मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद हरिद्वार से उठी मांग: वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए मौहम्मद सलीम घिस्सुपुरा को मिले राज्य स्तरीय सम्मान,, पथरी रेंज में एक दशक से निस्वार्थ सेवा, गर्मियों में वन्यजीवों के लिए जलस्रोतों की व्यवस्था से लेकर रेस्क्यू और जागरूकता अभियान तक मौहम्मद सलीम घिस्सुपुरा ने निभाई अहम भूमिका,, स्थानीय लोगों ने कहा— मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप जमीनी स्तर पर काम करने वाले पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं का हो निष्पक्ष मूल्यांकन,,

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद हरिद्वार से उठी मांग: वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए मौहम्मद सलीम घिस्सुपुरा को मिले राज्य स्तरीय सम्मान,,
पथरी रेंज में एक दशक से निस्वार्थ सेवा, गर्मियों में वन्यजीवों के लिए जलस्रोतों की व्यवस्था से लेकर रेस्क्यू और जागरूकता अभियान तक मौहम्मद सलीम घिस्सुपुरा ने निभाई अहम भूमिका,,
स्थानीय लोगों ने कहा— मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप जमीनी स्तर पर काम करने वाले पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं का हो निष्पक्ष मूल्यांकन,,
हरिद्वार, 26 जुलाई 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को राज्य स्तरीय सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद हरिद्वार में भी इस दिशा में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग उठाई है कि वर्षों से निस्वार्थ भाव से वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम के योगदान पर भी राज्य सरकार गंभीरता से विचार करे।
हरिद्वार वन प्रभाग की पथरी रेंज में पिछले लगभग दस वर्षों से मोहम्मद सलीम लगातार वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बिना किसी सरकारी लाभ या निजी स्वार्थ के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद उनका नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
बताया जाता है कि भीषण गर्मी के दौरान जब जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं, तब मोहम्मद सलीम अपने साथियों के सहयोग से पथरी जंगल क्षेत्र के तालाबों और जलस्रोतों में पानी भरवाने का कार्य करते हैं। इससे हाथी, हिरण, नीलगाय, बंदर समेत अनेक वन्यजीवों को पानी उपलब्ध हो पाता है और उन्हें गर्मी से राहत मिलती है।
इसके अलावा उन्होंने कई अवसरों पर घायल अथवा संकट में फंसे वन्यजीवों के रेस्क्यू अभियान में वन विभाग की सहायता की है। अवैध शिकार की घटनाओं की सूचना देकर कार्रवाई में सहयोग करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी लगातार किया है।
मोहम्मद सलीम लंबे समय से पथरी जंगल–लक्सर रेलवे लाइन पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग अथवा सुरक्षा बाउंड्री बनाए जाने की मांग भी उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि रात के समय और घने कोहरे के दौरान कई जंगली जानवर रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते हैं, जिससे ट्रेन की चपेट में आकर उनकी मौत हो जाती है। उनका मानना है कि प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था होने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि राज्य सरकार वास्तव में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करना चाहती है, तो जमीनी स्तर पर वर्षों से निस्वार्थ सेवा देने वाले लोगों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि मोहम्मद सलीम के कार्यों से जुड़े आवेदन, समाचार, तस्वीरें, वीडियो और वन विभाग के अभिलेख उपलब्ध हैं, तो मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप नियमों के तहत उनके नाम पर भी राज्य स्तरीय सम्मान के लिए विचार किया जाना चाहिए।
अब सबकी निगाहें उत्तराखंड वन विभाग और राज्य वन्यजीव बोर्ड पर टिकी हैं कि वे ऐसे जमीनी कार्यकर्ताओं के योगदान का किस प्रकार आकलन करते हैं और सम्मान की प्रक्रिया को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं। यदि ऐसे समर्पित लोगों को पहचान और सम्मान मिलता है, तो यह न केवल उनके कार्यों का सम्मान होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।



