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अतिक्रमण हटाओ अभियान पर घिरा यूपी सिंचाई विभाग! गरीब रेखा पर छोटे कब्जों पर सख्ती, बड़े अवैध निर्माणों पर खामोशी क्यों?,, कलियर में फिर चला बुलडोजर, लेकिन प्रभावशाली कब्जाधारियों तक नहीं पहुंची कार्रवाई; स्थानीय लोगों ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल,, दादुपुर-गोविंदपुर से बहादराबाद और कलियर तक सरकारी भूमि पर कब्जों की चर्चा तेज; पारदर्शी सर्वे और समान कार्रवाई की मांग हुई मुखर,,

फिलहाल कलियर से बहादराबाद तक एक ही सवाल चर्चा में है— क्या सरकारी भूमि पर बने सभी अवैध कब्जों के खिलाफ समान कार्रवाई होगी, या गरीबी रेखा पर अतिक्रमण हटाओ अभियान पर उठ रहे सवाल आगे भी बने रहेंगे?

अतिक्रमण हटाओ अभियान पर घिरा यूपी सिंचाई विभाग! गरीब रेखा पर छोटे कब्जों पर सख्ती, बड़े अवैध निर्माणों पर खामोशी क्यों?,,

कलियर में फिर चला बुलडोजर, लेकिन प्रभावशाली कब्जाधारियों तक नहीं पहुंची कार्रवाई; स्थानीय लोगों ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल,,

दादुपुर-गोविंदपुर से बहादराबाद और कलियर तक सरकारी भूमि पर कब्जों की चर्चा तेज; पारदर्शी सर्वे और समान कार्रवाई की मांग हुई मुखर,,

पिरान कलियर। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा कलियर-धनौरी क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। विभाग की टीम ने हाल ही में दूसरी बार अभियान चलाकर कई झोपड़ियों, अस्थायी दुकानों और छोटे कब्जों को हटाया, लेकिन कार्रवाई के बाद यह सवाल तेजी से उठने लगे हैं कि क्या अभियान का दायरा केवल कमजोर वर्ग तक ही सीमित है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि पर वर्षों से खड़े कई बड़े और पक्के निर्माण आज भी मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की चर्चाएं भी आम हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई की गति उतनी दिखाई नहीं देती जितनी छोटे और अस्थायी कब्जों के खिलाफ देखने को मिलती है। यही वजह है कि विभाग की कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कलियर, धनौरी, दादुपुर-गोविंदपुर रोड और बहादराबाद क्षेत्र में यूपी सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि को वास्तव में अतिक्रमण मुक्त कराना है तो विभाग को संपूर्ण क्षेत्र का निष्पक्ष सर्वे कराकर सभी प्रकार के अवैध कब्जों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है और किन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

लोगों का यह भी कहना है कि वर्षों से सरकारी भूमि पर बने कुछ बड़े निर्माणों को लेकर लगातार शिकायतें और चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे मामलों में यदि विभाग समान रूप से कार्रवाई करता है तो अभियान की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। अन्यथा यह धारणा बनती रहेगी कि कार्रवाई का बोझ केवल गरीब और कमजोर वर्ग पर ही पड़ रहा है।

क्षेत्र में यह मांग भी उठ रही है कि विभाग, प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम पूरे इलाके का आधुनिक तकनीक से सर्वे कराए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे। इससे सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि चाहे किसी के भी कब्जे में हो, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। यदि झोपड़ी अवैध है तो पक्का निर्माण भी नियमों से ऊपर नहीं हो सकता। इसलिए कार्रवाई का पैमाना व्यक्ति की आर्थिक या सामाजिक स्थिति नहीं, बल्कि भूमि की कानूनी स्थिति होनी चाहिए।

अब लोगों की निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जनता यह देखना चाहती है कि क्या आने वाले दिनों में बड़े और प्रभावशाली कब्जाधारियों के खिलाफ भी उतनी ही दृढ़ता दिखाई जाएगी, जितनी छोटे अतिक्रमणों को हटाने में दिखाई गई है।

फिलहाल कलियर से बहादराबाद तक एक ही सवाल चर्चा में है— क्या सरकारी भूमि पर बने सभी अवैध कब्जों के खिलाफ समान कार्रवाई होगी, या गरीबी रेखा पर अतिक्रमण हटाओ अभियान पर उठ रहे सवाल आगे भी बने रहेंगे?

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