कैलाश आनंद गिरि की साधना को ‘पाखंड’ बताने वाले ब्यान पर बवाल, साध्वी कंचन गिरि के खिलाफ न्यायालय पहुंचा मामला,, अरुण भदौरिया एडवोकेट ने धारा 175(3) BNSS के तहत दाखिल किया प्रार्थना पत्र, वायरल वीडियो को बनाया आधार

कैलाश आनंद गिरि की साधना को ‘पाखंड’ बताने वाले ब्यान पर बवाल, साध्वी कंचन गिरि के खिलाफ न्यायालय पहुंचा मामला,,
अरुण भदौरिया एडवोकेट ने धारा 175(3) BNSS के तहत दाखिल किया प्रार्थना पत्र, वायरल वीडियो को बनाया आधार
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर श्री कैलाश आनंद गिरि जी महाराज की धार्मिक साधना और पूजा-अर्चना को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कथित बयान अब कानूनी मोड़ ले चुका है। साध्वी कंचन गिरि के कथित बयान को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने न्यायालय श्री शैलेंद्र कुमार यादव की अदालत में धारा 175(3) BNSS के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। प्रार्थना पत्र अधिवक्ता कमल भदौरिया एवं अधिवक्ता सुमेधा भदौरिया के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
प्रार्थना पत्र में अरुण भदौरिया ने आचार्य महामंडलेश्वर श्री कैलाश आनंद गिरि की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा गरीब कन्याओं के विवाह, गरीब बच्चों की शिक्षा तथा अनाथ बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा सहित विभिन्न सामाजिक कार्य किए जाते हैं। सावन माह में भगवान शिव की विशेष पूजा एवं लंबे समय तक अभिषेक किए जाने का भी प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है।
विवाद की जड़ सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को बताया गया है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक वीडियो में साध्वी कंचन गिरि ने शिवलिंग पर दिखाई दे रहे कुछ जीवों को लेकर आचार्य महामंडलेश्वर श्री कैलाश आनंद गिरि की साधना पर सवाल उठाते हुए कथित तौर पर इसे ‘पाखंड’ बताया। साथ ही निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष श्री रवींद्र पुरी जी महाराज को लेकर भी टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अरुण भदौरिया का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कैमरों से लाइव प्रसारण किया जा रहा था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम देख रहे थे। ऐसे में शिवलिंग पर दिखाई देने वाले जीवों की उपस्थिति को आधार बनाकर पूरी धार्मिक साधना को पाखंड बताना श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि कथित बयान किसी तथ्यात्मक आधार या सद्भावनापूर्ण टिप्पणी के बजाय एक प्रतिष्ठित संत की धार्मिक साधना, पूजा पद्धति और आस्था पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े करने वाला है। अधिवक्ता ने कहा कि इससे देश-विदेश में आचार्य महामंडलेश्वर से जुड़े श्रद्धालुओं के बीच भी भ्रम और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की स्थिति उत्पन्न हुई।
अरुण भदौरिया ने बताया कि उन्होंने 8 सितंबर 2026 को अपने निवास पर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखा। इसके बाद मामले को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
मामले में न्यायालय ने थाना कनखल से 21 सितंबर 2026 तक आख्या तलब की है। अब पुलिस द्वारा मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर न्यायालय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। पुलिस की आख्या सामने आने के बाद न्यायालय आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेगा।
फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर आधारित हैं। साध्वी कंचन गिरि की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।



