नई महायोजना बनने तक पुराना मास्टरप्लान ही लागू रहेगा, शासन का बड़ा फैसला—शहरों के विकास और निर्माण पर फिलहाल पुराने नियमों की पकड़!……हरिद्वार समेत प्रमुख शहरों में फैसले पर नजर,, प्रदेश के विभिन्न शहरों में नई महायोजना तैयार होने तक पुराने मास्टरप्लान से ही होंगे विकास कार्य और नियोजन संबंधी फैसले, शासन के आदेश के बाद खत्म हुआ असमंजस—नई योजना आने तक पुराने प्रावधानों को ही माना जाएगा आधार

नई महायोजना बनने तक पुराना मास्टरप्लान ही लागू रहेगा, शासन का बड़ा फैसला—शहरों के विकास और निर्माण पर फिलहाल पुराने नियमों की पकड़!……हरिद्वार समेत प्रमुख शहरों में फैसले पर नजर,,
प्रदेश के विभिन्न शहरों में नई महायोजना तैयार होने तक पुराने मास्टरप्लान से ही होंगे विकास कार्य और नियोजन संबंधी फैसले, शासन के आदेश के बाद खत्म हुआ असमंजस—नई योजना आने तक पुराने प्रावधानों को ही माना जाएगा आधार
देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में मास्टरप्लान को लेकर लंबे समय से चल रहे असमंजस पर शासन ने फिलहाल विराम लगा दिया है। नई महायोजना/मास्टरप्लान तैयार होने तक संबंधित शहरों में पुराना मास्टरप्लान ही यथावत लागू रखने का आदेश जारी किया गया है। शासन के इस फैसले से उन शहरों में विकास कार्यों, भवन निर्माण और भूमि उपयोग से जुड़े मामलों को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद है।
शासन के आदेश के मुताबिक जिन शहरों के लिए नई महायोजना तैयार की जानी है, वहां नई योजना प्रभावी होने तक पुरानी महायोजना को ही आधार बनाया जाएगा। यानी नई योजना तैयार होने और उसके लागू होने के बीच की अवधि में नियोजन व्यवस्था को खाली नहीं छोड़ा जाएगा।
नई महायोजना का इंतजार, लेकिन पुराने नियमों से ही चलेगा शहरों का नियोजन
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच कई शहरों की पुरानी महायोजनाएं वर्तमान जरूरतों के मुकाबले पीछे छूटती नजर आती हैं। आबादी का विस्तार, नए आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियां, सड़क नेटवर्क और बदलती शहरी जरूरतों के कारण नई महायोजनाओं की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
ऐसे में नई महायोजना तैयार होने तक पुरानी योजना को जारी रखने का शासन का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित विभागों के सामने यह स्थिति स्पष्ट रहेगी कि नई महायोजना लागू होने तक भूमि उपयोग और नियोजन संबंधी कार्यवाही किस आधार पर की जानी है।
हरिद्वार समेत प्रमुख शहरों में फैसले पर नजर
शासन के इस आदेश का असर प्रदेश के उन शहरों पर भी पड़ेगा जहां नई महायोजना तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। खासतौर पर तेजी से विस्तार कर रहे शहरों में जमीन के इस्तेमाल, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास और निर्माण गतिविधियों से जुड़े मामलों में पुराने मास्टरप्लान की भूमिका बनी रहेगी।
फैसले के बाद अब निगाह इस बात पर होगी कि नई महायोजनाएं आखिर कब तक धरातल पर उतरती हैं। क्योंकि पुरानी योजनाओं को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर जारी रखने से तत्काल प्रशासनिक असमंजस जरूर कम होगा, लेकिन लंबे समय के लिए शहरों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई और व्यवहारिक महायोजना लागू करना ही बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
शासन का आदेश फिलहाल स्पष्ट संदेश देता है—नई महायोजना आने तक पुराना मास्टरप्लान ही शहरों के नियोजन की रीढ़ बना रहेगा।



