हरिद्वार पुलिस का बड़ा खुलासा: 50 लाख की बैंक ठगी का पर्दाफाश, फर्जी डेबिट कार्ड से निकाले रुपये, खरीदी ज्वेलरी, जमीन और स्कूटी,, ICICI बैंक मैनेजर की शिकायत पर कार्रवाई, महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, 13 लाख नकद, प्लॉट की रजिस्ट्री और स्कूटी बरामद,, फर्जी आधार कार्ड, फोन बैंकिंग और डेबिट कार्ड के जरिए करोड़ों वाली कंपनियों के खातों को बनाते थे निशाना, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी,,

हरिद्वार पुलिस का बड़ा खुलासा: 50 लाख की बैंक ठगी का पर्दाफाश, फर्जी डेबिट कार्ड से निकाले रुपये, खरीदी ज्वेलरी, जमीन और स्कूटी,,
ICICI बैंक मैनेजर की शिकायत पर कार्रवाई, महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, 13 लाख नकद, प्लॉट की रजिस्ट्री और स्कूटी बरामद,,
फर्जी आधार कार्ड, फोन बैंकिंग और डेबिट कार्ड के जरिए करोड़ों वाली कंपनियों के खातों को बनाते थे निशाना, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी,,
हरिद्वार। एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस ने एक बेहद संगठित बैंक फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 50 लाख रुपये की संदिग्ध बैंक धोखाधड़ी के मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, फोन बैंकिंग और डेबिट कार्ड की मदद से खाताधारक की जानकारी के बिना लाखों रुपये निकालकर ज्वेलरी खरीदी, जमीन खरीदी और स्कूटी तक खरीद डाली।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 लाख रुपये नकद, एक प्लॉट की रजिस्ट्री, एक स्कूटी, फर्जी दस्तावेज, कई मोबाइल फोन और आकाश सिन्हा के नाम का डेबिट कार्ड बरामद किया है। मामले में अब गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है।पुलिस के अनुसार ICICI बैंक, पुराना रानीपुर मोड़ हरिद्वार के शाखा प्रबंधक अपूर्व दुबे ने 8 अक्टूबर 2025 को कोतवाली नगर हरिद्वार में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि बैंक की एक शाखा में संचालित खाते से पिछले एक माह में लगभग 50 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुए हैं। जब बैंक ने खाताधारक से संपर्क किया तो उसने बताया कि इतनी बड़ी निकासी उसकी जानकारी और अनुमति के बिना हुई है।
शिकायत के आधार पर कोतवाली नगर में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। विवेचना के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए, जिनके आधार पर पुलिस ने लगातार निगरानी की।
18 जुलाई 2026 को पुलिस टीम को संदिग्ध मोबाइल नंबर की लोकेशन भगवानपुर क्षेत्र में मिली। पुलिस ने सिसौना और रायपुर क्षेत्र में दबिश दी लेकिन आरोपी हाथ नहीं आए। इसके बाद पुलिस टीम ने दोबारा प्रयास करते हुए मंडावर क्षेत्र के खेड़ी शिकोहरपुर के पास हाईवे से करीब 150 मीटर अंदर खेत के किनारे एक नीले रंग की स्कूटी खड़ी देखी। वहां दो पुरुष और एक महिला आपस में बातचीत कर रहे थे। पुलिस को देखकर तीनों भागने लगे लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही दबोच लिया।
पूछताछ में महिला ने अपनी पहचान संगीता देवी के रूप में बताई। उसके पास से 3 लाख रुपये नकद, दो आधार कार्ड, आकाश सिन्हा के नाम का ICICI बैंक का डेबिट कार्ड, दो मोबाइल फोन और डेबिट कार्ड आवेदन पत्र बरामद हुआ। वहीं अपेन्दर कुमार सहगल के कब्जे से 4 लाख रुपये नकद और ओप्पो मोबाइल, जबकि रीनू कुमार उर्फ सोनू के पास से 6 लाख रुपये नकद, सैमसंग मोबाइल और आधार कार्ड बरामद किया गया।
पूछताछ में सामने आया कि संगीता देवी ने सोनू के कहने पर जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान देहरादून, रुड़की और दिल्ली में लगभग 35 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी थी, जिसे बाद में सोनू को सौंप दिया गया। इसी डेबिट कार्ड से भगवानपुर के एटीएम से नकदी भी निकाली गई और रकम को आपस में बांट लिया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जब पहला डेबिट कार्ड बंद हो गया तो आरोपियों ने फोन बैंकिंग के जरिए आकाश सिन्हा के नाम से नया डेबिट कार्ड जारी करा लिया। पुलिस के अनुसार गिरोह ने बैंक की सुरक्षा प्रणाली और कस्टमर केयर प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाकर पूरी साजिश को अंजाम दिया।
आरोपी अपेन्दर कुमार सहगल ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने CASEHFREE PAYMENTS INDIA PRIVATE LIMITED की अकाउंट डिटेल उपलब्ध कराई थी। इसके बाद सोनू कुमार ने फोन बैंकिंग के जरिए कंपनी के खाते से जुड़ी ई-मेल आईडी बदलवाई और उसी के आधार पर नया डेबिट कार्ड हासिल कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों की स्कूटी की तलाशी ली तो उसमें से 12 लाख रुपये में खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री बरामद हुई। पूछताछ में पता चला कि ज्वेलरी बेचकर मिले पैसों से यह जमीन संगीता देवी के नाम खरीदी गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह केवल एक खाते तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार आरोपियों के निशाने पर कई बड़ी कंपनियों के बैंक खाते भी थे। इनमें कीप से इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड, गैलेक्सी इलेक्ट्रिकल वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, बजाज इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, होंडा केयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ऑटोमेटिक मैन्युफैक्चरर प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल थीं। गिरोह पहले ऐसे खातों की जानकारी जुटाता था जिनमें करोड़ों रुपये का लेन-देन होता था और फिर फर्जी दस्तावेजों तथा फोन बैंकिंग की मदद से डेबिट कार्ड हासिल कर रकम निकाल लेता था।
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि उपेंद्र कुमार और सोनू कुमार वर्ष 2022 में बेहट थाने से एटीएम फ्रॉड के मामले में जेल जा चुके हैं, जबकि सोनू कुमार वर्ष 2013 में सहसपुर के चर्चित हत्याकांड में भी जेल जा चुका है। इससे साफ है कि आरोपी पेशेवर अपराधी हैं और लंबे समय से संगठित आर्थिक अपराधों में सक्रिय रहे हैं।
मामले में विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में कई अन्य धाराओं की भी बढ़ोतरी की है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। वहीं हरिद्वार पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।
एसएसपी नवनीत सिंह के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा, उपनिरीक्षक ऋषिकांत पटवाल, उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार, हेड कांस्टेबल संजीव राणा, कांस्टेबल आनंद तोमर, महिला कांस्टेबल शोभा और सीआईयू के कांस्टेबल वसीम की टीम ने इस हाईटेक बैंक फ्रॉड का खुलासा कर आर्थिक अपराधियों पर बड़ा शिकंजा कस दिया है।



