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साइबर ठगों पर एसटीएफ का बड़ा प्रहार: 1930 हेल्पलाइन की फुर्ती से ₹1.45 करोड़ की रकम बचाई गई,, ई-सिम के नाम पर ₹1.51 करोड़ की ठगी का प्रयास, त्वरित कार्रवाई से करोड़ों रुपये फ्रीज कर अपराधियों की साजिश नाकाम,, जुलाई में एक महीने से भी कम समय में 1930 कंट्रोल रूम ने लगभग ₹4 करोड़ की साइबर ठगी की रकम कराई सुरक्षित, जनता से सतर्क रहने की अपील,,

साइबर ठगों पर एसटीएफ का बड़ा प्रहार: 1930 हेल्पलाइन की फुर्ती से ₹1.45 करोड़ की रकम बचाई गई,,

ई-सिम के नाम पर ₹1.51 करोड़ की ठगी का प्रयास, त्वरित कार्रवाई से करोड़ों रुपये फ्रीज कर अपराधियों की साजिश नाकाम,,

जुलाई में एक महीने से भी कम समय में 1930 कंट्रोल रूम ने लगभग ₹4 करोड़ की साइबर ठगी की रकम कराई सुरक्षित, जनता से सतर्क रहने की अपील,,

देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पीड़ित के ₹1.45 करोड़ से अधिक की रकम बचाकर बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय वित्तीय साइबर हेल्पलाइन 1930 की त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय रहते शिकायत दर्ज कराने पर साइबर ठगी से होने वाले भारी नुकसान को रोका जा सकता है। एसटीएफ लगातार साइबर ठगों के नेटवर्क पर शिकंजा कस रही है और ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है।

एसटीएफ द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 27 जुलाई 2026 को ऊधमसिंहनगर जनपद के दिनेशपुर निवासी स्वरूप सिंह ने राष्ट्रीय वित्तीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने बैंकिंग आईडी दोबारा सक्रिय कराने और ई-सिम जारी कराने का झांसा देकर उनके साथ ₹1,51,06,100 की बड़ी साइबर ठगी कर ली।

शिकायत मिलते ही 1930 कंट्रोल रूम में तैनात विशेषज्ञ टीम हरकत में आ गई। संबंधित बैंकों और अन्य एजेंसियों से तत्काल समन्वय स्थापित किया गया और तेजी से कार्रवाई करते हुए पीड़ित की ₹1,45,82,750 की धनराशि समय रहते होल्ड (फ्रीज) करा दी गई। इस त्वरित कार्रवाई से करोड़ों रुपये साइबर ठगों के हाथों में जाने से बच गए। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायत दर्ज कराने में देरी होती तो इतनी बड़ी रकम वापस सुरक्षित कराना बेहद कठिन हो सकता था।

एसटीएफ के अनुसार वर्ष 2026 के जुलाई माह में एक महीने से भी कम अवधि के भीतर 1930 राष्ट्रीय वित्तीय साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से प्रदेशभर के साइबर अपराध पीड़ितों के लगभग ₹4 करोड़ सुरक्षित कराए जा चुके हैं। यह उपलब्धि साइबर अपराध के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस की सक्रियता और त्वरित प्रतिक्रिया का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी, पिन या यूपीआई पिन साझा न करें। किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता किराये या कमीशन पर किसी अन्य को उपयोग के लिए देना भी गंभीर अपराध है। यदि किसी अज्ञात स्रोत से खाते में धनराशि आती है तो इसकी सूचना तुरंत बैंक या पुलिस को दें।

एसटीएफ ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस, सीबीआई, ईडी अधिकारी बनकर डराने वाले साइबर ठगों, वीडियो कॉल के माध्यम से ब्लैकमेल करने वाले गिरोहों और अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराने वाले फर्जी प्लेटफॉर्म से भी सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती।

एसटीएफ ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी कस्टमर केयर नंबर के लिए गूगल सर्च पर आंख बंद कर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी जांच कर लें। यदि किसी व्यक्ति के साथ वित्तीय साइबर अपराध होता है तो वह बिना समय गंवाए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करे या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस अथवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क करे। समय पर उठाया गया एक कदम करोड़ों रुपये की मेहनत की कमाई को बचा सकता है।

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