CSC सेंटर और पेट्रोल पंप खातों को बना दिया साइबर ठगों का ‘काला गलियारा’! लक्सर पुलिस-सीआईयू ने किया बड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार,, इमोशनल ब्लैकमेल कर नकद रुपये लेते थे आरोपी, खातों में डालते थे साइबर ठगी का पैसा; खाता फ्रीज होने पर पीड़ितों को पता चलता था कि वे बन चुके हैं साइबर अपराध की चेन का हिस्सा,, SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर लक्सर पुलिस और CIU की संयुक्त कार्रवाई; मोबाइल से मिले QR कोड, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल सबूतों ने खोले कई राज, अन्य आरोपियों की तलाश जारी,,

CSC सेंटर और पेट्रोल पंप खातों को बना दिया साइबर ठगों का ‘काला गलियारा’! लक्सर पुलिस-सीआईयू ने किया बड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार,,
इमोशनल ब्लैकमेल कर नकद रुपये लेते थे आरोपी, खातों में डालते थे साइबर ठगी का पैसा; खाता फ्रीज होने पर पीड़ितों को पता चलता था कि वे बन चुके हैं साइबर अपराध की चेन का हिस्सा,,
SSP नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर लक्सर पुलिस और CIU की संयुक्त कार्रवाई; मोबाइल से मिले QR कोड, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल सबूतों ने खोले कई राज, अन्य आरोपियों की तलाश जारी,,
इन्तजार रज़ा, हरिद्वार…हरिद्वार जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत लक्सर पुलिस और सीआईयू रुड़की ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने ऑनलाइन ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया हुआ था। गिरोह भोले-भाले लोगों, CSC सेंटर संचालकों और छोटे कारोबारियों को भावनात्मक कहानियां सुनाकर अपने जाल में फंसाता था और बाद में उनके खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को सफेद बनाने के लिए करता था।
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से ₹1.48 लाख नकद और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। बरामद मोबाइल की जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जिन्होंने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अपने साथियों को CSC सेंटरों और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के QR कोड उपलब्ध कराते थे। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई APK फाइलों और अन्य साइबर तकनीकों के माध्यम से देशभर में ऑनलाइन ठगी की जाती थी। ठगी से प्राप्त रकम सीधे इन खातों में भेजी जाती थी ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
इसके बाद आरोपी संबंधित खातेधारकों से नकद रकम प्राप्त कर लेते थे और विभिन्न कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) के जरिए अपने नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों में रकम जमा कर देते थे। साइबर अपराध की दुनिया में इसे “लेयरिंग” कहा जाता है, जिसके माध्यम से पैसे की असली ट्रेल को तोड़ दिया जाता है और जांच एजेंसियों के लिए अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम दाबकी कला निवासी दो CSC संचालकों ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि कुछ लोगों ने कभी वाहन चालान तो कभी पिता के कैंसर के इलाज की मजबूरी बताकर उनसे नकद रकम ली और बदले में उनके खातों में ऑनलाइन माध्यम से धनराशि जमा कराई। उस समय उन्हें यह सामान्य लेन-देन लगा, लेकिन कुछ समय बाद उनके बैंक खाते फ्रीज हो गए।जब उन्होंने बैंक और संबंधित एजेंसियों से जानकारी ली तो पता चला कि उनके खातों में आई रकम साइबर ठगी से जुड़ी हुई थी और विभिन्न राज्यों से इसके संबंध में शिकायतें दर्ज थीं। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे अनजाने में साइबर अपराधियों के नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं।
घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कोशियारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और साइबर विश्लेषण के आधार पर जांच शुरू की। सीआईयू और साइबर सेल की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई और गुरुवार को लक्सर क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सहारनपुर जनपद के शाहपुर गांव निवासी अंकित चौहान और विशाल चौहान के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी हैं। उनके कब्जे से बरामद POCO मोबाइल फोन की जांच में व्हाट्सएप चैट, QR स्कैनर के स्क्रीनशॉट और कई संदिग्ध डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। पुलिस ने इन साक्ष्यों का मिलान शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराई गई सीसीटीवी फुटेज से किया, जिसमें आरोपियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई।
पुलिस का कहना है कि यह केवल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी का मामला नहीं है बल्कि एक बड़े साइबर नेटवर्क की कड़ी है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।
साइबर अलर्ट: ऐसे बनते हैं लोग ‘म्यूल अकाउंट’ का शिकार
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई अनजान व्यक्ति आपके खाते में रकम डालकर बदले में नकद मांगता है, QR कोड मांगता है या किसी बहाने आपके बैंक खाते का उपयोग करने की बात करता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
पुलिस की जनता से अपील
हरिद्वार पुलिस ने आम नागरिकों, CSC संचालकों, पेट्रोल पंप मालिकों और व्यापारियों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, QR कोड, स्कैनर या भुगतान प्रणाली का उपयोग न करने दें। यदि कोई व्यक्ति बीमारी, दुर्घटना, चालान या अन्य भावनात्मक बहाने बनाकर नकद लेन-देन की मांग करे तो उसकी पूरी पहचान सत्यापित करें और संदेह होने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि साइबर अपराधी अब केवल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही किसी भी व्यक्ति को साइबर अपराध की चेन का हिस्सा बना सकती है।



