देहरादून प्रशासनिक गलियारों में एक कार्यकाल की गूंज! डीएम सविन बंसल ने काम, संवेदनशीलता और सख्ती से छोड़ी अलग पहचान,, “सिर्फ फाइलों के अधिकारी नहीं, जनता के भरोसे का चेहरा बने” — जनसुनवाई, त्वरित समाधान और जमीनी कार्यशैली ने दिलाई अलग पहचान,, “अब सचिव नियोजन की नई जिम्मेदारी, लेकिन देहरादून याद रखेगा एक सक्रिय और संवेदनशील प्रशासक” — सख्ती और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन से बना प्रशासनिक मॉडल,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- देहरादून प्रशासनिक गलियारों में एक कार्यकाल की गूंज! डीएम सविन बंसल ने काम, संवेदनशीलता और सख्ती से छोड़ी अलग पहचान,,
“सिर्फ फाइलों के अधिकारी नहीं, जनता के भरोसे का चेहरा बने” — जनसुनवाई, त्वरित समाधान और जमीनी कार्यशैली ने दिलाई अलग पहचान,,
“अब सचिव नियोजन की नई जिम्मेदारी, लेकिन देहरादून याद रखेगा एक सक्रिय और संवेदनशील प्रशासक” — सख्ती और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन से बना प्रशासनिक मॉडल,,

देहरादून। प्रशासनिक सेवा में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जो सिर्फ अपनी जिम्मेदारियां निभाकर आगे नहीं बढ़ जाते, बल्कि अपने काम और कार्यशैली से एक ऐसी छाप छोड़ जाते हैं जो लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रहती है। देहरादून के जिलाधिकारी के रूप में सविन बंसल का कार्यकाल भी कुछ इसी तरह का माना जा रहा है। उनका कार्यकाल केवल सरकारी बैठकों और फाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन की समस्याओं के बीच जाकर समाधान तलाशने और प्रशासन को जनता के करीब लाने के प्रयासों के लिए विशेष रूप से चर्चा में रहा।
सविन बंसल की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि उन्होंने जन समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना। जनसुनवाई के दौरान लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर त्वरित समाधान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता रही। यही कारण रहा कि आम जनता के बीच उनकी पहचान केवल “डीएम साहब” तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक भरोसेमंद और जवाबदेह अधिकारी के रूप में भी बनी।
गरीब, जरूरतमंद और पीड़ित लोगों के प्रति उनका संवेदनशील रवैया भी लगातार चर्चा में रहा। कई मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए राहत पहुंचाने और शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने की पहल ने लोगों का विश्वास मजबूत किया। लोगों का मानना रहा कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति के साथ काम करे तो बदलाव संभव है और उनके कार्यकाल में यह कई बार देखने को मिला।
भूमाफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ उनकी सख्ती भी सुर्खियों में रही। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने और फर्जीवाड़ों पर कार्रवाई के कई मामलों में प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। इससे यह संदेश भी गया कि कानून से ऊपर कोई नहीं और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसके अलावा शहर की पुरानी समस्याओं जैसे ट्रैफिक व्यवस्था, अतिक्रमण और पार्किंग प्रबंधन को लेकर भी प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिली। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी कई प्रयास किए गए।
आपदा या आपात स्थितियों के दौरान भी सविन बंसल केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई मौकों पर स्वयं राहत कार्यों की निगरानी करते हुए नजर आए। यही एक जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासक की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
अब उन्हें सचिव नियोजन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन देहरादून में उनका कार्यकाल एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद किया जाएगा, जिसने प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदनाओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कुछ नाम केवल पद से नहीं, बल्कि अपने कार्यों से पहचान बनाते हैं — और सविन बंसल उन्हीं नामों में शामिल होते दिखाई देते हैं।



