पिरान कलियर दरगाह क्षैत्र के एक दुकान के ठेके और कथित अतिरिक्त तुगलकी आदेश पर बड़ा विवाद: मानवाधिकार आयोग पहुंची शिकायत, टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल,, भदौरिया अधिवक्ताओं ने उठाए नियमों के उल्लंघन के आरोप, सीरमाल-अफ्लातून ठेके की निष्पक्ष जांच, नई टेंडर प्रक्रिया और कथित अवैध दुकानों पर कार्रवाई की मांग
गरीब दुकानदारों की शिकायतों की आखिर क्यों हुई अनदेखी? निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था की मांग तेज

पिरान कलियर दरगाह क्षैत्र के एक दुकान के ठेके और कथित अतिरिक्त तुगलकी आदेश पर बड़ा विवाद: मानवाधिकार आयोग पहुंची शिकायत, टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल,,
भदौरिया अधिवक्ताओं ने उठाए नियमों के उल्लंघन के आरोप, सीरमाल-अफ्लातून ठेके की निष्पक्ष जांच, नई टेंडर प्रक्रिया और कथित अवैध दुकानों पर कार्रवाई की मांग
हरिद्वार/पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर दरगाह शरीफ में ठेकों के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। दरगाह में सोहन हलवा, हलवा-परांठा, सीरमाल और अफ्लातून से जुड़े ठेकों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया, अधिवक्ता कमल भदौरिया और एलएलबी छात्र चेतन भदौरिया ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हुए और दरगाह तथा सरकार के राजस्व को नुकसान होने की आशंका पैदा हुई।
भदौरिया अधिवक्ताओं ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया
शिकायतकर्ता अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया और अधिवक्ता कमल भदौरिया का कहना है कि पिरान कलियर दरगाह जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक संस्था में ठेकों का आवंटन पूरी पारदर्शिता और कानून के अनुसार होना चाहिए। उनका आरोप है कि निर्धारित विज्ञप्ति से अलग जाकर सीरमाल और अफ्लातून के कार्य को कथित रूप से उसी ठेके में शामिल किया गया, जबकि इसके लिए अलग से सार्वजनिक टेंडर जारी नहीं किया गया।भदौरिया अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि किसी नए कार्य का आवंटन किया जाना था तो उसके लिए अलग निविदा आमंत्रित कर सभी इच्छुक लोगों को समान अवसर दिया जाना चाहिए था। उनका दावा है कि ऐसा न होने से निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
गरीब दुकानदारों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्थानीय गरीब दुकानदारों और व्यापारियों ने इस संबंध में कई बार प्रशासन के समक्ष शिकायती प्रार्थना-पत्र दिए, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि समय रहते इन शिकायतों पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाता तो विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
राजस्व हानि और नियमों के उल्लंघन का दावा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बिना अलग निविदा जारी किए अतिरिक्त कार्य देने से दरगाह और राज्य सरकार को राजस्व हानि होने की संभावना है। उनका यह भी आरोप है कि यदि सभी कार्यों के लिए खुली और प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती तो अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था।
कथित अवैध दुकानों की भी जांच की मांग
मानवाधिकार आयोग को दिए गए आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक दुकान के आवंटन की आड़ में कथित रूप से कई अन्य दुकानें संचालित की जा रही हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इन दुकानों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि अनियमितता मिले तो नियमित आवंटन प्रक्रिया अपनाई जाए।
मानवाधिकार आयोग से तीन प्रमुख मांगें
भदौरिया अधिवक्ताओं ने आयोग से मांग की है कि—
- सीरमाल और अफ्लातून से जुड़े कथित अतिरिक्त आवंटन की जांच कर आवश्यक होने पर उसे निरस्त किया जाए।
- नई सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी कर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए।
- कथित अवैध दुकानों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि दरगाह और सरकार को राजस्व का नुकसान न हो।
दरगाह की गरिमा और पारदर्शिता बनाए रखने की अपील
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पिरान कलियर दरगाह देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीनों की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां होने वाले सभी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के अनुरूप होने चाहिए, ताकि आम लोगों का विश्वास कायम रहे।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
भदौरिया अधिवक्ताओं ने मानवाधिकार आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित प्रशासन, वक्फ बोर्ड अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी के आधिकारिक पक्ष और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



