मानसून से पहले सीएम धामी का बड़ा अल्टीमेटम! 15 नवंबर तक प्रदेश की हर सड़क होगी गड्ढा मुक्त, आपदा प्रबंधन में लापरवाही पर नहीं मिलेगी कोई राहत,, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और बीमारियों से निपटने की पूरी तैयारी के निर्देश; जिलाधिकारियों को गर्भवती महिलाओं से लेकर संवेदनशील गांवों तक की निगरानी का जिम्मा,, हरिद्वार में मनसा देवी पहाड़ी, रानीपुर मोड़ और लक्सर-खानपुर के जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष फोकस; डीएम मयूर दीक्षित ने मुख्यमंत्री को बताई तैयारियों की पूरी रिपोर्ट,,

मानसून से पहले सीएम धामी का बड़ा अल्टीमेटम! 15 नवंबर तक प्रदेश की हर सड़क होगी गड्ढा मुक्त, आपदा प्रबंधन में लापरवाही पर नहीं मिलेगी कोई राहत,,
बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और बीमारियों से निपटने की पूरी तैयारी के निर्देश; जिलाधिकारियों को गर्भवती महिलाओं से लेकर संवेदनशील गांवों तक की निगरानी का जिम्मा,,
हरिद्वार में मनसा देवी पहाड़ी, रानीपुर मोड़ और लक्सर-खानपुर के जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष फोकस; डीएम मयूर दीक्षित ने मुख्यमंत्री को बताई तैयारियों की पूरी रिपोर्ट,,
हरिद्वार, 09 जून 2026।
प्रदेश में मानसून के दस्तक देने से पहले मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
बैठक में प्रदेश के सभी जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए सभी विभाग समन्वित तरीके से कार्य करें। उन्होंने निर्देश दिए कि मानसून के बाद 15 नवंबर 2026 तक राज्य की सभी सड़कों को पूरी तरह गड्ढा मुक्त बनाया जाए। पिछले वर्ष आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जो कार्य अभी अधूरे हैं, उन्हें मानसून शुरू होने से पहले पूरा करने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने पुलों, कल्वर्टों और ड्रेनेज सिस्टम की विशेष जांच कर समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही सभी नालों और जल निकासी मार्गों की सफाई को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए ताकि बरसात के दौरान जलभराव की समस्या न उत्पन्न हो। उन्होंने डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा। जीवनरक्षक दवाओं, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जनपदों में गर्भवती महिलाओं की अद्यतन सूची नियमित रूप से अपडेट रखें। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर अस्पतालों के आसपास सुरक्षित ठहराने और जरूरत पड़ने पर हेली एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में भूस्खलन, बाढ़ और भू-कटाव प्रभावित क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में भूस्खलन संभावित स्थलों, नदी तटों, बाढ़ संभावित क्षेत्रों और भू-कटाव वाले इलाकों का अद्यतन मानचित्र तैयार किया जाए। साथ ही ऐसे गांवों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सूची तैयार की जाए जो आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
चारधाम यात्रा मार्ग सहित राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील स्थानों का नियमित भौतिक निरीक्षण किया जाए। जेसीबी, पोकलैंड, डंपर, क्रेन और अन्य मशीनरी को पहले से ही संवेदनशील स्थलों पर तैनात रखा जाए ताकि आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सके। जिन क्षेत्रों में मानसून के दौरान सड़कें बार-बार बाधित होती हैं, वहां वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक और सूचना बोर्ड लगाए जाएं। प्रत्येक तहसील में राहत एवं बचाव सामग्री का पर्याप्त भंडारण रखा जाए। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्षों के बीच 24 घंटे समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम संबंधी अलर्ट गांव स्तर तक तेजी से पहुंचाए जाएं और पर्यटकों व यात्रियों को समय पर मौसम की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मानसून से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जल निकासी व्यवस्था और यातायात संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिक्रमण हटाना प्राथमिकता में होना चाहिए। साथ ही विद्युत, पेयजल, दूरसंचार और सड़क जैसी आवश्यक सेवाएं बरसात के दौरान लंबे समय तक बाधित न हों, इसके लिए सभी विभाग विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। एसटीपी और पुलों के आसपास स्थित विद्युत लाइनों का सुरक्षा ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए गए।
हरिद्वार की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि लक्सर और खानपुर क्षेत्र के कुछ गांवों में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। ऐसे क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर लिया गया है तथा जल निकासी के लिए पंप सेट और अन्य आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।
डीएम ने बताया कि जनपद में की पहाड़ियों पर भूस्खलन की आशंका तथा भगत सिंह चौक और रानीपुर मोड़ पर जलभराव की समस्या प्रमुख रूप से सामने आती है। मनसा देवी हिल बाईपास ट्रीटमेंट के लिए स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जबकि भगत सिंह चौक और रानीपुर मोड़ के लिए ड्रेनेज प्लान तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी नालों और कल्वर्टों की सफाई के निर्देश संबंधित विभागों को जारी कर दिए गए हैं तथा आपदा जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ आर के सिंह, एसपी ट्रैफिक निशा यादव , एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा, डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह,सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि मानसून के दौरान जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से निर्वहन करे।



