Daily Live Uttarakhand updateइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

हरिद्वार में 271 मदरसों में सिर्फ 22 को नवीनीकृत मान्यता, 44 की जांच जारी—बाकी 205 मदरसे आखिर मान्यता से क्यों दूर? मान्यता प्रक्रिया में बड़ा अंतर सामने आने से उठे सवाल, क्या बिना मान्यता चल रहे मदरसों की होगी गहन जांच?—कहां अटकी प्रक्रिया और कौन हैं जिम्मेदार?

हरिद्वार में 271 मदरसों में सिर्फ 22 को नवीनीकृत मान्यता, 44 की जांच जारी—बाकी 205 मदरसे आखिर मान्यता से क्यों दूर?

मान्यता प्रक्रिया में बड़ा अंतर सामने आने से उठे सवाल, क्या बिना मान्यता चल रहे मदरसों की होगी गहन जांच?—कहां अटकी प्रक्रिया और कौन हैं जिम्मेदार?

हरिद्वार। जिले में संचालित मदरसों की मान्यता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हरिद्वार जिले में कुल 271 मदरसे बताए जा रहे हैं। इनमें से महज 22 मदरसों को नवीनीकृत मान्यता प्राप्त है, जबकि 44 मदरसों की मान्यता के लिए जांच प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल उन मदरसों को लेकर है, जो अब तक मान्यता की प्रक्रिया में आगे नहीं आए हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 271 में से 22 मदरसों को नवीनीकृत मान्यता मिल चुकी है और 44 मदरसों की जांच प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में मदरसों का मान्यता प्रक्रिया से बाहर होना कई गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है। आखिर इन संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन क्यों नहीं किया? यदि आवेदन किया है तो उनकी प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है? और यदि आवेदन ही नहीं किया गया तो इसके पीछे क्या कारण हैं?

यह मामला केवल कागजी मान्यता तक सीमित नहीं माना जा सकता। किसी भी शैक्षणिक संस्था की मान्यता का संबंध उसके संचालन, निर्धारित मानकों, विद्यार्थियों की पढ़ाई, शिक्षकों की व्यवस्था, भवन एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिले में बिना नवीनीकृत मान्यता या मान्यता प्रक्रिया के बाहर चल रहे मदरसों की वास्तविक स्थिति क्या है?

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—बाकी मदरसों का रिकॉर्ड कहां है?

22 मदरसों को नवीनीकृत मान्यता मिलना और 44 मदरसों की जांच जारी रहना यह बताता है कि कुछ संस्थान निर्धारित प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन बाकी मदरसों को लेकर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभाग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने मदरसों ने आवेदन नहीं किया, कितनों के दस्तावेज अधूरे हैं और कितने संस्थानों की प्रक्रिया किसी कारण से लंबित है।

अगर किसी मदरसे ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है तो उसके संचालन की स्थिति क्या है? क्या वहां नियमित रूप से शिक्षण कार्य चल रहा है? विद्यार्थियों का रिकॉर्ड, शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या, भवन की स्थिति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन हुआ है या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।

वहीं, केवल मदरसों के नाम दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। जमीनी स्तर पर सत्यापन और रिकॉर्ड का मिलान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशासन को चाहिए कि जिले के सभी 271 मदरसों की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों और मान्यता प्रक्रिया से बाहर संस्थानों के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। यदि किसी संस्था को निर्धारित मानकों को पूरा करने में दिक्कत है तो संबंधित विभाग को उसका कारण भी बताना चाहिए और यदि दस्तावेजी कमी है तो उसे दूर करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय होनी चाहिए।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि 271 मदरसों के पूरे रिकॉर्ड का सत्यापन कब तक पूरा होगा और मान्यता प्रक्रिया से बाहर चल रहे संस्थानों की स्थिति कब सार्वजनिक की जाएगी। सवाल सीधा है—जब मान्यता के लिए नियम और प्रक्रिया निर्धारित है, तो इतनी बड़ी संख्या में मदरसे अब तक इस प्रक्रिया से बाहर क्यों हैं?

Related Articles

Back to top button