अपराधअपीलअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

नैनीताल SSP कार्यालय विवाद में नया मोड़, भदौरिया अधिवक्ताओं ने DGP से खोला मोर्चा,, गणेश गोदियाल, कमल मेहरा, यशपाल आर्य और सुमित हृदयेश समेत अन्य के खिलाफ FIR की मांग, हत्या के प्रयास की धारा 109 BNS में कार्रवाई की उठी आवाज,, शिकायत में SSP कार्यालय में कथित जबरन प्रवेश, अभद्रता और धमकी के गंभीर आरोप; CCTV से लेकर मोबाइल वीडियो तक सुरक्षित कराने की मांग, जांच के बाद तय होगी आरोपों की सच्चाई

नैनीताल SSP कार्यालय विवाद में नया मोड़, भदौरिया अधिवक्ताओं ने DGP से खोला मोर्चा,,

गणेश गोदियाल, कमल मेहरा, यशपाल आर्य और सुमित हृदयेश समेत अन्य के खिलाफ FIR की मांग, हत्या के प्रयास की धारा 109 BNS में कार्रवाई की उठी आवाज,,

शिकायत में SSP कार्यालय में कथित जबरन प्रवेश, अभद्रता और धमकी के गंभीर आरोप; CCTV से लेकर मोबाइल वीडियो तक सुरक्षित कराने की मांग, जांच के बाद तय होगी आरोपों की सच्चाई

नैनीताल। नैनीताल में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में 8 अगस्त को हुए कथित घटनाक्रम ने अब सियासी विवाद से आगे बढ़कर कानूनी मोड़ ले लिया है। मामले में अधिवक्ता अरुण भदौरिया एवं कमल भदौरिया ने पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड को लिखित शिकायत भेजकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कमल मेहरा, यशपाल आर्य, सुमित हृदयेश समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।शिकायत में पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी, सरकारी कार्य में बाधा तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नुकसान पहुंचाने की आशंका जैसे आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

SSP कार्यालय में आखिर हुआ क्या था? शिकायत ने खड़े किए कई सवाल

शिकायत के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को नैनीताल स्थित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कुछ राजनीतिक नेताओं एवं उनके साथ आए लोगों के पहुंचने के बाद कथित तौर पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि समूह के लोगों ने कार्यालय परिसर में प्रवेश किया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की।शिकायत में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों को कथित रूप से धमकाया गया और उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया गया।अधिवक्ताओं ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित लोग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तलाशते हुए कार्यालय परिसर के अंदर तक गए और बाथरूम तक के दरवाजे खोलकर उन्हें तलाशने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं ने इस घटनाक्रम को सामान्य राजनीतिक विरोध से अलग और गंभीर सुरक्षा संबंधी मामला बताया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी बातें DGP को दी गई शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

‘महज विरोध नहीं, अधिकारी की सुरक्षा का सवाल’

भदौरिया अधिवक्ताओं ने शिकायत में दावा किया है कि घटनाक्रम को केवल राजनीतिक विरोध या बातचीत के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कथित तौर पर जिस तरह से SSP कार्यालय में प्रवेश किया गया और अधिकारी को तलाशने का प्रयास किया गया, उससे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल पैदा होते हैं। शिकायत में पुलिस अधिकारी को कथित रूप से शारीरिक नुकसान पहुंचाने अथवा हमला करने की आशंका भी व्यक्त की गई है। साथ ही कथित पूर्व योजना की भी जांच किए जाने की मांग की गई है। इसी आधार पर शिकायतकर्ताओं ने मामले में गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है।

हत्या के प्रयास की धारा में मुकदमे की मांग

शिकायत में अधिवक्ताओं ने हत्या के प्रयास के आरोप की भी जांच और कार्रवाई की मांग की है। वर्तमान कानून के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 हत्या के प्रयास से संबंधित है, जबकि पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में इसके लिए धारा 307 लागू होती थी शिकायतकर्ताओं की मांग है कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी पर हमला करने, जान से मारने के प्रयास या ऐसी आपराधिक मंशा के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो BNS की धारा 109 समेत लागू अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही शिकायत में BNS की अन्य धाराओं के तहत भी कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, अंतिम रूप से कौन-कौन सी धाराएं लागू होंगी, यह पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित जांच अधिकारी तय करेगा।

CCTV खोलेगा घटनाक्रम का राज?

मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य CCTV फुटेज को माना जा रहा है। अधिवक्ताओं ने DGP से मांग की है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में लगे सभी CCTV कैमरों की मूल रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित कराई जाए। शिकायत में कार्यालय के प्रवेश द्वार, गलियारों, कार्यालय कक्षों और बाथरूम की ओर जाने वाले रास्तों की फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, घटना से 24 घंटे पहले और 24 घंटे बाद तक की CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग भी की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि कार्यालय में कौन-कौन पहुंचा, कितने समय तक परिसर में रहा और घटनाक्रम के दौरान वास्तव में क्या हुआ।

मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया फुटेज भी जांच के दायरे में

शिकायतकर्ताओं ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कराने की मांग की है। इसके अलावा कार्यालय के प्रवेश रजिस्टर, संबंधित पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी सूची और उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने को कहा गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाने और उनकी मूल फाइल सुरक्षित कराने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि अलग-अलग वीडियो और CCTV फुटेज का मिलान करने से पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

अब DGP के आदेश पर टिकी नजर

इस शिकायत के बाद पूरे मामले में पुलिस महानिदेशालय के अगले कदम पर नजरें टिक गई हैं। अधिवक्ताओं ने DGP से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को आवश्यक निर्देश देकर शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोप सीधे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कार्यालय की सुरक्षा और सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जुड़े हैं। यदि जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, दूसरी ओर जिन राजनीतिक नेताओं के नाम शिकायत में लिए गए हैं, उनका पक्ष और घटनाक्रम को लेकर उनका आधिकारिक बयान सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल असली फैसला साक्ष्य करेंगे

नैनीताल SSP कार्यालय विवाद अब आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर जांच की चौखट पर पहुंच गया है। एक तरफ अधिवक्ताओं ने गंभीर धाराओं में FIR और कार्रवाई की मांग उठाई है, तो दूसरी तरफ आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।अब CCTV कैमरे, मोबाइल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कार्यालय के रिकॉर्ड यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि 8 अगस्त को SSP कार्यालय में वास्तव में क्या हुआ था और क्या लगाए गए गंभीर आरोप कानूनी कार्रवाई के स्तर तक पहुंचते हैं।

Related Articles

Back to top button