जेल रिटर्न और निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का ‘इस्तीफा ट्रम्प कार्ड’! छात्र आंदोलन की आड़ में खुद को हीरो बनाने की कोशिश पर पुलिस का पलटवार,, आईजी कुमाऊं का बड़ा खुलासा— 28 जून से था अनधिकृत रूप से गायब, पहले ही हो चुका था निलंबन; गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ संगठित अपराध के मामले में जेल भी जा चुका है शेर सिंह,, वायरल वीडियो पर पुलिस का सख्त रुख, विभागीय कार्रवाई के साथ वैधानिक कार्रवाई भी होगी; तथ्यों के आधार पर होगी पूरी जांच

जेल रिटर्न और निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का ‘इस्तीफा ट्रम्प कार्ड’! छात्र आंदोलन की आड़ में खुद को हीरो बनाने की कोशिश पर पुलिस का पलटवार,,
आईजी कुमाऊं का बड़ा खुलासा— 28 जून से था अनधिकृत रूप से गायब, पहले ही हो चुका था निलंबन; गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ संगठित अपराध के मामले में जेल भी जा चुका है शेर सिंह,,
वायरल वीडियो पर पुलिस का सख्त रुख, विभागीय कार्रवाई के साथ वैधानिक कार्रवाई भी होगी; तथ्यों के आधार पर होगी पूरी जांच
देहरादून। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह के कथित इस्तीफे वाले वीडियो के बाद उत्तराखंड पुलिस ने पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। आईजी कुमाऊं रेंज निवेदिता कुकरेती ने शेर सिंह के विभागीय और आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि वायरल वीडियो में दिए गए बयान तथ्यों से परे हैं और उसके खिलाफ पहले से ही विभागीय कार्रवाई चल रही थी। अब वायरल वीडियो में दिए गए कथित भड़काऊ और अनर्गल बयानों के संबंध में भी आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
आईजी कुमाऊं के अनुसार शेर सिंह 28 जून 2026 से बिना अनुमति जनपद पिथौरागढ़ से अनुपस्थित था। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ की ओर से उसे नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय में उसका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को उसे विधिवत निलंबित कर दिया गया। यानी सोशल मीडिया पर वायरल कथित इस्तीफे से पहले ही विभाग उसके खिलाफ कार्रवाई कर चुका था।
आईजी निवेदिता कुकरेती ने यह भी बताया कि शेर सिंह का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस के अनुसार वह अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर कथित रूप से कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के नेटवर्क से जुड़ा था और भोले-भाले लोगों को डराकर उनकी जमीनों पर कब्जा करने जैसे संगठित अपराधों में शामिल रहा। इस मामले में एफआईआर संख्या 415/2025 जनपद पिथौरागढ़ में दर्ज की गई थी।
पुलिस के मुताबिक 9 सितंबर 2025 को शेर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां वह कई महीनों तक निरुद्ध रहा। बाद में वह जमानत पर बाहर आया। विभागीय स्तर पर उसके विरुद्ध सेवा से बर्खास्तगी (डिस्मिसल) की प्रक्रिया भी पहले से चल रही थी।
इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में शेर सिंह स्वयं को व्यवस्था का पीड़ित बताते हुए छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों पर बयान देता दिखाई दे रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी भी वायरल वीडियो या व्यक्तिगत दावे के बजाय तथ्य, अभिलेख और कानूनी प्रक्रिया ही अंतिम आधार होंगे। विभाग का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अनुशासनहीनता, भड़काऊ बयानबाजी या सेवा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आईजी कुमाऊं ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की जांच रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुरूप की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की आवश्यकता है और मामले में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।



