Daily Live Uttarakhand updateअपराधअपीलअफवाहअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तर प्रदेशउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंखुलासागिरफ्तारी

पांच साल पहले घर से गायब हुआ सुनील… अचानक चोरी के लैपटॉप के साथ रेलवे पुलिस हरिद्वार के हत्थे चढ़ा!…..तीन चोर, तीन वारदात… जीआरपी हरिद्वार का ट्रिपल एक्शन,, परिवार पांच साल से जिस बेटे को ढूंढ रहा था, वह मिला तो सही… लेकिन पुलिस की हथकड़ी में! जीआरपी की गिरफ्तारी ने खोल दी ‘लापता बेटे’ की रहस्यमयी कहानी

पांच साल पहले घर से गायब हुआ सुनील… अचानक चोरी के लैपटॉप के साथ रेलवे पुलिस हरिद्वार के हत्थे चढ़ा!…..तीन चोर, तीन वारदात… जीआरपी हरिद्वार का ट्रिपल एक्शन,,

परिवार पांच साल से जिस बेटे को ढूंढ रहा था, वह मिला तो सही… लेकिन पुलिस की हथकड़ी में! जीआरपी की गिरफ्तारी ने खोल दी ‘लापता बेटे’ की रहस्यमयी कहानी

हरिद्वार। पांच साल पहले एक बेटा घर से गायब हुआ… परिवार ने तलाश की, इंतजार किया और शायद वक्त के साथ उम्मीद भी कमजोर पड़ने लगी। फिर अचानक पांच साल बाद फोन की घंटी बजी—“आपका बेटा पुलिस की गिरफ्त में है।”

एक पल के लिए परिवार को लगा होगा कि आखिरकार उनका बेटा मिल गया। लेकिन अगले ही पल कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जैसे किसी फिल्म का क्लाइमेक्स सामने आ गया हो।

जिस सुनील कुमार की पांच साल से तलाश थी, वह हरिद्वार जीआरपी पुलिस को चोरी के लैपटॉप के साथ गिरफ्तार मिला।

बेटा मिला… मगर चोर के रूप में!

यह कहानी हरिद्वार जीआरपी के ऑपरेशन प्रहार के तहत हुई कार्रवाई के दौरान सामने आई, जिसने एक तरफ रेलवे यात्रियों से चोरी करने वाले आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया, तो दूसरी तरफ पांच साल से लापता एक व्यक्ति को उसके परिवार से दोबारा जोड़ दिया।

ट्रेन में सफर… आंख लगी और गायब हो गया बैग

कहानी शुरू होती है 11 सितंबर की रात से।

देहरादून से काठगोदाम जाने वाली ट्रेन में निहारिका पांडे सफर कर रही थीं। सफर के दौरान वह आराम करने लगीं। हरिद्वार पहुंचने पर जब उन्होंने अपना सामान संभाला तो अचानक होश उड़ गए।

पिट्ठू बैग गायब था।

बैग में लैपटॉप, घड़ी और अन्य सामान रखा हुआ था। ट्रेन में हुई इस चोरी की सूचना जीआरपी काठगोदाम को दी गई। वहां जीरो एफआईआर दर्ज हुई और मामला हरिद्वार जीआरपी तक पहुंचा।

हरिद्वार जीआरपी ने मुकदमा संख्या 65/2026 धारा 305(c)/317(2) बीएनएस के तहत दर्ज कर जांच शुरू की।

अब पुलिस के सामने चुनौती थी—ट्रेन के भीतर चोरी करने वाला आखिर कौन था?

कैमरों की आंख खुली… सुराग मिला और पीछा शुरू हुआ

रेलवे पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। तकनीकी साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की तलाश शुरू हुई।

जांच की कड़ियां धीरे-धीरे जुड़ती चली गईं।

फिर पुलिस टीम रायवाला-मोतीचूर क्षेत्र तक पहुंची।

15 सितंबर 2026।

फ्लाईओवर के बगल से गुजरने वाले कच्चे रास्ते पर पुलिस की नजर एक संदिग्ध पर पड़ी।

नाम—सुनील कुमार।

उम्र—45 वर्ष।

निवासी—बिटवाना, थाना मॉडल टाउन, रेवाड़ी, हरियाणा।

पुलिस ने उसे दबोच लिया।

तलाशी हुई तो कहानी का सबसे बड़ा सबूत हाथ लगा—

चोरी हुआ Lenovo ThinkPad लैपटॉप।

पुलिस के मुताबिक सुनील इस लैपटॉप को किसी राह चलते व्यक्ति को बेचने के लिए ले जा रहा था।

लेकिन पुलिस की जांच यहीं खत्म नहीं हुई।

नाम सामने आया तो पांच साल पुराना राज खुल गया

गिरफ्तारी के बाद जब सुनील की पहचान और उसके परिजनों की जानकारी पुलिस तक पहुंची, तो सामने आया कि वह करीब पांच साल से परिवार से लापता था।

बस यहीं से चोरी की यह कहानी अचानक एक दूसरी कहानी में बदल गई।

रेलवे पुलिस ने उसके घरवालों से संपर्क किया।

जिस परिवार ने पांच साल से बेटे की तलाश की थी, वहां अचानक खबर पहुंची—

“सुनील मिल गया है।”

