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हरिद्वार में मदरसों की मान्यता पर बड़ा अभियान: बिना मान्यता संचालित संस्थानों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई,, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने अधिकारियों और मदरसा संचालकों के साथ की महत्वपूर्ण बैठक, सभी पात्र मदरसों का पंजीकरण कराने के दिए निर्देश,, जनपद के 271 मदरसों में केवल 47 ने किया आवेदन, 5 को मिली मान्यता; बंद मदरसों के विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने पर भी दिया जोर,,

जनपद के 271 मदरसों में केवल 47 ने किया आवेदन, 5 को मिली मान्यता; बंद मदरसों के विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने पर भी दिया जोर,,

हरिद्वार में मदरसों की मान्यता पर बड़ा अभियान: बिना मान्यता संचालित संस्थानों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई,,

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने अधिकारियों और मदरसा संचालकों के साथ की महत्वपूर्ण बैठक, सभी पात्र मदरसों का पंजीकरण कराने के दिए निर्देश,,

जनपद के 271 मदरसों में केवल 47 ने किया आवेदन, 5 को मिली मान्यता; बंद मदरसों के विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने पर भी दिया जोर,,

हरिद्वार, 28 जुलाई। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में संचालित प्रत्येक मदरसे का शासन द्वारा निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप पंजीकरण एवं मान्यता होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बिना मान्यता किसी भी मदरसे का संचालन स्वीकार्य नहीं होगा और यदि कोई संस्था नियमों की अनदेखी करते हुए शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करती पाई गई तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों तथा जनपद के विभिन्न मदरसा संचालकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में संचालित मदरसों की मान्यता प्रक्रिया को गति देना तथा संचालकों को शासन द्वारा निर्धारित नियमों की जानकारी देना था।

बैठक से पूर्व हरिद्वार आगमन पर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुबोध शर्मा तथा जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अभिषेक शुक्ला ने पुष्पगुच्छ भेंट कर डॉ. गांधी का स्वागत किया। इसके बाद जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में मदरसा संचालकों को मान्यता प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और शासन के दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी गई।

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रत्येक मदरसे का पंजीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त संस्थानों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर कार्य किया जा सकता है और इससे विद्यार्थियों के भविष्य को भी मजबूती मिलेगी।उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित सभी मदरसों के संचालकों से नियमित समन्वय स्थापित किया जाए। साथ ही उन्हें मान्यता प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि सभी पात्र मदरसे निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण करा सकें।

डॉ. गांधी ने मदरसा संचालकों से भी अपील करते हुए कहा कि वे शासन द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन करते हुए आवश्यक अभिलेखों के साथ शिक्षा विभाग के माध्यम से आवेदन करें। उन्होंने कहा कि समय रहते मान्यता प्राप्त कर लेने से भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मदरसों का संचालन बंद हो चुका है, वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्हें निकटवर्ती सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए और प्रशासन इस दिशा में आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।

बैठक के दौरान डॉ. गांधी ने दो टूक कहा कि बिना मान्यता के किसी भी मदरसे में शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई संस्था शासन के नियमों की अनदेखी करते हुए बिना मान्यता के मदरसा संचालित करती पाई जाती है तो उसके विरुद्ध संबंधित प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अभिषेक शुक्ला ने जनपद में मदरसों की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि हरिद्वार जिले में कुल 271 मदरसे संचालित हैं। इनमें से अब तक 47 मदरसों ने पंजीकरण एवं मान्यता के लिए आवेदन किया है। उन्होंने बताया कि इनमें से 5 मदरसों को मान्यता प्रदान की जा चुकी है, जबकि 18 आवेदनों पर 29 जुलाई को विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 24 आवेदनों की प्रक्रिया गतिमान है, जिनका स्थलीय निरीक्षण किया जाना शेष है। निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों की पूर्ति पाए जाने पर ही संबंधित मदरसों को मान्यता प्रदान की जाएगी।

अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुबोध शर्मा ने बैठक में पंजीकरण प्रक्रिया, आवेदन की विधि, आवश्यक दस्तावेजों तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मदरसा संचालकों की ओर से पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें समय पर आवेदन करने और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने की सलाह दी।

बैठक में उपस्थित मदरसा संचालकों ने भी मान्यता प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव और जिज्ञासाएं रखीं, जिनका अधिकारियों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी पात्र संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में चंद्र प्रकाश सिंह रावत, निधि रावत, जितेंद्र कुमार भट्ट, अरुण कुमार, संदीप चौधरी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी, संबंधित विभागों के प्रतिनिधि तथा जनपद के विभिन्न मदरसों के संचालक उपस्थित रहे।

बैठक के माध्यम से प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि जनपद में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया को अब तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। शासन के निर्देशों के अनुरूप सभी पात्र मदरसों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के साथ-साथ बिना मान्यता संचालित संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बंद हो चुके मदरसों के बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए उन्हें निकटवर्ती शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

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