हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी प्रबंधन से 15 दिन में मांगा जवाब,, महिला शिक्षिका ने फर्जी डिग्री के नाम पर उत्पीड़न, मानसिक शोषण और अवैध विभागीय कार्रवाई के लगाए गंभीर आरोप,, विवादित कॉलेज प्रबंधन पर पहले से फर्जी नियुक्तियों और अन्य अनियमितताओं के आरोप, अब हाईकोर्ट की निगरानी में बढ़ी जांच की रफ्तार

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी प्रबंधन से 15 दिन में मांगा जवाब,,
महिला शिक्षिका ने फर्जी डिग्री के नाम पर उत्पीड़न, मानसिक शोषण और अवैध विभागीय कार्रवाई के लगाए गंभीर आरोप,,
विवादित कॉलेज प्रबंधन पर पहले से फर्जी नियुक्तियों और अन्य अनियमितताओं के आरोप, अब हाईकोर्ट की निगरानी में बढ़ी जांच की रफ्तार
हरिद्वार। लंबे समय से विवादों और कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चाओं में रहे नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी का एक और मामला अब प्रशासनिक और कानूनी जांच के केंद्र में आ गया है। महिला शिक्षिका रेनू कुमारी द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के कुछ ही घंटों बाद शिक्षा विभाग ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण में 15 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण, संबंधित अभिलेख और जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार की ओर से जारी पत्र में कॉलेज प्रबंधन को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि शिक्षिका के शैक्षिक प्रमाण-पत्रों के सत्यापन, विभागीय कार्रवाई तथा जांच प्रक्रिया से जुड़े सभी अभिलेख निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होगा।पूरा मामला उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब महिला शिक्षिका रेनू कुमारी ने विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत के माध्यम से उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ के समक्ष सुनवाई होने के बाद शिक्षा विभाग की तत्काल सक्रियता ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी।
रेनू कुमारी का आरोप है कि उनके शैक्षिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन वर्षों पहले ही कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य बिजेंद्र कुमार द्वारा सक्षम स्तर से कराया जा चुका था। इसके बावजूद प्रबंधन ने फर्जी डिग्री का मुद्दा उठाकर उनके खिलाफ विभागीय जांच और एसआईटी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी, जबकि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। उनका कहना है कि उन्हें लगातार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
महिला शिक्षिका ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 में कॉलेज में हुई कथित फर्जी नियुक्तियों का विरोध करने और उसमें सहयोग न देने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने कॉलेज प्रबंधक आदेश कुमार पर पैसों की मांग करने तथा दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
गौरतलब है कि नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी का नाम इससे पहले भी फर्जी नियुक्तियों, कथित फर्जी प्रबंध समिति, सरकारी एवं ग्राम समाज की भूमि से जुड़े विवादों सहित कई मामलों में चर्चा में रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट की दखल के बाद शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज प्रबंधन से जवाब तलब किए जाने को पूरे मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कॉलेज प्रबंधन शिक्षा विभाग को क्या जवाब देता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि जांच में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर, यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। फिलहाल यह मामला शिक्षा विभाग और न्यायालय, दोनों के स्तर पर गंभीरता से विचाराधीन है।



