ठेका/फ्रेंचाइजी और तुगलकी आदेश के बाद अब दरगाह परिसर में फिर गरमाया अवैध कब्जे का मामला: सिदरी के बाहर खड़ा हुआ लोहे का ढांचा, उठे कई गंभीर सवाल,, सार्वजनिक स्थान पर स्ट्रक्चर बनने से मचा हड़कंप, दरगाह प्रबंधन की चुप्पी पर गहराया विवाद,, बिना अनुमति हुआ निर्माण या मिली मौन स्वीकृति? जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल,, अवैध कब्जे की एक परत चढ़ी

ठेका/फ्रेंचाइजी और तुगलकी आदेश के बाद अब दरगाह परिसर में फिर गरमाया अवैध कब्जे का मामला: सिदरी के बाहर खड़ा हुआ लोहे का ढांचा, उठे कई गंभीर सवाल,,
सार्वजनिक स्थान पर स्ट्रक्चर बनने से मचा हड़कंप, दरगाह प्रबंधन की चुप्पी पर गहराया विवाद,,
बिना अनुमति हुआ निर्माण या मिली मौन स्वीकृति? जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल,, अवैध कब्जे की एक परत चढ़ी
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में एक बार फिर निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सिदरी के बाहर टीनशेड लगाने के नाम पर लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा किए जाने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सार्वजनिक स्थान पर तैयार किए गए इस ढांचे को लेकर स्थानीय लोगों और जायरीन के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह निर्माण किसकी अनुमति से हुआ और इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी?
दरगाह कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबी व्यवस्था होने के बावजूद निर्माण कार्य पर किसी की नजर नहीं पड़ना कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि निर्माण वैध था तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं दी गई, और यदि अवैध था तो इसे तत्काल रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी जिम्मेदार अधिकारी के पास दिखाई नहीं दे रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का निर्माण नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। यदि बिना स्पष्ट अनुमति के स्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है तो भविष्य में अतिक्रमण को बढ़ावा मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का मानना है कि छोटे स्तर से शुरू होने वाले ऐसे निर्माण आगे चलकर स्थायी कब्ज़े का रूप ले लेते हैं।
दरगाह प्रबंधन की चुप्पी ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह निर्माण हुआ और जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं। यदि निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए है तो इसकी आधिकारिक स्वीकृति और योजना सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन, वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रबंधन पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सिदरी के बाहर खड़ा यह लोहे का ढांचा सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि दरगाह प्रबंधन की कार्यशैली और जवाबदेही पर खड़े हो रहे बड़े सवालों का प्रतीक बन गया है।



