आरोपी बच्ची को बेचने की नई योजना बनाने लगे। अपने गांव लौटने और फिर दोबारा हरिद्वार पहुंचने के दौरान वे पुलिस की निगाहों से बच नहीं सके और आखिरकार दबोच लिए गए।
सतर्क रहें, बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि धार्मिक स्थलों, मेलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। पुलिस ने भी अभिभावकों से अपील की है कि यात्रा और स्नान के दौरान बच्चों को कभी अकेला न छोड़ें तथा किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इस सफल अभियान में प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा, चौकी प्रभारी नवीन चौहान, सीआईयू टीम और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मासूम की सुरक्षित बरामदगी हरिद्वार पुलिस की टीम वर्क, तकनीकी दक्षता और जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।



