उपनल कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत! सरकार को पहले न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश, हजारों परिवारों की उम्मीदें फिर जागीं….. “नियमितीकरण पर फैसला बाद में, पहले वेतन का हक दो” — नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के मामले में सरकार से किया साफ सवाल….. “वर्षों की सेवा के बाद भी असमंजस में कर्मचारी” — 9 जून की अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें, नियमितीकरण और वेतनमान को लेकर बढ़ी हलचल….

उपनल कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत! सरकार को पहले न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश, हजारों परिवारों की उम्मीदें फिर जागीं…..
“नियमितीकरण पर फैसला बाद में, पहले वेतन का हक दो” — नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के मामले में सरकार से किया साफ सवाल…..
“वर्षों की सेवा के बाद भी असमंजस में कर्मचारी” — 9 जून की अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें, नियमितीकरण और वेतनमान को लेकर बढ़ी हलचल….

देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड के हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए नैनीताल हाईकोर्ट से राहत की बड़ी उम्मीद जगी है। वर्षों से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतनमान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिया जाए।
यह मामला लंबे समय से उपनल कर्मचारियों और सरकार के बीच खिंचा चला आ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद सरकार ने न तो उनके नियमितीकरण पर ठोस निर्णय लिया और न ही उन्हें चयनित वेतनमान का लाभ दिया गया। इसी को लेकर कर्मचारियों की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस पूरे विषय को गंभीर माना और सरकार से पूछा कि जब कर्मचारी वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं तो उन्हें न्यूनतम वेतनमान का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि नियमितीकरण की प्रक्रिया अलग हो सकती है, लेकिन कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान मिलना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि उपनल कर्मचारियों के स्थान पर जो नई नियुक्तियां की जानी थीं, उन्हें फिलहाल वापस ले लिया गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यदि कर्मचारी अतिरिक्त मांगों पर जोर नहीं देंगे तो सरकार उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने को तैयार है।
वहीं उपनल संविदा कर्मचारी संघ की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2013 की नियमावली के तहत स्कंद पुष्प केंद्र में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को नियमित किया गया था। जब पहले इसी आधार पर नियमितीकरण हो चुका है, तो वर्तमान कर्मचारियों के मामले को बार-बार कैबिनेट में ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दिए जा रहे वेतन से जीएसटी कटौती की जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। संघ का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से कम वेतन में विभागों का काम संभाल रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अब तक स्पष्ट नीति नहीं बन पाई है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून को होगी। हाईकोर्ट के रुख के बाद उपनल कर्मचारियों में उम्मीद बढ़ गई है कि न्यूनतम वेतनमान के साथ नियमितीकरण की दिशा में भी कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के हजारों उपनल कर्मचारियों और उनके परिवारों की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।