लेकिन यह खबर पूरी नहीं थी।

अगला वाक्य शायद परिवार के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा होगा—

“वह चोरी के मामले में गिरफ्तार हुआ है।”

पांच साल बाद बेटे का पता चला तो घरवालों के लिए यह पल बेहद भावुक रहा। बेटा जिंदा और पुलिस की जानकारी में है, इसकी राहत थी… लेकिन उसके आरोपी के रूप में पकड़े जाने की खबर ने खुशी के साथ चिंता भी खड़ी कर दी।

जिस बेटे की वापसी का इंतजार था, उसकी वापसी का रास्ता जेल की तरफ जाता मिला।

एक तरफ खुशी के आंसू… दूसरी तरफ हथकड़ी

यह दृश्य किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था।

पांच साल से गायब बेटा अचानक मिल गया।

परिवार को उसका पता चला।

लेकिन मुलाकात की वजह कोई पारिवारिक समारोह नहीं था।

वजह थी—पुलिस गिरफ्तारी।

रेलवे पुलिस के अनुसार आरोपी को न्यायालय के आदेश पर जिला कारागार हरिद्वार भेज दिया गया।

यानी पांच साल से लापता सुनील की कहानी का एक अध्याय पुलिस की गिरफ्तारी के साथ सामने आया, जबकि उसके पांच साल के दौरान वह कहां रहा और उसके जीवन में क्या-क्या हुआ, यह सवाल अपनी जगह बना हुआ है।

तीन चोर, तीन वारदात… जीआरपी का ट्रिपल एक्शन

ऑपरेशन प्रहार में जीआरपी हरिद्वार को एक साथ तीन मामलों में सफलता मिली।

पहले मामले में दीपक उर्फ वंश, निवासी मुरादाबाद, को चोरी के ASUS लैपटॉप के साथ गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि 12 सितंबर को नंदा देवी एक्सप्रेस से हरिद्वार पहुंचे यात्री के पास से प्लेटफॉर्म नंबर एक पर लैपटॉप चोरी किया गया था। आरोपी को न्यायालय के आदेश पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

दूसरे मामले में रोहन उर्फ टेढ़ा, उम्र 21 वर्ष, निवासी जसोला, खतौली, मुजफ्फरनगर, को चोरी की काली स्प्लेंडर मोटरसाइकिल के साथ पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार मोटरसाइकिल रेलवे स्टेशन के टिकट घर के पीछे से चोरी हुई थी। सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक और सर्विलांस की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और मोटरसाइकिल उसके घर से बरामद की।

तीसरी गिरफ्तारी बनी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय—

सुनील कुमार।

उसके पास से चोरी गया Lenovo ThinkPad लैपटॉप बरामद हुआ। लेकिन उसके नाम के साथ जुड़ा पांच साल पुराना गुमशुदगी का अध्याय इस पूरे मामले को अलग बना गया।

रेलवे पुलिस की अपील—सफर में लापरवाही न करें

जीआरपी के मुताबिक चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के सोने या सामान के प्रति लापरवाही का फायदा उठाकर चोर पलक झपकते ही मोबाइल, लैपटॉप, बैग और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाते हैं।

इसलिए यात्रियों से अपील है कि सफर के दौरान कीमती सामान को सुरक्षित रखें और सोते समय विशेष सावधानी बरतें।

पुलिस अधीक्षक रेलवेज अरुणा भारती के नेतृत्व और सीओ जीआरपी अनुज के निर्देशन में हुई कार्रवाई में पुलिस टीमों ने तीन अलग-अलग मामलों का खुलासा किया।

पुलिस अधीक्षक रेलवेज अरुणा भारती ने कहा कि 

“ऑपरेशन प्रहार के तहत जीआरपी हरिद्वार ने तीन अलग-अलग चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और चोरी के दो लैपटॉप व एक मोटरसाइकिल बरामद की। यात्रियों की लापरवाही का फायदा उठाकर सामान चोरी करने वालों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सुनील कुमार की गिरफ्तारी के दौरान उसके पांच साल से गुमशुदा होने की जानकारी सामने आना इस मामले का भावनात्मक पहलू है। परिजनों को उसके मिलने की सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी और यात्रियों से सफर के दौरान अपने कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील है।”

लेकिन इन तीन खुलासों में सबसे ज्यादा चर्चा उस कहानी की है, जिसमें एक परिवार का पांच साल से लापता बेटा अचानक पुलिस रिकॉर्ड में चोरी के आरोपी के रूप में सामने आया।

पांच साल तक सवाल था—सुनील कहां है?

अब जवाब मिला है—

सुनील मिल गया।

मगर कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी भी वहीं खड़ा है—

इन पांच सालों में आखिर सुनील कहां था और उसकी जिंदगी किस रास्ते पर चली गई?

यह सवाल अब उसके परिवार के साथ-साथ इस पूरी रहस्यमयी कहानी को और गहरा बना रहा है।

Related Articles

Back to top button