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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी की हत्या संबंधी फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप,, सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता, पोस्ट हटने के बाद भी उठ रहे कई सवाल,, आरोपी युवक की पहचान, पोस्ट के स्रोत और मंशा की जांच तेज, अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी की हत्या संबंधी फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप,,

सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता, पोस्ट हटने के बाद भी उठ रहे कई सवाल,,

आरोपी युवक की पहचान, पोस्ट के स्रोत और मंशा की जांच तेज, अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी की कथित हत्या से जुड़ी एक फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रविवार को हरिद्वार में हड़कंप मच गया। पोस्ट में श्रीमहंत रविंद्र पुरी की हत्या का दावा किया गया था, जिससे कुछ समय के लिए भ्रम और चिंता का माहौल बन गया। हालांकि बाद में संबंधित फेसबुक पोस्ट हटा दी गई, लेकिन उसका स्क्रीनशॉट तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हो गया।

जानकारी के अनुसार, पोस्ट सामने आते ही श्रद्धालुओं, संत समाज और स्थानीय लोगों के बीच हलचल बढ़ गई। कई लोगों ने इसकी सत्यता जानने के लिए एक-दूसरे से संपर्क किया, जबकि पुलिस और संबंधित एजेंसियां भी तुरंत सक्रिय हो गईं। शुरुआती जांच में पता चला कि पोस्ट में किया गया दावा पूरी तरह भ्रामक था और श्रीमहंत रविंद्र पुरी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सूत्रों के मुताबिक अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह पोस्ट किसने और किस उद्देश्य से डाली। साथ ही यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि आरोपी युवक को ऐसी झूठी और संवेदनशील जानकारी कहां से मिली। पोस्ट हटाए जाने के बावजूद उसका स्क्रीनशॉट लगातार वायरल होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रामक और संवेदनशील पोस्ट समाज में भ्रम फैलाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगाड़ सकती हैं। इसलिए मामले की गहन जांच की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर अफवाह फैलाने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की मंशा सामने आती है तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

संत समाज से जुड़े लोगों ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि धार्मिक हस्तियों के संबंध में बिना सत्यापन के इस प्रकार की झूठी खबरें प्रसारित करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें और अफवाहों से बचें।

फिलहाल पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट के तकनीकी पहलुओं और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही वायरल स्क्रीनशॉट के जरिए पोस्ट को अधिक से अधिक प्रसारित करने वाले लोगों की भी पड़ताल की जा रही है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें तथा सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें।

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